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एक दरोगा और छह सिपाही को अनिवार्य सेवानिवृत्ति
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आजमगढ़। मंडल के आजमगढ़ और मऊ जिले में तैनात एक दरोगा, एक हेडकांस्टेबल और पांच कांस्टेबलों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है। इनके क्रिया कलाप से न सिर्फ विभाग बल्कि लोग भी त्रस्त थे। बार-बार चेतावनी के बाद भी कार्य पद्धति में सुधार नहीं हो पा रहा था। दोनों जिलों के एसपी की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट पर डीआईजी मनोज तिवारी ने रविवार को डीजीपी सहित अन्य अधिकारियों को सूचना भेज दी है। सात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मचा है। अभी एक और दरोगा कार्रवाई की जद में है।
जिन पुलिसवालों की सेवा समाप्त की गई है, उसमें मऊ जिले में तैनात दरोगा विष्णु कुमार और इसी जिले के आरक्षी विनोद कुमार गौतम का नाम शामिल है। आजमगढ़ जिले के हेडकांस्टेबल जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल अल्फ्रेंड बसंत, विनोद कुमार शुक्ला, देवनरायण कन्नौजिया और सरवर हुसैन खां का नाम शामिल है। आजमगढ़ जिले के जिन हेडकांस्टेबल और कांस्टबलों पर कार्रवाई हुई है, उसमें तीन लोग पुलिस लाइन में तैनात थे। एक कंधरापुर और दूसरा रानी की सराय थाने पर तैनात था। एसपी आजमगढ़ त्रिवेणी सिंह और एसपी मऊ अनुराग आर्या की तरफ से कार्रवाई के बाद भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक इन पुलिसवालों की आमसोहरत ठीक नहीं है। इनमें से कुछ लोगों की अपराधियों से सांठगांठ पाई गई, जबकि कई लोगों का ध्यान अपनी ड्यूटी के प्रति नहीं था। यह लोग ड्यूटी करने की बजाय अक्सर गायब रहते हैं। किसी भी कार्य को जिम्मेदारी पूर्वक नहीं करते। शराब पीकर हंगामा करते हैैं। इनके क्रिया कलाप से न सिर्फ क्षेत्र की जनता त्रस्त है, बल्कि विभाग को भी शर्मिंदा होना पड़ता है। इनकी तैनाती की वजह से नए लोगों को मौका नहीं मिल पा रहा। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी यह लोग अपनी कार्यशैली में कोई परिवर्तन नहीं ला रहे। ऐसे में इन लोगों की अब विभाग में कोई आवश्यकता नहीं है। तीन माह तक इन्हें वेतन भत्ता आदि देय होगा।
आजमगढ़, मऊ के एक दरोगा, एक हेडकांस्टेबल और पांच कांस्टेबलों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इसकी सूचना डीजीपी के अलावा अपर पुलिस महानिदेशक स्थापना लखनऊ सहित अन्य को भेज दी गई है।
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- मनोज तिवारी, डीआईजी, आजमगढ़ परिक्षेत्र
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जिन पुलिसवालों की सेवा समाप्त की गई है, उसमें मऊ जिले में तैनात दरोगा विष्णु कुमार और इसी जिले के आरक्षी विनोद कुमार गौतम का नाम शामिल है। आजमगढ़ जिले के हेडकांस्टेबल जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल अल्फ्रेंड बसंत, विनोद कुमार शुक्ला, देवनरायण कन्नौजिया और सरवर हुसैन खां का नाम शामिल है। आजमगढ़ जिले के जिन हेडकांस्टेबल और कांस्टबलों पर कार्रवाई हुई है, उसमें तीन लोग पुलिस लाइन में तैनात थे। एक कंधरापुर और दूसरा रानी की सराय थाने पर तैनात था। एसपी आजमगढ़ त्रिवेणी सिंह और एसपी मऊ अनुराग आर्या की तरफ से कार्रवाई के बाद भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक इन पुलिसवालों की आमसोहरत ठीक नहीं है। इनमें से कुछ लोगों की अपराधियों से सांठगांठ पाई गई, जबकि कई लोगों का ध्यान अपनी ड्यूटी के प्रति नहीं था। यह लोग ड्यूटी करने की बजाय अक्सर गायब रहते हैं। किसी भी कार्य को जिम्मेदारी पूर्वक नहीं करते। शराब पीकर हंगामा करते हैैं। इनके क्रिया कलाप से न सिर्फ क्षेत्र की जनता त्रस्त है, बल्कि विभाग को भी शर्मिंदा होना पड़ता है। इनकी तैनाती की वजह से नए लोगों को मौका नहीं मिल पा रहा। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी यह लोग अपनी कार्यशैली में कोई परिवर्तन नहीं ला रहे। ऐसे में इन लोगों की अब विभाग में कोई आवश्यकता नहीं है। तीन माह तक इन्हें वेतन भत्ता आदि देय होगा।
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आजमगढ़, मऊ के एक दरोगा, एक हेडकांस्टेबल और पांच कांस्टेबलों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इसकी सूचना डीजीपी के अलावा अपर पुलिस महानिदेशक स्थापना लखनऊ सहित अन्य को भेज दी गई है।
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- मनोज तिवारी, डीआईजी, आजमगढ़ परिक्षेत्र