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पुलिस की पाठशालाः बोले DCP काशी जोन, पुलिस से डरें नहीं, बेझिझक बताएं समस्या, समाधान होगा

Mon, 18 Mar 2024 10:36 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 18 Mar 2024 10:36 PM IST
सार

Police Ki Pathshala: पुलिस की पाठशाला में छात्र-छात्राओं ने साइबर अपराध और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित कई सवाल पूछे, जिसका उत्तर पाकर वे संतुष्ट भी हुए। IPS प्रमोद कुमार ने कहा कि छात्राएं नाम-पता बताए बगैर 1090 पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। पुलिस को अपनी शिकायत सुनाने का 112 नंबर एक ऐसा प्रभावी माध्यम है जो पूरे देश में सिर्फ उत्तर प्रदेश में है। 

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DCP Kashi Zone said in police ki pathshala do not afraid of the police
कार्यक्रम को संबोधित करते आईपीएस प्रमोद कुमार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुलिस से डरें नहीं, अपनी शिकायत बेझिझक बताएं। शिकायत का समाधान जरूर होगा। चुप रहकर हम अपराध को बढ़ावा ही देते हैं। पुलिस तक अपनी शिकायत आवेदन देकर, फोन करके या फिर सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी पहुंचाई जा सकती है। यह बातें डीसीपी काशी जोन प्रमोद कुमार ने बीएचयू के शताब्दी कृषि सभागार में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में कहीं।

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आईपीएस प्रमोद कुमार ने छात्र-छात्राओं से कहा कि पुलिस तक अब आम लोगों की पहुंच पहले से अधिक आसान हो गई है। कोई भी अपनी शिकायत पुलिस तक पहुंचा सकता है। छात्राएं नाम-पता बताए बगैर 1090 पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। पुलिस को अपनी शिकायत सुनाने का 112 नंबर एक ऐसा प्रभावी माध्यम है जो पूरे देश में सिर्फ उत्तर प्रदेश में है।
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चोरी या सामान गायब होने की शिकायत ऑनलाइन दर्ज कराई जा सकती है। डीसीपी काशी जोन ने कहा कि इन दिनों समाज और पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती साइबर क्राइम है। आभासी दुनिया में हमारी सजगता ही हमारी सुरक्षा का सशक्त माध्यम है। 

मोबाइल पर अनजान नंबर से आए हुए किसी भी लिंक, मैसेज या कॉल पर भरोसा न करें। फोन करके कोई किसी तरह से धमकाए या लालच दे तो उसके झांसे में न आएं। इससे पहले महामाना पंडित मदन मोहन मालवाीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर छात्र-छात्राओं ने बीएचयू का कुलगीत गाया।

इस दौरान बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एसवीएस राजू, छात्र अधिष्ठाता प्रो. एके नेमा, चीफ प्रॉक्टर प्रो. शिवप्रकाश सिंह, आईएमएस बीएचयू के डिप्टी चीफ प्रॉक्टर प्रो. ललित मोहन अग्रवाल के साथ ही बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान से डॉ. वीके त्रिपाठी, प्रो. पीके शर्मा, बीएचयू पत्रकारिता विभाग के डॉ. धीरेंद्र राय, डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र, डॉ. बाला लखेंद्र, विज्ञान संस्थान से प्रो. मनोज श्रीवास्तव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

90 दिन में होता है एफआईआर का निस्तारण

आईपीएस प्रमोद कुमार ने बताया कि कोई भी एफआईआर दर्ज होती है तो उसके निस्तारण का समय 90 दिन होता है। इस तिथि तक संबंधित जांच अधिकारी को चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट दाखिल करनी होती है। दूसरी ओर पॉक्सो एक्ट में इसका समय कम होकर 60 दिन है। ऐसे में मुकदमों का समयबद्ध तरीके से निसतारण करना संबंधित जांच अधिकारी की जिम्मेदारी होती है।

छात्रों से संबंधित मुकदमे प्राथमिकता के साथ निस्तारित कराएंगे
डीसीपी काशी जोन ने कहा कि विश्वविद्यालयों या महाविद्यालयों के जिन भी छात्रों पर मुकदमे दर्ज हैं, हम उन्हें प्राथमिकता के साथ निस्तारित कराएंगे। हम यह नहीं चाहते हैं कि बेवजह की मुकदमेबाजी में फंस कर किसी छात्र का भविष्य चौपट हो। छात्र भी अपने भविष्य को देखते हुए कोई भी काम सोच-समझ कर करें। यदि वह आपराधिक गतिविधि में लिप्त रहेंगे तो पुलिस उनकी मदद नहीं कर पाएगी।

छात्रों ने पूछे सवाल

DCP Kashi Zone said in police ki pathshala do not afraid of the police
बीएचयू के शताब्दी कृषि सभागार में मौजूद लोग। - फोटो : अमर उजाला

सवालः छात्रों के मन में पुलिस के प्रति भय को कैसे दूर किया जाए। कभी कभी छात्रों पर फर्जी मुकदमे दर्ज होते हैं, ऐसा क्यों होता है। - राजीव नयन, एमए अर्थशास्त्र
जवाबः छात्रों को कभी भी अपने मन में पुलिस के प्रति भय नहीं रखना चाहिए। पुलिस फर्जी मुकदमा दर्ज नहीं करती है। जब भी कोई तहरीर देता है, तो मुकदमा दर्ज कर जांच होती है। तथ्य और साक्ष्य के आधार पर जांच के बाद कार्रवाई होती है।

सवालः अवैश शराब पकड़ने का अभियान चलाया जाता है, फिर भी इसका असर नहीं दिखता है। - रंजीत राय, शोध छात्र
जवाबः पुलिस की ओर से अभियान चलाकर अवैध शराब का कारोबार करने वालों पर कार्रवाई की जाती है। साथ ही संबंधित क्षेत्र की पुलिस भी निगरानी रखती है।

सवालः आईआईटी बीएचयू कैंपस में छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। - अक्षिता सिंह, बीए द्वितीय वर्ष महिला महाविद्यालय
जवाबः ऐसे गंभीर किस्म के अपराधों में पुलिस प्राथमिकता के साथ प्रभावी कार्रवाई करती है। आईआईटी बीएचयू के प्रकरण को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द निस्तारित कराने का प्रयास किया जाएगा।

सवालः पुलिस कर्मियों के सामने बहुत सारी चुनौतियां होती हैं। इसके बाद भी वह सेवा के लिए तत्पर कैसे रहते हैं। - मानसी शुक्ला, बीए द्वितीय वर्ष
जवाबः चुनौतियां जीवन के हर क्षेत्र में हैं। जहां तक पुलिस की बात है तो लॉ एंड आर्डर मेंटेन करने में कभी-कभी रात भर बाहर ही रहना पड़ता है। घर नहीं जा पाते हैं। इन सबको पीछे भूलकर लोगों की सेवा में जो आनंद मिलता है, उसकी एक अलग खुशी होती हैं।

सवालः काशी में सड़कों पर जाम लगना आम बात हो गई है। इस वजह से विश्वविद्यालय आने में भी देरी हो जाती है। जाम से पुलिस कैसे निजात दिलाएगी। - अनिकेत खरवार, बीए तृतीय वर्ष
जवाबः काशी में रोजाना एक लाख से अधिक पर्यटक आते हैं। इस वजह से सड़कों पर दबाव बढ़ गया है। इसके बाद भी जाम से निजात दिलाने के लिए पुलिस हरसंभव प्रयास करती है। जिस सड़क पर जाम अधिक लगता है, वहां समस्या के समाधान के लिए डायवर्जन प्लान लागू किया जाता है।

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