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भीषण गर्मी का असर, मोक्ष द्वार पर लगी कतार
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वाराणसी। भीषण गर्मी का असर शवदाह केन्द्रों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में शाम के बाद शवदाह वाले घाटों पर भीड़ लग रही है। स्थिति यह है कि शवदाह के लिए घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं घाट पर दुर्व्यवस्था के चलते वहां लोगों को बैठने और इंतजार करने में भी परेशानी हो रही है।
काशी में मोक्ष का द्वार कहे जाने वाले मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। मुर्दों की लंबी कतार लग रही है। काशी में शवदाह के लिए पूर्वांचल के सभी जिलों के अलावा बिहार, झारखंड से भी लोग शवदाह के लिए काशी आते हैं। सामान्य दिनों में अगर शवदाह का औसत देखा जाए तो 100 से सवा सौ तक का रहता है। जबकि भीषण गर्मी, भीषण ठंड में यह आंकड़ा डेढ़ सौ तक पहुंच जाता है। दो तीन दिन पहले भी 46 डिग्री तक पहुंचे तापमान से आग बरस रही थी। ऐसे में शवदाह के लिए भी लोग दिन में कम निकलेे, जबकि शाम के बाद अचानक भीड़ पहुंची। इसलिए रविवार की रात्रि और सोमवार को भीड़ काफी अधिक बढ़ गई। ऐसे में वहां एक बार में 25 शवों के जलाने की व्यवस्था कम पड़ गई और लोगों को तीन से चार घंटे इंजजार करना पड़ा। हालांकि मंगलवार को स्थिति दिन में सामान्य हो गई थी। मणिकर्णिका घाट के विभूति नारायण सिंह ने बताया कि रविवार की रात्रि में भीड़ हुई थी, लेकिन अब शवदाह का कार्य पूरी तरह से सामान्य है।
घाट पर दुर्व्यवस्था
मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के चलते वहां गंदगी होती है, लेकिन सफाई व्यवस्था सही न होने के चलते वहां लोगों को बैठना मुश्किल हैं। गंदगी मार्गों पर बहती रहती है। इसलिए वहां पर आने वाले लोग मजबूरी में भी खड़े रहते हैं या फिर घाटों पर जाकर सीढ़ियों पर बैठते हैं। ऐसे में नगर निगम की लापरवाही साफ तौर पर दिख रही है।
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काशी में मोक्ष का द्वार कहे जाने वाले मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। मुर्दों की लंबी कतार लग रही है। काशी में शवदाह के लिए पूर्वांचल के सभी जिलों के अलावा बिहार, झारखंड से भी लोग शवदाह के लिए काशी आते हैं। सामान्य दिनों में अगर शवदाह का औसत देखा जाए तो 100 से सवा सौ तक का रहता है। जबकि भीषण गर्मी, भीषण ठंड में यह आंकड़ा डेढ़ सौ तक पहुंच जाता है। दो तीन दिन पहले भी 46 डिग्री तक पहुंचे तापमान से आग बरस रही थी। ऐसे में शवदाह के लिए भी लोग दिन में कम निकलेे, जबकि शाम के बाद अचानक भीड़ पहुंची। इसलिए रविवार की रात्रि और सोमवार को भीड़ काफी अधिक बढ़ गई। ऐसे में वहां एक बार में 25 शवों के जलाने की व्यवस्था कम पड़ गई और लोगों को तीन से चार घंटे इंजजार करना पड़ा। हालांकि मंगलवार को स्थिति दिन में सामान्य हो गई थी। मणिकर्णिका घाट के विभूति नारायण सिंह ने बताया कि रविवार की रात्रि में भीड़ हुई थी, लेकिन अब शवदाह का कार्य पूरी तरह से सामान्य है।
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घाट पर दुर्व्यवस्था
मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के चलते वहां गंदगी होती है, लेकिन सफाई व्यवस्था सही न होने के चलते वहां लोगों को बैठना मुश्किल हैं। गंदगी मार्गों पर बहती रहती है। इसलिए वहां पर आने वाले लोग मजबूरी में भी खड़े रहते हैं या फिर घाटों पर जाकर सीढ़ियों पर बैठते हैं। ऐसे में नगर निगम की लापरवाही साफ तौर पर दिख रही है।
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