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Varanasi News: लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ केस में पक्षकार बनाने की मांग पर टली सुनवाई, 28 अगस्त को पड़ी अगली तारीख
Wed, 14 Aug 2024 09:09 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 14 Aug 2024 09:09 AM IST
सार
लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ केस में वादी रहे हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनके बेटों को पक्षकार बनाने से संबंधित निगरानी अर्जी पर होने वाली सुनवाई टल गई। मामले को लेकर अब अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विशेष न्यायाधीश आवश्यक वस्तु अधिनियम की कोर्ट में मंगलवार को प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ वाद के वादी रहे हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनके बेटों को पक्षकार बनाने से संबंधित निगरानी अर्जी पर सुनवाई नहीं हो पाई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। पिछली तिथि पर कोर्ट में निगरानी कर्ता की ओर से बहस पूरी हो चुकी है। लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से बहस होनी है।
पिछले माह सिविल जज सीनियर डिवीजन / फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत ने हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनके बेटों को मुकदमे का पक्षकार बनाने की अर्जी खारिज कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ जिला जज की कोर्ट में निगरानी अर्जी दाखिल की गई।
हरिहर पांडेय के पुत्र प्रणय पांडेय और करण शंकर पांडेय की ओर से पक्षकार बनाने की मांग की गई है। कोर्ट में वाद मित्र की ओर से कहा गया कि यह वाद जनहित वाद है। इसमें कोई जरूरी नहीं है कि वादी की मृत्यु के बाद उनके वारिस को पक्षकार बनाया जाए।
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इससे पहले निगरानीकर्ता के अधिवक्ता ने कहा था कि यह व्यक्तिगत वाद है। तीन लोगों ने यह वाद दाखिल किया था। ऐसे में दिवंगत वादी के वारिस भी पक्षकार बन सकते हैं।
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पिछले माह सिविल जज सीनियर डिवीजन / फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत ने हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनके बेटों को मुकदमे का पक्षकार बनाने की अर्जी खारिज कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ जिला जज की कोर्ट में निगरानी अर्जी दाखिल की गई।
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हरिहर पांडेय के पुत्र प्रणय पांडेय और करण शंकर पांडेय की ओर से पक्षकार बनाने की मांग की गई है। कोर्ट में वाद मित्र की ओर से कहा गया कि यह वाद जनहित वाद है। इसमें कोई जरूरी नहीं है कि वादी की मृत्यु के बाद उनके वारिस को पक्षकार बनाया जाए।
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इससे पहले निगरानीकर्ता के अधिवक्ता ने कहा था कि यह व्यक्तिगत वाद है। तीन लोगों ने यह वाद दाखिल किया था। ऐसे में दिवंगत वादी के वारिस भी पक्षकार बन सकते हैं।