भाजपा जिलाध्यक्ष: वाराणसी में हंसराज ने रचा इतिहास, सजा तीसरी बार ताज, विद्यासागर को भी दूसरी बार कमान
आम चुनाव की आहट के बीच घोषित हुए भाजपा जिलाध्यक्षों की सूची में एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा के नाम ने इतिहास रच दिया है। दो कार्यकाल में सात वर्षों तक वाराणसी जिलाध्यक्ष हंसराज की कमान संभालने वाले विश्वकर्मा पर पार्टी ने तीसरी बार भी भरोसा जताया है।
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आम चुनाव की आहट के बीच घोषित हुए भाजपा जिलाध्यक्षों की सूची में एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा के नाम ने इतिहास रच दिया है। दो कार्यकाल में सात वर्षों तक वाराणसी जिलाध्यक्ष हंसराज की कमान संभालने वाले विश्वकर्मा पर पार्टी ने तीसरी बार भी भरोसा जताया है। एक दशक की बात करें तो ऐसा पहली बार हुआ कि संगठन ने एक ही व्यक्ति को तीसरी बार मौका दिया है। उधर, महानगर अध्यक्ष के रूप में विद्या सागर राय पर पार्टी ने लगातार दूसरी बार भरोसा जताया है।
संगठन में बदलाव की बहुप्रतीक्षित घोषणा के बाद वाराणसी में बदलाव की बांट जोह रहे दावेदार मायूस हो गए। संगठन ने आश्चर्यजनक निर्णय करते हुए जिलाध्यक्ष और एलएलसी हंसराज विश्वकर्मा को तीसरे कार्यकाल की कमान सौंप दी है। आमतौर पर भाजपा संगठन में अधिकतम दो कार्यकाल और एक व्यक्ति-एक पद की नीति लागू है।
पार्टी ने अगड़े और पिछड़े समीकरण को साधा
मगर, वर्ष 2017 से वाराणसी में अनवरत विजय रथ को आगे बढ़ा रहे हंसराज की ताजपोशी में संगठन के समीकरण आड़े नहीं आए। दूसरी तरफ, पार्टी ने जिला और महानगर अध्यक्ष पद के लिए बढ़ी दावेदारों की भीड़ व नए चेहरे से बिखराव को रोकने के लिए पुराने चेहरे पर ही दांव लगाया। इस जोड़ी के जरिये पार्टी ने अगड़े और पिछड़े समीकरण को भी साध लिया है।
हंसराज विश्वकर्मा की अगुवाई में पिछले सात वर्षों में दो बार पंचायत, दो विधानसभा और दो लोकसभा के चुनाव में पार्टी ने क्लीन स्वीप किया। ऐसे ही महानगर विद्यासागर राय की अगुवाई में पार्टी ने वाराणसी निकाय में ऐतिहासिक जीत हासिल की। पुराने चेहरों पर पार्टी के निर्णय को संगठन की ओर से चलाए जा रहे अभियानों की अनवरत सफलता से भी जोड़ा जा रहा है।
संगठन में जगह बनाने के लिए शुरू हुई कवायद
जिला और महानगर अध्यक्ष की घोषणा के बाद अब जल्द ही कार्यकारिणी का चयन किया जाएगा। ऐसे में टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए नेताओं ने कवायद शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह दोनों ही अध्यक्ष अपनी टीम तय करेंगे। ऐसे में पुराने और नए चेहरों के बीच समन्वय बनाना चुनौती होगी।