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ना हों भ्रमित 25 को मनाएं विजयादशमी का महापर्व
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वाराणसी। शारदीय नवरात्र में अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि को लेकर मतभेद की स्थिति है। हालांकि, ज्योतिषियों और काशी के पंचांगों के अनुसार विजयादशमी महापर्व 25 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि सप्तमी तिथि शुक्रवार 23 अक्तूबर को दिन में 12 बजकर 8 मिनट तक है। उसके बाद अष्टमी आरंभ हो रही है। यह अगले दिन शनिवार को 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। नवरात्रि में सूर्य ग्राह्य के अनुसार तिथि का मान होता है। इस कारण अष्टमी तिथि 24 तारीख दिन शनिवार को है। हालांकि, अष्टमी तिथि की दोपहर में ही नवमी आ जा रही है जो अगले दिन रविवार को 11 बजकर 14 मिनट तक रह रही है। इस कारण नवमी को होने वाला हवन पूजन रविवार को ही होगा। परंतु जो भक्त केवल महानवमी को व्रत रखना चाहेंगे, उनके लिए पारण सोमवार को रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयादशमी होती है। इसमें अपराह्न काल की प्रधानता है। इस वर्ष आश्विन शुक्ल की नवमी रविवार 25 अक्टूबर को दिन में 11:14 मिनट तक है, दूसरे दिन सोमवार 26 अक्तूबर को दशमी तिथि दिन में 11:33 तक है जो अपराह्न काल के पूर्व ही समाप्त हो जाती है। दूसरे दिन उदया दशमी मुख्य काल अर्थात् अपराह्न काल को स्पर्श नहीं करती है। धर्म सिंधु के अनुसार, ऐसी स्थिति में रविवार 25 अक्तूबर को ही विजयादशमी मनानी चाहिए।
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ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि सप्तमी तिथि शुक्रवार 23 अक्तूबर को दिन में 12 बजकर 8 मिनट तक है। उसके बाद अष्टमी आरंभ हो रही है। यह अगले दिन शनिवार को 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। नवरात्रि में सूर्य ग्राह्य के अनुसार तिथि का मान होता है। इस कारण अष्टमी तिथि 24 तारीख दिन शनिवार को है। हालांकि, अष्टमी तिथि की दोपहर में ही नवमी आ जा रही है जो अगले दिन रविवार को 11 बजकर 14 मिनट तक रह रही है। इस कारण नवमी को होने वाला हवन पूजन रविवार को ही होगा। परंतु जो भक्त केवल महानवमी को व्रत रखना चाहेंगे, उनके लिए पारण सोमवार को रहेगा।
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ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयादशमी होती है। इसमें अपराह्न काल की प्रधानता है। इस वर्ष आश्विन शुक्ल की नवमी रविवार 25 अक्टूबर को दिन में 11:14 मिनट तक है, दूसरे दिन सोमवार 26 अक्तूबर को दशमी तिथि दिन में 11:33 तक है जो अपराह्न काल के पूर्व ही समाप्त हो जाती है। दूसरे दिन उदया दशमी मुख्य काल अर्थात् अपराह्न काल को स्पर्श नहीं करती है। धर्म सिंधु के अनुसार, ऐसी स्थिति में रविवार 25 अक्तूबर को ही विजयादशमी मनानी चाहिए।
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