फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   BHU Dr. Ram Sudhar said that voice of Indian identity has weakened since independence

BHU: डाॅ. राम सुधार बोले- आजादी मिलने के बाद मंद पड़ गया भारतीयता का स्वर, विद्वानों ने किया संवाद

Fri, 19 Dec 2025 06:02 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 19 Dec 2025 06:02 AM IST
सार

Varanasi News: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विद्वानों ने पं. विद्यानिवास मिश्र की जीवनी और उनके कार्यों पर विस्तृत चर्चा की। कहा कि भारतीय चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, नृत्य, संगीत के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक चेतना अद्भुत है।

विज्ञापन
BHU Dr. Ram Sudhar said that voice of Indian identity has weakened since independence
BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र सभागार में बृहस्पतिवार को पं. विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में विद्वानों के बीच संवाद हुआ। साहित्यकार डाॅ. राम सुधार ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व भारतीयता का स्वर सबसे प्रबल था लेकिन आजादी मिलने के बाद भारतीयता का स्वर मंद पड़ने लगा था। लोहिया, पं विद्या निवास और शिव प्रसाद सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से जीवित रखा।

विज्ञापन


इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र, अंत: सांस्कृतिक केंद्र और विद्याश्री न्यास के इस संयुक्त कार्यक्रम में वक्ता डाॅ. राकेश मंजुल ने कहा कि सिनेमा विधा की अवधारणा में ही भारत बोध छिपा है। भारतीय लोक मानस में छाया प्रतुल की लोक प्रियता ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में ही सातवाहन साम्राज्य में मिलती है। आज भी आंध्र, कर्नाटक से लेकर इंडोनेशिया, कंबोडिया, मलेशिया, थाईलैंड और वर्मा में ये विधा लोकप्रिय है।

विज्ञापन

बिना विरासत वाले देशों में भावनात्मक समस्याएं
डाॅ. नर्मदा प्रसाद ने कहा कि भारतीय की चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, नृत्य, संगीत के माध्यम से देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक चेतना को समझा जा सकता है। डाॅ. सुप्रिया ने कहा कि वह देश जो भौतिक विकास पर आधारित होता है लेकिन उसकी सांस्कृतिक विरासत न हो तो उसको कई प्रकार की भावनात्मक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। डाॅ. मिथिलेश ने कहा कि 2047 तक भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है तो हमें दत्तोपंत ठेंगड़ी, गांधी जी और विनोबा भावे के आत्मनिर्भर व समावेशी रूप से को अपनाना होगा।

विज्ञापन

मैं नदियों से बात कर सकता हूं, यही भारत का भाव
प्रकाश उदय ने कहा कि एक बार एक विद्वान ने पं विद्यानिवास जी से पूछा कि भारत भाव क्या है- तो उन्होंने कहा कि मैं नदियों से बात कर सकता हूं, इस विश्वास का होना ही भारत भाव है। सत्र के अध्यक्ष आचार्य कृष्णकांत शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा उसके मूल सिद्धांतों जैसे कि आध्यात्मिकता, समन्वयवाद, त्याग, योग में है। क्षेत्रीय निदेशक डाॅ. अभिजीत दीक्षित दो दिन के कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की। विशिष्ट अतिथि प्रो. अंबिका दत्त, डाॅ. रमेश गौड़ मौजूद रहे। संचालन डाॅ. रजनीकांत त्रिपाठी और धन्यवाद ज्ञापन विद्याश्री न्यास के सचिव डाॅ. दयानिधि मिश्र ने किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed