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गया में पितृपक्ष महासंगम का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच डिप्टी सीएम ने किया शुभारंभ
एजंसी,अमर उजाला,गया
Updated Tue, 05 Sep 2017 10:02 PM IST
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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गया पितृपक्ष मेला शुरू
- फोटो : facebook
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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंगलवार को विश्वप्रसिद्ध गया पितृपक्ष मेले का आगाज हो गया। विष्णुद्वार के पास बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने नारियल फोड़कर मेले का शुभारंभ किया।
विष्णुपद मंदिर परिसर में उद्घाटन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सत्रह दिनों तक चलने वाले इस मेले में देश के कोने-कोने से तीर्थयात्री आते हैं। उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसका सरकार व जिला प्रशासन की ओर से पूरा ख्याल रखा गया है।
यात्रियों के आवास, उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था है। डिप्टी सीएम ने कहा कि गया की धरती पर पितरों को मोक्ष दिलाने की जिस भावना के साथ तीर्थयात्री आते हैं, उनकी भावना को ठेस न पहुंचे और यहां से जाने के बाद वे यात्री गया की अच्छी छवि लेकर जाएं।
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कार्यक्रम में रहे आयुक्त जितेंद्र श्रीवास्तव, डीएम कुमार रवि व एसएसपी गरिमा मलिक ने डिप्टी सीएम को तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और समुचित सेवा का भरोसा दिलाया।
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विष्णुपद मंदिर परिसर में उद्घाटन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सत्रह दिनों तक चलने वाले इस मेले में देश के कोने-कोने से तीर्थयात्री आते हैं। उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसका सरकार व जिला प्रशासन की ओर से पूरा ख्याल रखा गया है।
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यात्रियों के आवास, उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था है। डिप्टी सीएम ने कहा कि गया की धरती पर पितरों को मोक्ष दिलाने की जिस भावना के साथ तीर्थयात्री आते हैं, उनकी भावना को ठेस न पहुंचे और यहां से जाने के बाद वे यात्री गया की अच्छी छवि लेकर जाएं।
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कार्यक्रम में रहे आयुक्त जितेंद्र श्रीवास्तव, डीएम कुमार रवि व एसएसपी गरिमा मलिक ने डिप्टी सीएम को तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और समुचित सेवा का भरोसा दिलाया।
काशी के प्रेतकुंड में भटकती आत्माओं के नाम पिंडदान
धर्मकूप, मणिकर्णिका और दशाश्वमेध पर तर्पण-अर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ेंगे वंशज
- फोटो : facebook
काशी में पतितपावनी गंगा के तटों से लेकर प्रमुख कुंडों और कूपों पर पूर्वजों के नाम पर तर्पण-अर्पण और श्राद्ध के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वंशजों का रेला उमड़ने से पहले कुंडों से लेकर घाटों तक की सफाई शुरू करा दी गई है। पुरोहितों की चौकियां सजने लगी हैं तो कुशा, तिल, जौ, अक्षत, पुरवा का बाजार भी सज गया है।
भटकती आत्माओं की शांति के लिए पिशाचमोचन कुंड (बिमल तीर्थ) पर त्रिपिंडी श्राद्ध की भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अकाल मृत्यु के चलते भटकने या फिर परेशान करने वाली आत्माओं की शांति के लिए पिशाचमोन कुंड पर विशेष कर्मकांड होंगे।
पिशाचमोचन कुंड के कर्मकांडी पंडा मुन्ना लाल पांडेय ने बताया कि इस कुंड पर अशांत आत्माओं को तृप्त करने के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाएगा। पिशाचमोचन पर प्रेतकुंड में भटकती आत्माओं के नाम पर पिंडदान किया जाएगा। इस प्रेतकुंड में पिंडदान के साथ ही परिसर के पुराने वृक्ष में कीलें भी ठोंकी जाएंगी। भूतबाधा से परेशान महिलाओं, पुरुषों की भीड़ लगेगी और पिंडदान के साथ ही अन्य टोटके भी किए जाएंगे।
पिशाचमोचन कुंड परिसर में टेंट-तंबू भी डाले जा रहे हैं। हालांकि पिशाचमोचन कुंड की इस बार रंगाई-पोताई भी नहीं कराई गई है, लेकिन कुंड परिसर से निकली नाली की सफाई नगर निगम ने शुरू करा दी है। महालया पर छह सितंबर से ही इस कुंड पर पिंडदान और श्राद्ध आरंभ हो जाएगा।
भटकती आत्माओं की शांति के लिए पिशाचमोचन कुंड (बिमल तीर्थ) पर त्रिपिंडी श्राद्ध की भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अकाल मृत्यु के चलते भटकने या फिर परेशान करने वाली आत्माओं की शांति के लिए पिशाचमोन कुंड पर विशेष कर्मकांड होंगे।
पिशाचमोचन कुंड के कर्मकांडी पंडा मुन्ना लाल पांडेय ने बताया कि इस कुंड पर अशांत आत्माओं को तृप्त करने के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाएगा। पिशाचमोचन पर प्रेतकुंड में भटकती आत्माओं के नाम पर पिंडदान किया जाएगा। इस प्रेतकुंड में पिंडदान के साथ ही परिसर के पुराने वृक्ष में कीलें भी ठोंकी जाएंगी। भूतबाधा से परेशान महिलाओं, पुरुषों की भीड़ लगेगी और पिंडदान के साथ ही अन्य टोटके भी किए जाएंगे।
पिशाचमोचन कुंड परिसर में टेंट-तंबू भी डाले जा रहे हैं। हालांकि पिशाचमोचन कुंड की इस बार रंगाई-पोताई भी नहीं कराई गई है, लेकिन कुंड परिसर से निकली नाली की सफाई नगर निगम ने शुरू करा दी है। महालया पर छह सितंबर से ही इस कुंड पर पिंडदान और श्राद्ध आरंभ हो जाएगा।