पिता के हौसले, बेटी का जुनून: 16 किमी साइकिल चलाकर किया कुश्ती का अभ्यास, अब दुनिया में लहरा रही देश का परचम
पूर्वांचल की केसरी कही जाने वाली पूजा यादव ने अपनी जिंदगी में काफी संघर्ष किया है। वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता में भी खेल चुकी हैं। अमेरिका और बुडापेस्ट में आयोजित खेल में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।
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स्कूल के दिनों में प्रतियोगिताओं में भाई को जूडो खेलते देखा तो खुद भी मन में चैंपियन बनने की ठान ली। यह कहना है नेशनल और इंटरनेशनल कुश्ती प्रतियोगिताओं में अपना परचम लहराने वाली पूजा यादव का। पूजा ने साल 2015 में चीन में सब जूनियर एशिया कुश्ती चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। इसमें उन्होंने रजत पदक जीता था।
लोहता की रहने वाली पूजा यादव ने इसी साल जुलाई में अमेरिका में इंटरनेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर अपने घर परिवार और जिले समेत पूरे देश का नाम रोशन किया है। पूजा वर्तमान में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल में कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत हैं।
पूर्वांचल केसरी के नाम से प्रसिद्ध पूजा ने बहुत कम समय में कई उपलब्धियां अपने नाम की हैं। उन्होंने चीन और अमेरिका के अलावा वुडापेस्ट में साल 2019 में हुई अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता में छठवीं रैंक हासिल की थी।
हंगरी में अक्तूबर 2019 में वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने अपना दमखम दिखाया था। विशाखपत्तनम में 2022 में हुई सीनियर कुश्ती चैंपियनशिप में अर्जुन अवॉर्डी पूजा ढांडा को पटखनी देकर यूपी को पदक दिलाया था।
16 किलोमीटर साइकिल चलाने के बाद शुरू होती थी प्रैक्टिस
बचपन से ही पूजा स्पोर्ट्स में कुश्ती में रूचि थी। पूजा ने बताया कि कोच ने पिता से कह दिया कि इसे पहलवान बनाइए। संसाधनों की कमी के चलते इंटरनेशनल पदक तक का सफर आसान नहीं था। डाॅ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम सिगरा में कुश्ती का प्रशिक्षण लेने पूजा गांव से साइकिल से आती-जाती थीं। उन्हें 16 किलोमीटर साइकिल चलानी होती थी। कठिन परिश्रम से पूजा ने यह मुकाम हासिल किया। पूजा ने बताया कि उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल में नौकरी मिल गई है।
स्पोर्ट्स कोटे से पूजा को नौकरी मिल गई, लेकिन उनका मन आज भी खेल के लिए समर्पित है। पूजा का संघर्ष अन्य बालिका खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। - गोरख यादव, कोच।