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ट्रैफिक जाम से परेशान बनारस: सिस्टम बदला, मानव संसाधन बढ़ा लेकिन समस्या और हो गई गंभीर

Fri, 01 Sep 2023 05:44 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 01 Sep 2023 05:44 PM IST
सार

वाराणसी जिले में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू हुए ढाई साल से ज्यादा समय बीत गया। पुलिस महकमे में अफसरों की संख्या भी बढ़ गई लेकिन जाम की समस्या पहले से भी ज्यादा गंभीर हो गई है। 

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Banaras troubled by traffic jam System changed human resources increased but problem remains
वाराणसी के विभिन्न चौराहों पर रहा ट्रैफिक जाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी जिले में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू हुए ढाई साल से ज्यादा समय बीत गया। पुलिस महकमे में अफसरों की संख्या भी बढ़ गई लेकिन जाम की समस्या पहले से भी ज्यादा गंभीर हो गई है। हालत यह है कि रोजाना सुबह से देर शाम तक शहर के अलग-अलग इलाकों की सड़कों पर वाहन रेंगते और राहगीर जूझते नजर आते हैं। मगर, पुलिस अफसरों की फौज समस्या के समाधान के लिए स्थायी उपाय नहीं कर पा रही है।

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यातायात के लिहाज से मैदागिन चौराहा, पांडेयपुर चौराहा, मंडुवाडीह चौराहा और लंका स्थित मालवीय चौराहा पर रोजाना सुबह से देर रात तक सर्वाधिक दबाव रहता है। इसकी अहम वजह यह है कि यहां शहरवासियों के अलावा बाहरी लोगों का ज्यादा दबाव रहता है। इन चारों चौराहों पर सुबह 9:30 से 11 बजे तक यातायात की स्थिति गंभीर रहती है।

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 जाम के लिए 1100 ट्रैफिक पुलिस नाकाफी

इसके चलते इन चौराहों से संबंधित मार्गों पर भीषण जाम लगता है। ऐसी ही स्थिति का सामना दोपहर एक बजे से दो बजे के बीच और फिर शाम के समय पांच बजे से सात बजे तक रहती है। इस तरह से इन चारों चौराहों पर रोजाना चौबीस घंटे में चार घंटे से ज्यादा समय तक राहगीरों को भीषण जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।

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पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने से पहले शहर में यातायात व्यवस्था के लिए ट्रैफिक पुलिस में एक एडिशनल एसपी, एक डिप्टी एसपी, एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 10 से 12 ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर, 30 से 35 हेड कांस्टेबल, 110 से 120 कांस्टेबल और 200 से 250 होमगार्ड तैनात हुआ करते थे। पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद ट्रैफिक पुलिस के मुखिया एक आईपीएस अफसर हैं। उनकी देखरेख में एक एडिशनल एसपी, एक डिप्टी एसपी, सात ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 57 ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर, सात हेड कांस्टेबल प्रोन्नत, 226 हेड कांस्टेबल, 190 सिपाही, 580 होमगार्ड और पीआरडी के 50 जवान ट्रैफिक पुलिस में मौजूदा समय में तैनात हैं।

इन इलाकों में रोजाना लगता है भीषण जाम

मंडुवाडीह चौराहा से मुड़ैला व चांदपुर मार्ग, मंडुवाडीह चौराहा से महमूरगंज-सिगरा मार्ग, बनारस रेलवे स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार के सामने, बीएलडब्लू गेट-ककरमत्ता पुल, बीएचयू गेट-नरिया मार्ग व ट्रॉमा सेंटर मार्ग, अस्सी, गोदौलिया गिरजाघर-बेनिया मार्ग, कमच्छा-रथयात्रा मार्ग, सिगरा, लहुराबीर से मैदागिन मार्ग, कैंट रेलवे स्टेशन के सामने, नदेसर, कचहरी, पांडेयपुर, भोजूबीर, अर्दली बाजार, चौकाघाट, कज्जाकपुरा, राजघाट स्थित मालवीय पुल।

ट्रैफिक पुलिस और थानों की पुलिस में समन्वय नहीं

सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस और थानों की पुलिस के बीच कभी समन्वय नहीं नजर आता है। जाम से जूझते चौराहों के इर्द-गिर्द बेतरतीब तरीके से ठेला और ऑटो व ई-रिक्शा लेकर खड़े रहने वालों को संबंधित थानों की पुलिस प्रभावी तरीके से हटाने का प्रयास नहीं करती है। ट्रैफिक पुलिस सिर्फ यातायात के संबंध में ही अपनी ड्यूटी समझती है। इसके अलावा भी जिन स्थानों से अतिक्रमण हटाया जाता है वहां थानों की पुलिस दोबारा झांकने तक नहीं जाती है। नतीजतन, समस्या जस की तस बरकरार रहती है।

ऑटो और ई-रिक्शॉ की संख्या बेतहाशा बढ़ रही

जाम की समस्या का एक अहम कारण ऑटो और ई-रिक्शा की बेतहाशा बढ़ती हुई संख्या है। शहर में ई-रिक्शा की संख्या निश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर कोई कवायद नहीं की जा रही है। इसके चलते अब सड़कों के अलावा गलियों में भी ई-रिक्शा जाम का कारण बन रहे हैं।

वाहन पार्किंग की व्यवस्था पर नहीं किसी का ध्यान

शहर के प्रमुख बाजारों में ज्यादातर बड़े व्यावसायिक भवनों में वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। बड़े व्यावसायिक भवनों के सामने ही सड़क पर वाहन खड़े होते हैं और वह जाम का कारण बनते हैं।

अफसर सिर्फ निरीक्षण और प्लानिंग तक ही सीमित रह गए

पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन और जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने कार्यभार संभालते ही यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों का निरीक्षण किया था। तय हुआ था कि ऐसी ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी कि उसके सहारे शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाया जाएगा। निरीक्षण और बैठकों का दौर चला, कार्ययोजनाएं भी बनीं, लेकिन हकीकत के धरातल पर उन्हें लागू नहीं किया जा सका।

डेढ़ से दो लाख लोगों का रोजाना आना-जाना होता है

अफसरों के एक अनुमान के अनुसार दर्शन-पूजन, पर्यटन, शिक्षा, उपचार, व्यापार, कामकाज, यात्रा सहित अन्य कार्यों के लिए शहर में रोजाना लगभग डेढ़ से दो लाख लोग बाहर से आते-जाते हैं। घनी बसावट वाले शहर के लोगों के लिए रोजाना डेढ़ से दो लाख अतिरिक्त लोगों की आवाजाही आर्थिक रूप से तो अच्छी है, लेकिन यातायात व्यवस्था के लिहाज से यह एक बड़ी चुनौती भी है।

10 गुना ज्यादा बढ़े सैलानी, मरीजों की संख्या भी बढ़ रही

श्री काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण होने के बाद शहर में श्रद्धालुओं और सैलानियों की संख्या में 10 गुना ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख तीज-त्योहारों के साथ ही प्रत्येक शनिवार और रविवार को सैलानियों व श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ जाती है। इसके अलावा कैंसर के दो इंस्टीट्यूट और बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश से लगायत पश्चिम बंगाल तक के हजारों मरीज अपने तीमारदारों के साथ रोजाना आते हैं।

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