{"_id":"140-136935","slug":"Varanasi-136935-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"चप्पू वाली नावों के संचालन पर रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चप्पू वाली नावों के संचालन पर रोक
Varanasi
Updated Wed, 06 Aug 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
वाराणसी। गंगा में तेज बढ़ाव के चलते मंगलवार को निचली सतह के तटीय इलाकों में बाढ़ की चिंता सताने लगी। चार सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ाव के चलते पिछले चौबीस घंटे में जलस्तर में एक मीटर की वृद्धि हुई है। देर शाम शीतला घाट और दशाश्वमेध का फर्श डूबा तो दोनों घाटों पर गंगा आरती सीढ़ियों पर करनी पड़ी। तेज बहाव को देखते हुए चप्पू से खेवा मार कर चलाई जाने वाली नावों के संचालन पर मां गंगा निषादराज सेवा समिति की ओर से रोक लगा दी गई है। अब नौका बिहार सिर्फ मोटर चालित बोट से किया जा सकेगा। शाम पांच बजे राजघाट के पास गंगा का जल स्तर 64. 45 मीटर रिकार्ड किया गया। पहाड़ों पर लगातार बारिश के चलते सहायक नदियों से आ रहे पानी से गंगा में बढ़ाव तेज हो गया है। इससे तटीय शहर के साथ ही निचली सतह की बस्तियों में लोग बाढ़ की आशंका से परेशान हो उठे हैं। अस्सी से राजघाट के बीच दो सौ से अधिक छोटे-बड़े तटीय मंदिर डूब गए हैं या उनमें पानी भर गया है। बुधवार की दोपहर तक राजेंद्र प्रसाद घाट के मंच तक गंगा के लहराने की उम्मीद है। शाम छह बजे दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती जल स्तर बढ़ने से निर्धारित स्थल पर नहीं हो सकी। तमाम श्रद्धालुओं ने मंदिरों की छतों या फिर सीढ़ियों से ही आरती का नजारा लिया।
विज्ञापन