{"_id":"5938fe264f1c1b78099c7ba1","slug":"bhu-hopital-operation-theatre-closed-for-two-daya","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू अस्पताल में तीन मरीजों की मौत से मरीज-तीमारदार दहशत में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू अस्पताल में तीन मरीजों की मौत से मरीज-तीमारदार दहशत में
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 09 Jun 2017 10:53 AM IST
विज्ञापन
सर सुंदर लाल अस्पताल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में मेजर आपरेशन के बाद 24 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत और आधा दर्जन से अधिक मरीजों की हालत खराब होने से खलबली मच गई है। मरीज और उनके परिवारीजन इसे लेकर दहशत में हैं।
आपरेशन के बाद जिन मरीजों की हालत खराब हुई, उनमें छह अब भी आईसीयू में भर्ती हैं। इनमें एक वेंटिलेटर पर है। घटना सामने आने के बाद अस्पताल के सभी 23 ऑपरेशन थिएटर शुक्रवार तक के लिए बंद कर दिए गए हैं।
कुलपति के निर्देश पर आठ सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है, जो 48 घंटे में पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जान गंवाने वाले मरीजों के परिवारीजन ने जहां पूरी चिकित्सकीय व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं अस्पताल प्रशासन ने अभी मौतों की वजह स्पष्ट नहीं की है लेकिन चिकित्सा अधीक्षक ने बेहोशी के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन आईसोफ्लोरेन की गुणवत्ता सही न होने और ओवरडोज होने की आशंका जताई है।
छह जून की रात 11:55 बजे अस्पताल की ओटी में राधेश्याम त्रिपाठी (56) के यूरोलॉजी कैंसर का ऑपरेशन किया गया। जबकि, सात जून को शाम चार बजे मिराज अहमद (40) की किडनी की पथरी और रात 11:20 बजे आरती देवी (45) के ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन हुआ था।
इन तीनों मरीजों की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई थी। इनके अलावा उसी दिन कुछ और मरीजों की भी आपरेशन के बाद तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। इनमें दो की हालत में सुधार है जबकि छह अब भी आईसीयू में भर्ती हैं।
मामला संज्ञान में आते ही अस्पताल प्रशासन ने घटना के कारणों की जांच के साथ ही सभी 23 ओटी को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया है। हालांकि इसका कारण उपकरणों का तकनीकी उन्नयन और मरम्मत बताया है। इस बीच अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने गुरुवार की दोपहर आपात बैठक की। उधर ओपीडी से लेकर वार्डों तक घटना से मरीजों और तीमारदारों के चेहरेे की हवाइयां उड़ी रहीं।
विज्ञापन
आपरेशन के बाद जिन मरीजों की हालत खराब हुई, उनमें छह अब भी आईसीयू में भर्ती हैं। इनमें एक वेंटिलेटर पर है। घटना सामने आने के बाद अस्पताल के सभी 23 ऑपरेशन थिएटर शुक्रवार तक के लिए बंद कर दिए गए हैं।
विज्ञापन
कुलपति के निर्देश पर आठ सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है, जो 48 घंटे में पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जान गंवाने वाले मरीजों के परिवारीजन ने जहां पूरी चिकित्सकीय व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं अस्पताल प्रशासन ने अभी मौतों की वजह स्पष्ट नहीं की है लेकिन चिकित्सा अधीक्षक ने बेहोशी के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन आईसोफ्लोरेन की गुणवत्ता सही न होने और ओवरडोज होने की आशंका जताई है।
छह जून की रात 11:55 बजे अस्पताल की ओटी में राधेश्याम त्रिपाठी (56) के यूरोलॉजी कैंसर का ऑपरेशन किया गया। जबकि, सात जून को शाम चार बजे मिराज अहमद (40) की किडनी की पथरी और रात 11:20 बजे आरती देवी (45) के ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन हुआ था।
इन तीनों मरीजों की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई थी। इनके अलावा उसी दिन कुछ और मरीजों की भी आपरेशन के बाद तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। इनमें दो की हालत में सुधार है जबकि छह अब भी आईसीयू में भर्ती हैं।
मामला संज्ञान में आते ही अस्पताल प्रशासन ने घटना के कारणों की जांच के साथ ही सभी 23 ओटी को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया है। हालांकि इसका कारण उपकरणों का तकनीकी उन्नयन और मरम्मत बताया है। इस बीच अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने गुरुवार की दोपहर आपात बैठक की। उधर ओपीडी से लेकर वार्डों तक घटना से मरीजों और तीमारदारों के चेहरेे की हवाइयां उड़ी रहीं।