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UP Election Result 2022: सीएम योगी की सीट पर 13 तो अखिलेश की सीट पर महज तीन उम्मीदवार, जानें इसके सियासी मायने
Thu, 10 Mar 2022 06:07 AM IST
हिमांशु मिश्रा
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 10 Mar 2022 06:07 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे दोपहर बाद काफी हद तक साफ हो जाएंगे। कौन जीता और कौन हारा ये सब मालूम चल जाएगा। इस बार प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर कुल 4442 प्रत्याशी मैदान में थे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंद घंटों में ये मालूम चल जाएगा कि अगले पांच साल उत्तर प्रदेश की सत्ता किसके हाथ में होगी। यही नहीं, 403 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे 4442 प्रत्याशियों के भाग्य का भी फैसला हो जाएगा। इस बीच, एक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की सीट से जुड़ा एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है।
दरअसल, इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर सीट से चुनावी मैदान में हैं। वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी के सिराथू और सपा प्रमुख अखिलेश मैनपुरी के करहल सीट से प्रत्याशी हैं। सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव मौर्य के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि अखिलेश यादव के खिलाफ महज दो प्रत्याशी मैदान में थे। अब इसे संयोग कहें या सियासी चाल ये आप पर निर्भर करता है, लेकिन हकीकत यही है।
ऐसा किसलिए होता है?
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह बताते हैं कि कई बार बड़े प्रत्याशियों के वोटों को बांटने के लिए ऐसा किया जाता है। इसके तहत मजबूत प्रत्याशी के खिलाफ उसकी जाति समेत उसके समर्थन वाली अन्य जातियों और धर्म के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशी उतार दिए जाते हैं। इससे वोट बंटने के उम्मीद ज्यादा रहते हैं। जिसका फायदा विपक्ष के उम्मीदवार को मिल जाता है।
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दरअसल, इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर सीट से चुनावी मैदान में हैं। वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी के सिराथू और सपा प्रमुख अखिलेश मैनपुरी के करहल सीट से प्रत्याशी हैं। सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव मौर्य के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि अखिलेश यादव के खिलाफ महज दो प्रत्याशी मैदान में थे। अब इसे संयोग कहें या सियासी चाल ये आप पर निर्भर करता है, लेकिन हकीकत यही है।
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ऐसा किसलिए होता है?
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह बताते हैं कि कई बार बड़े प्रत्याशियों के वोटों को बांटने के लिए ऐसा किया जाता है। इसके तहत मजबूत प्रत्याशी के खिलाफ उसकी जाति समेत उसके समर्थन वाली अन्य जातियों और धर्म के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशी उतार दिए जाते हैं। इससे वोट बंटने के उम्मीद ज्यादा रहते हैं। जिसका फायदा विपक्ष के उम्मीदवार को मिल जाता है।
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जानिए किसके खिलाफ कितने उम्मीदवार थे?
योगी आदित्यनाथ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट गोरखपुर शहर से कुल 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। इसमें समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस समेत अन्य सभी दलों के उम्मीदवार शामिल हैं। कई प्रत्याशी निर्दलीय भी मैदान में थे। भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने भी योगी के खिलाफ ताल ठोकी थी। निर्दलीय प्रत्याशी भी अलग-अलग जाति से आते थे। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय सिंह का कहना है कि हो सकता है जानबूझकर अलग-अलग जातियों के प्रत्याशी खड़े किए गए हों, ताकि जातिगत वोट बंट जाए।
केशव प्रसाद मौर्य : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कौशांबी के सिराथू सीट से चुनाव लड़ा। केशव मौर्य के खिलाफ तो गोरखपुर सीट से भी ज्यादा प्रत्याशी थे। यहां से कुल 18 लोगों ने उम्मीदवारी ठोकी थी। इनमें से ज्यादातर प्रत्याशी ओबीसी और ब्राह्मण वर्ग के थे।
अखिलेश यादव : जहां, योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य के विरोध में बड़ी संख्या में प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ सिर्फ दो प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। वह भी एक भाजपा के प्रो. एसपीएस बघेल थे और दूसरे बहुजन समाज पार्टी के कुलदीप नारायण थे। कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था।
केशव प्रसाद मौर्य : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कौशांबी के सिराथू सीट से चुनाव लड़ा। केशव मौर्य के खिलाफ तो गोरखपुर सीट से भी ज्यादा प्रत्याशी थे। यहां से कुल 18 लोगों ने उम्मीदवारी ठोकी थी। इनमें से ज्यादातर प्रत्याशी ओबीसी और ब्राह्मण वर्ग के थे।
अखिलेश यादव : जहां, योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य के विरोध में बड़ी संख्या में प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे, वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ सिर्फ दो प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। वह भी एक भाजपा के प्रो. एसपीएस बघेल थे और दूसरे बहुजन समाज पार्टी के कुलदीप नारायण थे। कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था।