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केवल चेहरा महिलाओं का हैं, सब काम करते हैं पति
चंदौसी (संभल)/ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jun 2013 01:18 AM IST
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बकौल विधायक लक्ष्मी गौतम उनकी कनपटी पर रिवाल्वर रखकर सिफारिशी पत्रों पर दस्तखत कराया जाता था। दिलीप वार्ष्णेय खुद विधायक के रूप में लोगों के सामने पेश होते थे।
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आपस में मनमुटाव था तो विवाद सड़क पर आ गया। हकीकत सामने आई तो टीका टिप्पणी शुरू हो गई।
पूरे प्रकरण से एक बाद साफतौर पर जाहिर हो चुकी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर महिला जनप्रतिनिधि रबर स्टांप की तरह रहती हैं।
विधायक लक्ष्मी गौतम और विधायकी पति दिलीप वार्ष्णेय के हाथ, इस बात से कौन अंजान था। लेकिन कोई बोलने को तैयार नहीं था।
कभी लोगों ने इस पर सवाल भी नहीं खड़े किए। यह हाल केवल विधायक का नहीं है बल्कि कई महिला प्रतिनिधियों का है जो जनता से वोट लेकर जीत तो गईं, लेकिन उनके हाथ में बागडोर नहीं है।
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वह कठपुतली से ज्यादा कुछ भी नहीं है। एक रबर स्टांप की तरह जहां चाहें जिस चिट्ठी पर जब चाहें मोहर लगवा ली जाती है। हकीकत तो यह है कि उनसे केवल हस्ताक्षर का ही काम कराया जाता है।
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तमाम महिला जनप्रतिनिधि ऐसी हैं जो कोई पत्र प्रपत्र नहीं पढ़तीं। उनके सभी काम वे करते हैं जो परदे के पीछे रहकर डोर अपने हाथ में रखे हुए हैं।
जिले में भी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की अध्यक्ष पदों पर आसीन कुछ महिला जनप्रतिनिधियों की हालत भी ऐसी है।
इससे आगे बढ़िए तो ब्लाक प्रमुख, सभासद और ग्राम प्रधान के स्तर तक भी यही हालत है। अधिकतर स्थानों पर पति या परिवार वाले सारा कामकाज देख रहे हैं।
कहीं कहीं कोई और सगे संबंधी भी कामकाज अपने हाथ में लिए हुए हैं।