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वाराणसी: सारनाथ में आज भी डोल रही धरती, डर के साये में लोग, भूविज्ञानियों ने कही ये बात

Tue, 15 Dec 2020 04:48 PM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: विचित्र सिंह Updated Tue, 15 Dec 2020 04:48 PM IST
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All day long earth shaking in Sarnath Varanasi people scared know what the geologist said
सारनाथ - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी के सारनाथ में सोमवार को अचानक धरती डोलने के कारण स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। देखते ही देखते क्षेत्र में भूकंप की अफवाह फैल गई। अधिकांश लोगों ने इस कंपन को महसूस किया। वहीं, यह कंपन आज भी महसूस किया जा रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पिछले एक सप्ताह से हो रहा है।

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वहीं, बीएचयू के भूविज्ञानियों का कहना है कि कभी कभार जमीन के नीचे पाइप या मानवीय गतिविधि भी स्थानीय स्तर पर कंपन की वजह हो सकती है।


सारनाथ में जापानी बौद्ध मंदिर के पास मोड़ स्थित तिराहे पर 50 मीटर के क्षेत्र में सोमवार को सुबह से लेकर देर रात तक लोगों ने कंपन और तेज आवाज को महसूस किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, धरती हिलने, दुकानों के शटर, गाड़ियां, बेंच और कुर्सियों में तेजी से कंपन हुआ। दुकानों के शटर से तेज आवाज आने लगी तो अनहोनी की आशंका में लोग घबराकर दूर हट गए। पूरे दिन दुकानदार और स्थानीय लोग भय के साये में रहे।
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कुछ लोगों का कहना है कि यहीं से एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की मोटी पाइप गुजरती है, जिसमें लीकेज की संभावना हो सकती है। जानकारी होने के बाद भी पुरातत्व विभाग ने इसकी कोई सुध नहीं ली। उधर, मौसम विभाग का कहना है कि यह हलचल भूकंप नहीं है, क्योंकि 50 मीटर क्षेत्र में ऐसा होना किसी भौगोलिक हलचल को दर्शा रहा है। मौके पर निरीक्षण के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार नीचे से पानी की पाइप भी गुजरी है। संभव है, उसमें समस्या होने या गैस अथवा पेट्रोल की पाइप की वजह से भी यह समस्या हो सकती है। हालांकि, पुरातात्विक महत्व के स्थल के पास यह भूकंपीय स्थिति होना भी किसी खतरे से कम नहीं है। भूकंपीय स्थिति की वजह से ऐतिहासिक धरोहरों को भी काफी क्षति पहुंचने का अंदेशा है। जबकि पुरातत्व विभाग की ओर से इस हालात की न तो सोमवार को जानकारी ली गई और न ही इस बारे में विभागीय स्तर पर चर्चा हुई कि आखिर सारनाथ की धरती के नीचे चल क्या रहा है।

एक हफ्ते से हो रहा कंपन
जापानी मंदिर मोड़ के सामने पिछले एक हफ्ते से भूखंड हिलने का सिलसिला कल जाकर लोगों के सामने स्पष्ट हुआ। बीते सोमवार को काफी तेजी से जब दुकानदारों के शटर हिलने लगे तो लोगों को लगा कि पिछले दिनों से हम सब जो देख व महसूस कर रहे थे, वह सच में हो रहा है।

मंगलवार को भी सुबह साढ़े 11 बजे से 1:30 बजे तक कंपन को महसूस किया गया। कंपन के कारण क्षेत्र में लोगों में भय का माहौल बना हुआ है, तो वहीं, बड़े कौतूहल और चर्चाएं तेज हो गई हैं। आज कंपन का दायरा मुख्य बिंदु से लगभग 100 मीटर दूर तक महसूस किया गया। मुख्य केंद्र एक ट्रैवल एजेंसी का कार्यालय बना हुआ है, जहां पर सबसे तेज कंपन को महसूस किया गया था।

विद्यापीठ के पूर्व कुलपति एवं भू वैज्ञानिक प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि काफी कम परिक्षेत्र में भूमि का कंपन होने की मुख्य वजह आसपास के क्षेत्र से कोई मोटी पाइप गुजरी हो और उसके लिए मशीन चल रहा हो। इसकी वजह से ही कंपन आ रहा होगा। कहाकि हो सकता है कि आस-पास कोई बड़ी मशीन चल रहा हो। मौके पर जाकर ही स्पष्ट होगा कि भूमि कंपन के पीछे कारण क्या है।

भू एवं मौसम विज्ञानियों का कहना है कि कंपन वाले इलाके के दायरे में कोई पुरातात्विक अवशेष भी हो सकता है। हालांकि बिना जांच किए प्रमाणिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। विज्ञानियों का कहना है कि इस क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट जैसी कोई बात नहीं है। संभव है इस खास क्षेत्र में धरती के नीचे गैस बन रही हो और उसे निकलने का स्थान न मिल रहा हो।

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