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संस्कृत विवि का माहौल फिर गरमाया
Updated Sun, 17 Dec 2017 02:17 AM IST
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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का माहौल फिर गरमा गया गया। आठ सूत्री मांगों को लेकर छात्रसंघ की निवर्तमान अध्यक्ष प्रिया चौबे के नेतृत्व में शनिवार को छात्रों ने धरना दिया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे रहा। इसकी जानकारी मिलने पर छात्रों का दूसरा गुट धरने के विरोध में उतर आया। यही नहीं, इस गुट के छात्र भी धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि कतिपय छात्र धरना प्रदर्शन कर परिसर का माहौल बिगाड़ रहे हैं।
निवर्तमान अध्यक्ष के नेतृत्व में बैठे छात्रों ने परिसर में महिला और पुरुष शौचालय का निर्माण, केंद्रीय कार्यालय से गंगानाथ झा छात्रावास तक सड़क निर्माण, छात्रावासों का मरम्मत, पंच मंदिर के समीप सामुदायिक भवन बनवाने, विभागों में दरी व पेयजल की व्यवस्था कराने और स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक व दवाओं की व्यवस्था कराने की मांगें उठाईं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के अधिकारी बजट न होने का रोना रोते हैं। धरने में निवर्तमान उपाध्यक्ष रंजीत कुमार तिवारी, विवेक कुमार चौबे, नरेंद्र त्रिपाठी आदि शामिल थे। वहीं, धरने के विरोध में दूसरे गुट के छात्र भी धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि कुल लोग परिसर की व्यवस्था बिगाड़ना चाहते हैं। हमारी मंशा है कि परिसर का कामकाज किसी तरह से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
पिछले दिनों भी मचा था घमासान
संस्कृत विश्वविद्यालय में दीपावली के समय शिक्षकों की नियुक्तियों के मुद्दे पर घमासान मचा था। शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों ने लंबे समय तक आंदोलन किया था, जिसके चलते दीक्षांत समारोह तक स्थगित करना पड़ा था। परिसर में छात्रसंघ चुनाव और दीक्षांत समारोह की तैयारियां चल रही हैं। यदि फिर आंदोलन भड़का तो दोनों आयोजन खटाई में पड़ सकते हैं।
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निवर्तमान अध्यक्ष के नेतृत्व में बैठे छात्रों ने परिसर में महिला और पुरुष शौचालय का निर्माण, केंद्रीय कार्यालय से गंगानाथ झा छात्रावास तक सड़क निर्माण, छात्रावासों का मरम्मत, पंच मंदिर के समीप सामुदायिक भवन बनवाने, विभागों में दरी व पेयजल की व्यवस्था कराने और स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक व दवाओं की व्यवस्था कराने की मांगें उठाईं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के अधिकारी बजट न होने का रोना रोते हैं। धरने में निवर्तमान उपाध्यक्ष रंजीत कुमार तिवारी, विवेक कुमार चौबे, नरेंद्र त्रिपाठी आदि शामिल थे। वहीं, धरने के विरोध में दूसरे गुट के छात्र भी धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि कुल लोग परिसर की व्यवस्था बिगाड़ना चाहते हैं। हमारी मंशा है कि परिसर का कामकाज किसी तरह से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
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पिछले दिनों भी मचा था घमासान
संस्कृत विश्वविद्यालय में दीपावली के समय शिक्षकों की नियुक्तियों के मुद्दे पर घमासान मचा था। शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों ने लंबे समय तक आंदोलन किया था, जिसके चलते दीक्षांत समारोह तक स्थगित करना पड़ा था। परिसर में छात्रसंघ चुनाव और दीक्षांत समारोह की तैयारियां चल रही हैं। यदि फिर आंदोलन भड़का तो दोनों आयोजन खटाई में पड़ सकते हैं।
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