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गंगा दशहरा: विधायक नीलकंठ ने 51 बटुकों के साथ मां गंगा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दुग्धाभिषे किया

Tue, 26 May 2026 08:50 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 26 May 2026 08:50 AM IST
सार

Varanasi News: गंगा दशहरा के अवसर पर सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। लोगों ने गंगा स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे घाट क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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Ganga Dussehra scorching heat Nautapa devotees found spiritual solace through refreshing dip Ganges
विधायक नीलकंठ तिवारी ने किया गंगा पूजन। - फोटो : संवाद

विस्तार

गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मंगलवार को काशी के घाट श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आए। इस दौरान पूर्व मंत्री एवं शहर दक्षिणी विधायक नीलकंठ तिवारी ने 51 बटुकों के साथ मां गंगा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दुग्धाभिषेक कर विधिवत पूजन-अर्चन किया। घाट पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय लोग शामिल हुए।

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गंगा तट पर हर-हर महादेव और गंगा मैया के जयघोष के बीच हुए इस आयोजन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। 51 बटुकों द्वारा एक साथ मां गंगा का पूजन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। वैदिक मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था ने घाट क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

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हर-हर महादेव की गूंज

पूजन के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक नीलकंठ तिवारी ने सनातन संस्कृति और भारतीय परंपराओं को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को एक सूत्र में बांधने वाली जीवन शैली है। काशी सदियों से आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रही है, जहां की परंपराएं पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराएं समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी ताकत हैं। आधुनिकता के इस दौर में भी लोगों को अपनी जड़ों, संस्कारों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहना चाहिए। काशी की पहचान उसके घाट, मंदिरों, धार्मिक आयोजनों और आध्यात्मिक वातावरण से है।

विधायक ने युवाओं से भी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी यदि अपनी परंपराओं से जुड़ी रहेगी तो भारतीय संस्कृति आने वाले समय में भी सुरक्षित और जीवंत बनी रहेगी। काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि सनातन सभ्यता और भारतीय संस्कृति की आत्मा है।

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