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यूपी में बिजली का होगा निजीकरण, बढ़ेंगी दरें
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jan 2013 10:10 AM IST
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प्रदेश में कुछ शहरों की बिजली व्यवस्था के निजीकरण के साथ-साथ देर-सवेरे बिजली दरों में इजाफा होना लगभग तय हो गया है। राज्य सरकार ने बुधवार को केंद्र द्वारा राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियों के लिए तैयार की गई वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) को सिद्धांतत: मंजूरी दे दी है। बिजली का निजीकरण और दरों में बढ़ोतरी एफआरपी की प्रमुख शर्तों में शामिल हैं। तत्काल न सही लेकिन देर सवेरे इस पर अमल होना तय है।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लंबी चर्चा के बाद एफआरपी के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। भारी घाटे से जूझ रही बिजली कंपनियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2012 तक बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के कर्ज तथा खरीदी गई बिजली के बकाये का दायित्व खत्म करने के लिए वित्तीय पुनर्गठन योजना तैयार की है।
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31 मार्च 2012 तक प्रदेश की बिजली कंपनियों पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का 17,737 करोड़ रुपये बकाया था जबकि बिजली खरीद की 14,558 करोड़ रुपये की देनदारी है। कुल संचित हानियां 29,931 करोड़ रुपये की हैं इसलिए इतनी ही धनराशि के वित्तीय पुनर्गठन की योजना तैयार की गई है। इस धनराशि का 50 फीसदी यानी 14,995 करोड़ रुपये का दायित्व राज्य सरकार को लेना होगा और अगले पांच वर्षों में इसके लिए बांड जारी करने होंगे। कैबिनेट ने बुधवार को इसका अनुमोदन कर दिया।
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साल भर में कार्ययोजना
एफआरपी के तहत राज्य सरकार को बिजली वितरण व्यवस्था फ्रेंचाइजी या निजी क्षेत्र को सौंपने के लिए एक साल में कार्य योजना तैयार करके केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को भेजनी होगी। यही नहीं हर साल अप्रैल में अनिवार्य रूप से बिजली की दरें बढ़ानी होंगी और तीन साल में बिजली आपूर्ति लागत और राजस्व वसूली के बीच के अंतर को खत्म करना होगा। लाइन हानियों में भी कमी लाने की शर्त रखी गई है।
केंद्रीय मदद के बावजूद मेहनत की जरूरत
सरकार ने एफआरपी के प्रस्ताव को भले ही हरी झंडी दे दी हो लेकिन मुख्यमंत्री का कहना था कि केंद्रीय मदद के बावजूद बिजली की स्थिति सुधारने के लिए काफी मेहनत करनी होगी। आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ बिजली चोरी रोकनी होगी। उनका जोर लाइन लॉस कम करने और वितरण प्रणाली को सुधारने पर भी था। सीएम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विद्युत निगम के अफसरों का काम ठीक नहीं है। इसलिए अभी बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही है।
समिति करेगी प्रस्ताव का पुनरीक्षण
प्रस्ताव के पुनरीक्षण के लिए प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। इसमें ऊर्जा सचिव, पावर कॉरपोरेशन के एमडी तथा पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वित्त शामिल किए गए हैं। समिति आरएफपी पर भारत सरकार को अपने सुझाव भेजेगी। योजना की मॉनीटरिंग के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। योजना को लागू करने के लिए एफआरपी बनाते समय स्पष्ट कार्ययोजना एवं सुधार के संबंध में वचनबद्धता का समावेश किया जाएगा।