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UP: एंबुलेंस में मरीज नहीं... गिट्टी-बालू का होता है परिवहन, ई-रिक्शा, दमकल और शव वाहनों से पहुंचाते हैं मोरंग

Tue, 02 Sep 2025 09:53 AM IST
शाहरुख खान मनीष जायसवाल, अमर उजाला, सोनभद्र
मनीष जायसवाल, अमर उजाला, सोनभद्र Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 02 Sep 2025 09:53 AM IST
सार

सोनभद्र में एंबुलेंस, ई-रिक्शा, दमकल-शव वाहनों से गिट्टी-बालू का परिवहन कराया गया। यूपी के 17 जिलों में 83 हजार से ज्यादा ऐसे वाहनों को परमिट जारी हुए थे, इनमें 407 एंबुलेंस, 11 दमकल, 9 शव वाहन और 12 हजार से ज्यादा मोटर कार शामिल हैं।

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Ambulances, e-rickshaws, fire engines and hearse vehicles also used to transport gravel and sand in Sonbhadra
Ambulances - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी में एंबुलेंस सिर्फ मरीजों को अस्पताल ही नहीं पहुंचाती है बल्कि गिट्टी-बालू जैसे खनिज पदार्थों का परिवहन भी करती है। शव वाहन, कार, बाइक, स्कूटर, ई रिक्शा और दमकल वाहन भी गिट्टी-बालू, मोरंग पहुंचाते हैं।
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इसका खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है। सीएजी ने रिपोर्ट में बताया है कि सोनभद्र सहित यूपी के 17 जिलों में 83 हजार से ज्यादा ऐसे वाहनों को खनिज परिवहन का परमिट दिया गया जो इसके लिए उपयुक्त ही नहीं थे। 
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इन वाहनों में 407 एंबुलेंस, 11 दमकल, 9 शव वाहन और 12 हजार से ज्यादा मोटर कार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में खनन और अवैध खनन के सामाजिक, आर्थिक प्रभाव पर सीएजी ने 20 दिन पहले ऑडिट रिपोर्ट जारी की है। 
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वर्ष 2017-18 से 2021-22 की अवधि के परीक्षण के आधार पर जारी इस रिपोर्ट में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। सबसे बड़ा खुलासा खनिज सामग्री की ढुलाई के दौरान फर्जी परमिट का है। 
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ऑडिट में सीएजी ने पाया है कि सोनभद्र सहित प्रदेश के 17 जिलों में खनिज परिवहन के लिए ऐसे वाहनों को धड़ल्ले से परमिट दिए गए जो इसके लिए उपयुक्त ही नहीं हैं।


 

खनन पर सीएजी की रिपोर्ट जारी हुई है। सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। जो भी कमियां या सुझाव दिए गए हैं, उसका अनुपालन कराया जाएगा।-बद्रीनाथ सिंह, डीएम सोनभद्र

खनिज ढुलाई का मामला : 28,646 ट्रैक्टर को भी परमिट, एक वाहन से दिन में 47 चक्कर लगवाए
सीएजी की रिपोर्ट में कृषि कार्य के लिए अधिकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली का भी खनिज ढुलाई में इस्तेमाल किए जाने का जिक्र है। कुल 28,646 ट्रैक्टर खनिज की ढुलाई में लगाए गए। इसपर 7,88,059 ई ट्रांजिट पास भी जारी किए गए हैं।

 

कई मामलों में ट्रैक्टर का उपयोग एक ही दिन में 1 से 47 बार तक दिखाया गया है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार कृषि ट्रैक्टर और अन्य निजी वाहन केवल कृषि अथवा व्यक्तिगत उपयोग के लिए मान्य हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे वाहनों की संख्या 83,156 है जिन्हें 1,81,113 ट्रांजिट परमिट भी दिए गए हैं। 

इस परमिट पर 19.13 लाख घन मीटर खनिज का परिवहन किया गया है। खनिज की ढुलाई के लिए एंबुलेंस से एक दिन में 12 तो मोटर कार व कैब से 122 चक्कर तक लगवाए गए हैं। ई रिक्शा ने अधिकतम 57 चक्कर लगाए हैं। ऐसे वाहन वास्तव में खनिज ढोने योग्य ही नहीं होते इसलिए आशंका है कि इनका प्रयोग केवल अवैध खनिज परिवहन को वैध दिखाने के लिए किया गया है। 


 

इन जिलों में हुई गड़बड़ियां यह गड़बड़ी
सोनभद्र, बागपत, बांदा, बुलंदशहर, चित्रकूट, फतेहपुर, गौतमबुद्ध नगर, हमीरपुर, ज्योतिबाफुले नगर, कानपुर देहात, कौशांबी, महोबा, प्रयागराज, सहारनपुर, संभल, शामली और सिद्धार्थनगर जिलों में पाई गई।
 

 
वाहन का प्रकार वाहनों की संख्या जारी परमिट
एंबुलेंस 407 767
बुलडोजर, रोड रोलर 1621 3291
बस 3625 7165
कैंपर वैन, ट्रेलर 213 577
क्रेन 226 474
ई-रिक्शा, टेंपो 29525 61204
दमकल वाहन 11 17
शव वाहन 9 56
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