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उप राष्ट्रपति के चुनाव में फर्जी तरीके से नामांकन करने के मामले में आरोपी अडिग को मिली जमानत
Sun, 25 Aug 2019 07:57 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sun, 25 Aug 2019 07:57 PM IST
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नरेन्द्रनाथ दुबे अडिग प्रेसवार्ता के दौरान।
- फोटो : अमर उजाला
उप राष्ट्रपति के चुनाव में 40 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर कर नामांकन पत्र दाखिल करने के आरोपी अधिवक्ता नरेंद्र नाथ दुबे अडिग की जमानत अर्जी नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वीकार कर ली। नई दिल्ली पुलिस की अभिरक्षा से छूट कर घर आए अडिग ने रविवार को वाराणसी में अपने आवास पर कहा कि नामांकन दाखिल करना कोई अपराध नहीं है। वह आगे भी चुनाव लड़ते रहेंगे।
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इस दौरान डॉ. अजीत श्रीवास्तव, चपाचप बनारसी, इंद्रजीत निर्भीक, चिंतित बनारसी, अनुज दुबे और शहजाद अली आजाद आदि मौजूद थे। बता दें कि नई दिल्ली पुलिस बीते 20 अगस्त को अडिग को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर लिया था। अडिग पर 13 दिसंबर 2012 को केस दर्ज किया गया था।
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क्यों रखा नाम अडिग :
नरेंद्र नाथ दूबे अडिग को काशी का धरतीपकड़ भी कहा जाता है। इनका नाम है अडिग इसलिए हुआ है क्योंकि 1984 से लगातार लोकसभा, विधानसभा और स्नातक चुनाव और उपचुनाव लड़ते आ रहे हैं। हार रहे हैं मगर अपने इरादे से डिग नहीं रहे। नरेंद्र नाथ दूबे अडिग ने पांचवीं बार राष्ट्रपति चुनाव के लिए पर्चा भरा था। नरेंद्र नाथ दूबे अडिग पेशे से वाराणसी कचहरी में वकील हैं। एमए, एलएलबी की पढ़ाई कर चुके नरेंद्र नाथ दूबे अडिग 1984 में वाराणसी के एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़े। तब से लेकर आज तक जितने भी विधानसभा, लोकसभा, स्नातक विधान परिषद और उपचुनाव हुए सभी में नामांकन किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बनारस से पीएम मोदी के खिलाफ भी दावेदारी पेश की थी, मगर उनकी जमानत जब्त हो गई।
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इसके आलावा दो बार राष्ट्रपति और एक बार उप राष्ट्रपति का नामंकन किया, लेकिन हर बार मामला खारिज हो गया। इन्होंने जितने भी चुनाव लड़े उनमें से कुछ किन्हीं कमियों के कारण रद्द हो गए, बाकी जो पूरे हुए उनमे से किसी में जमानत तक जब्त हो गई थी।