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UP Election 2022 : इटावा में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर योगी सरकार से खुश दिखीं महिलाएं, पढ़िए रोजगार और स्वच्छता पर क्या बोलीं?
Tue, 23 Nov 2021 01:51 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 23 Nov 2021 01:51 PM IST
सार
चाय पर चर्चा के बाद 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' इटावा की महिलाओं के बीच पहुंचा। यहां महिलाओं ने खुलकर चुनावी मुद्दों पर चर्चा की।
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इटावा में चुनावी चर्चा करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, संस्थापक मुलायम सिंह यादव का गढ़ माना जाने वाले इटावा में महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर खुलकर योगी सरकार की तारीफ की। कहा कि पहले के मुकाबले महिलाओं के प्रति होने वाली घटनाओं में काफी कमी आई है। आज महिलाएं आत्मनिर्भर हैं और अपने फैसले खुद से ले सकती हैं। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। हालांकि रोजगार की कमी का भी महिलाओं ने मुद्दा उठाया। कहा कि इटावा में इंडस्ट्री लगनी चाहिए, ताकि यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार मिल सके। पढ़िए किसने क्या कहा?
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महिला सुरक्षा पर क्या बोलीं महिलाएं?
इटावा, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
पूनम ने कहा कि पहले बेटियां स्कूल, कॉलेज या रोजगार के लिए निकलतते समय डरती थीं। हमेशा भय का माहौल हुआ करता था। अब हर कोई सुरक्षित महसूस करता है। महिलाएं स्वयं सहायता समूह के जरिए स्वालंबी बन रहीं हैं।
शिक्षिका डॉ. ज्योति वर्मा ने महिलाएं तभी पूरी तरह से सुरक्षित होंगी जब समाज की सोच बदलेगी। बेटों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की जरूरत है। अगर हम समाज में नैतिकता नहीं ला सकते हैं तो हम सरकार को दोष भी नहीं दे सकते हैं। डॉ. वर्मा ने आगे किहा कि पहले के मुकाबले महिलाएं काफी सुरक्षित महसूस करती हैं। खुद का उदाहरण दिया। बोलीं, पहले मैं मूल्यांकन करने झांसी जाती थी, लेकिन वहां से वापसी में मुझे डर लगता था। मैं ट्रेन से नहीं आती थी, क्योंकि रात में लूट-पाट होती थी। आज मैं स्वतंत्र होकर रात में 10-12 बजे आ सकती हूं।
संगीता अग्रवाल ने कहा कि पहले के मुकाबले महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर हुई है। हर सरकार में कमियां जरूर होती हैं। कभी भी कमियों को पूरा करना संभव नहीं है। महिलाएं कभी भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो सकती हैं। हालांकि, पहले के मुकाबले काफी सुधार आया है। अब अपराधिक घटनाएं काफी कम हो गए हैं।
क्षमा दीक्षित ने कहा कि चुनाव के वक्त हर नेता जनता से वादे करता है। ये लोकलुभावन वादे होते हैं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अभी काफी काम करने की जरूरत है। हर स्कूल के सामने महिला पुलिस की ड्यूटी होनी चाहिए। बाजार के अंदर जो घटनाएं घटती हैं वो नहीं होनी चाहिए।
पूनम अग्रवाल ने कहा कि अभी एक बच्ची पर तेजाब फेंका गया था। इसी तरह की एक और घटना हुई थी। महिलाओं और बच्चियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। पुलिस वाले ध्यान नहीं देते हैं।
कनक श्यामलता ने कहा कि पहले आपराधिक मामले बहुत ज्यादा होती थी। अब काफी सुधार हुआ है। सड़कें भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई हैं। आकांक्षा गुप्ता ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है, हालांकि इसमें अभी काफी सुधार की गुंजाइश है।
प्रमिला पालिवाल ने कहा कि हर समस्या का 100 प्रतिशत समाधान नहीं हो सकता है। कुछ न कुछ कमियां हर घर में होती हैं। मौजूदा सरकार ने बहुत कुछ किया है। आज सरकार ने सारी योजनाएं महिलाओं को ध्यान में रखते हुए बनाई है। जब तक मातृ शक्ति शक्तिशाली नहीं होगा, तब तक समाज शक्तिशाली नहीं होगा।
शिक्षिका डॉ. ज्योति वर्मा ने महिलाएं तभी पूरी तरह से सुरक्षित होंगी जब समाज की सोच बदलेगी। बेटों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की जरूरत है। अगर हम समाज में नैतिकता नहीं ला सकते हैं तो हम सरकार को दोष भी नहीं दे सकते हैं। डॉ. वर्मा ने आगे किहा कि पहले के मुकाबले महिलाएं काफी सुरक्षित महसूस करती हैं। खुद का उदाहरण दिया। बोलीं, पहले मैं मूल्यांकन करने झांसी जाती थी, लेकिन वहां से वापसी में मुझे डर लगता था। मैं ट्रेन से नहीं आती थी, क्योंकि रात में लूट-पाट होती थी। आज मैं स्वतंत्र होकर रात में 10-12 बजे आ सकती हूं।
संगीता अग्रवाल ने कहा कि पहले के मुकाबले महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर हुई है। हर सरकार में कमियां जरूर होती हैं। कभी भी कमियों को पूरा करना संभव नहीं है। महिलाएं कभी भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो सकती हैं। हालांकि, पहले के मुकाबले काफी सुधार आया है। अब अपराधिक घटनाएं काफी कम हो गए हैं।
क्षमा दीक्षित ने कहा कि चुनाव के वक्त हर नेता जनता से वादे करता है। ये लोकलुभावन वादे होते हैं। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अभी काफी काम करने की जरूरत है। हर स्कूल के सामने महिला पुलिस की ड्यूटी होनी चाहिए। बाजार के अंदर जो घटनाएं घटती हैं वो नहीं होनी चाहिए।
पूनम अग्रवाल ने कहा कि अभी एक बच्ची पर तेजाब फेंका गया था। इसी तरह की एक और घटना हुई थी। महिलाओं और बच्चियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। पुलिस वाले ध्यान नहीं देते हैं।
कनक श्यामलता ने कहा कि पहले आपराधिक मामले बहुत ज्यादा होती थी। अब काफी सुधार हुआ है। सड़कें भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई हैं। आकांक्षा गुप्ता ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है, हालांकि इसमें अभी काफी सुधार की गुंजाइश है।
प्रमिला पालिवाल ने कहा कि हर समस्या का 100 प्रतिशत समाधान नहीं हो सकता है। कुछ न कुछ कमियां हर घर में होती हैं। मौजूदा सरकार ने बहुत कुछ किया है। आज सरकार ने सारी योजनाएं महिलाओं को ध्यान में रखते हुए बनाई है। जब तक मातृ शक्ति शक्तिशाली नहीं होगा, तब तक समाज शक्तिशाली नहीं होगा।
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महिलाओं के आत्मनिर्भर होने पर रखे विचार
इटावा, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
वीनत सिंह सेंगर ने कहा महिला सुरक्षा को लेकर जो मानसिकता है लोगों की उसे बदलने की जरूरत है। मानसिक गुलामी जो हमारे चारों तरफ फैली है उसे तोड़ने की जरूरत है। सरकार बहुत कुछ कर रही है, लेकिन फिर भी हम बाहर निकलकर कुछ नहीं बोलते हैं। अभी भी पितृ सत्ता की मानसिकता बनी हुई है। समाज में बदलाव की जरूरत है।
एक स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा कि स्त्री स्वयं से सक्षम होनी चाहिए कि वह हर चीज का मुकाबला कर सके। चार साल पहले जब मैं यहां से आगरा आई तो मुझे बहुत खराब लगा। लेकिन अब काफी हालात में सुधार है।
एक स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा कि स्त्री स्वयं से सक्षम होनी चाहिए कि वह हर चीज का मुकाबला कर सके। चार साल पहले जब मैं यहां से आगरा आई तो मुझे बहुत खराब लगा। लेकिन अब काफी हालात में सुधार है।
और क्या मुद्दे उठे?
इटावा, उत्तर प्रदेश चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
- आशा कार्यकर्ता शकुंतला ने वेतन और अवकाश का मुद्दा उठाया। कहा कि हमसे काम तो खूब लिए जा रहे हैं, लेकिन उतना वेतन नहीं मिल रहा है। पूरे कोरोनाकाल में हमें छुट्टी नहीं मिली। बीमार होने के बावजूद हमसे काम करवाया जाता रहा है। हमें न तो कुछ पैसा मिला और न ही कोई सुविधा मिलती है।
- बिरला शाक्य ने कहा कि आशा बहुओं का वेतन बढ़ा है।
- दीप्ति सिंघल ने कहा कि नाली और सड़कें बनाई जाती हैं लेकिन क्वालिटी खराब होती है।
- एक अन्य महिला ने कहा कि पहले के मुकाबले साफ-सफाई की व्यवस्था काफी बेहतर हुई है। लेकिन आम लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। कूड़ा उठाने वाला आता है लेकिन लोग अपने घर के बाहर ही कूड़ा फेंक देते हैं। लोग खुद जागरूक होंगे तभी सफाई व्यवस्था बेहतर होगी। कोई भी सरकार पूरा कूड़ा साफ नहीं कर सकती है।
- जागृति ने कहा कि आज महिलाएं स्वतंत्र होकर बाहर निकल सकती हैं। इतनी सुरक्षा कभी नहीं थी, जितनी आज है।
- भारतीय किसान संघ की सुशीला रजावत ने कहा कि सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। भाजपा सरकार में महिलाएं सुरक्षित हैं।
- चित्रा परिहार ने कहा कि कानूनन हमें अधिकार मिल रहे हैं, लेकिन घरों से नहीं निकल रहे हैं। सबको जागरूक करने की जरूरत है। एक भी महिला 100 लोगों को जागरूक कर दे तो महिलाओं के खिलाफ जो हिंसा होती हैं वो खत्म हो जाएगी।
- बीडीओ से रिटायर्ड सुप्रिया ने कहा कि आज महिलाएं सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। आज महिलाओं के लिए कई तरह की योजनाएं चलती हैं। आज महिलाएं आत्मनिर्भर हैं और स्वावलंबी हैं। महिलाएं अपना निर्णय खुद लेती हैं।
- एक महिला ने कहा कि इटावा में इंडस्ट्री लगनी चाहिए ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। जो भी सरकार आए वो इंडस्ट्री लगाएं।
- सुनीता कुशवाहा ने कहा कि प्रशासनिक अफसर काफी सपोर्ट करते हैं।
- पूजा ने कहा नारी सुरक्षा, नारी स्वावलंबन, नारी शक्ति का नारा दिया गया है। नारी को अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी।
- नीरा पोरवाल ने कहा कि सरकार ने बहुत काम किया है।