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Gyanvapi case: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रार्थना पत्र पर आज सुनवाई, कोर्ट के आदेश पर सबकी नजर टिकी
Thu, 24 Nov 2022 11:49 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Thu, 24 Nov 2022 11:49 AM IST
सार
Gyanvapi Mosque Case Hearing: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है। जिस पर आज अदालत में सुनवाई होनी है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के एक मामले पर आज अदालत में सुनवाई होनी है। जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है।
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बता दें कि सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई शुक्रवार को भी पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण 18 नवंबर को टल गई थी। जिस पर 24 नवंबर की तारीख दी गई थी। वादी के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया है कि ज्ञानवापी से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई एक ही कोर्ट में हो। ऐसे में जिला जज की अदालत में जल्द आवेदन देकर एक साथ सुनवाई किये जाने का अनुरोध किया होगा।
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Prayagraj News : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती।
- फोटो : अमर उजाला।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे और अब उनकी मृत्यु के बाद शंकराचार्य का पद संभाल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी,रमेश उपाध्याय चंद्रशेखर सेठ के माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है जिसमे शृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत रागभोग,पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था, लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है। न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया। उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की परस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है।