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'यूपी में फार्मेसी स्नातकों की भर्ती करे सरकार'
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 16 Apr 2013 02:03 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 563 फार्मेसी स्नातकों को स्वास्थ्य विभाग में नियुक्त करने का आदेश दिया है। गत वर्ष भी अदालत ने 1271 फार्मेसी स्नातकों की नियुक्ति का आदेश जारी किया था।
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सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को इस मसले पर राज्य सरकार से स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्ति को लेकर की गई मांग पर जवाब तलब भी किया है। विभाग ने सरकार को कई बार फार्मेसी कर्मचारियों की कमी के संबंध में लिखा है और आठ हजार से भी ज्यादा नियुक्तियों की मांग की है।
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जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता मुकेश कुमार गिरी ने कहा कि 1999 में 965 पदों पर नियुक्ति की जा सकती थी जो राज्य सरकार की ओर से नहीं की गई। राज्य सरकार लंबे अरसे भर्ती को टालती रही जबकि स्वास्थ्य विभाग हमेशा फार्मेसी कर्मचारियों की कमी के संबंध में उसे आगाह करता रहा है।
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गिरी ने कहा कि मौजूदा समय में 3534 स्वीकृत पद होने के बावजूद राज्य सरकार भर्तियां नहीं कर रही है। जबकि स्वीकृत पदों को बढ़ाकर आठ हजार से भी ज्यादा किए जाने की मांग स्वास्थ्य विभाग ने कई बार की है। अदालत से गुजारिश है कि चौदह साल से इंतजार कर रहे 563 फार्मेसी स्नातकों को राहत प्रदान करें।
पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए राज्य सरकार को 563 पदों पर नियुक्ति करने और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई बार की गई सिफारिश पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च अदालत ने 3 अगस्त, 2010 को दिए गए आदेश के बाद की गई नियुक्तियों पर उठाए गए सवाल पर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से जनवरी, 2011 में स्पष्टीकरण मांगा था।
गौरतलब है कि सन् 2011 में शीर्षस्थ अदालत ने राज्य के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) सहित अन्य अधिकारियों को इस मसले पर अवमानना नोटिस जारी किया था। दोनों याचिकाएं कई सौ फार्मेसी स्नातकों की ओर से दायर की गई है। अन्य अधिकारी, जिनसे जवाब तलब किया गया, उनमें राज्य के स्वास्थ्य विभाग के पूर्व मुख्य सचिव प्रदीप कुमार शुक्ला, महानिदेशक एसपी राम, प्रशासनिक निदेशक अल्का श्रीवास्तव व पैरामेडिकल डायरेक्टर रामजी लाल थे।