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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   UP: New Year's gift to electricity consumers, power companies to refund ₹102 crore to customers; know the deta

यूपी: बिजली उपभोक्ताओं को नए साल का तोहफा, ग्राहकों को 102 करोड़ लौटाएंगी बिजली कंपनियां ; जानिए मामला

Thu, 01 Jan 2026 09:40 PM IST
लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 01 Jan 2026 09:40 PM IST
सार

Electricity bills in UP: स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में काम करता है। इसलिए उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में कनेक्शन देना विद्युत अधिनियम के खिलाफ है। 

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UP: New Year's gift to electricity consumers, power companies to refund ₹102 crore to customers; know the deta
यूपी बिजली उपभोक्ताओं को राहत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश में नई कास्ट डाटा बुक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय करने के बाद बिजली कंपनियों को अब करीब 102 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को लौटाना होगा। विद्युत नियामक आयोग ने रकम वापसी के लिए अलग से आदेश जारी करने की बात कही है, लेकिन राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द रकम वापस दिलाने के लिए याचिका लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

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प्रदेश में नौ सितंबर 2025 को जारी आदेश में नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत वसूली जा रही है। नई कास्ट डाटा बुक में सिंगल फेस प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कीमत 6016 की जगह 2800 और थ्री फेस की स्मार्ट मीटर की कीमत 11342 की जगह 4100 तय कर दिया है। 10 सितंबर 2025 से एक जनवरी 2026 तक प्रदेश भर में 3,18,740 विद्युत उपभोक्ताओं ने एस्टीमेट जमा किया, जिनमें लगभग 90% उपभोक्ता सिंगल फेस के थे।
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यदि मीटर की कीमत 6016 के आधार पर आकलन किया जाए तो कुल वसूली लगभग 191 करोड़ की होगी। नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 2800 की दर से यह राशि लगभग 89 करोड़ होती है। ऐसे में बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं के बिल में 102 करोड़ से अधिक की राशि वापस करनी होगी। यह रकम जल्द से जल्द उपभोक्ताओं को लौटाई जाए, इसके लिए उपभोक्ता परिषद की ओर से याचिका लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

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उपभोक्ता अपनी मर्जी से ले सकता है प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर चुनने का विकल्प प्राप्त है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा था। अब नियामक आयोग द्वारा जारी नई कास्ट डाटा बुक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि पोस्टपेड कनेक्शन पर सिक्योरिटी राशि लेकर उपभोक्ता को पोस्टपेड कनेक्शन रखना पूर्णतः कानूनी है। 

स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में काम करता है। इसलिए उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में कनेक्शन देना विद्युत अधिनियम के खिलाफ है। नई कास्ट डाटा बुक के जारी होने से नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं, लेकिन उनका मोड (प्रीपेड या पोस्टपेड) उपभोक्ता की सहमति पर ही निर्भर करेगा। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि कार्पोरेशन प्रबंधन अथवा निगमों के प्रबंधन उपभोक्ताओं को जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाते हैं तो इसका विरोध किया जाएगा। नियामक आयोग में याचिका लगाई जाएगी।

ऊर्जा मंत्री और आयोग का जताया आभार

 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा बृहस्पितवार को ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात की। उन्हें नई कास्ट डाटाबुक में उपभोक्ता को राहत देने के लिए आभार जताया। कहा कि यह प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को एक बड़ा तोहफा है।

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