नेपाल के इस बॉर्डर पर फंसे हैं 86 भारतीय, काम बंद होने पर ईंट-भट्ठा मालिकों ने निकाला, भुखमरी से जूझ रहे लोग
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नेपाल में ईंट भट्ठों पर काम करने वाले 86 मजदूर दोहरी मुसीबत का शिकार हैं। काम बंद होने के कारण मालिकों ने उन्हें निकाल दिया और सीमा सील होने के कारण न तो वह भारत लौट पा रहे हैं और न ही नेपाल उन्हें प्रवेश दे रहा है। मजदूर अलीगढ़वा-चाकरचौड़ा बॉर्डर पर नोमैंस लैंड फंसे हैं। इनमें शामिल महिला और बच्चे भुखमरी का शिकार हो रहे हैं।
बॉर्डर पर नो मैंस लैंड में फंसे मजदूर विमलेश ने बताया कि वह नेपाल के कपिलवस्तु जिले के मैनिहवा स्थित ईंट-भट्टे पर काम करता था। उसके साथ भारत के लियाकत, वाजिद हुसैन आदि कई मजदूर भी हैं। लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया। बिना काम के भट्ठा मालिक ने भी पैसा नहीं दिया।
जमापूंजी खत्म हुई तो भुखमरी की नौबत आ गई। इस पर सभी मजदूरों ने परिवार के साथ भारत लौटने का निर्णय लिया। बताया कि 86 पुरुष, महिला, बच्चे बृहस्पतिवार देर शाम अलीगढ़वा बॉर्डर पर पहुंचे। नाके पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें भारत में प्रवेश नहीं करने दिया। लौटे तो नेेपाल के सुरक्षा बल ने प्रवेश नहीं करने दिया।
अब ये मजदूर मासूम बच्चों और महिलाओं के साथ नो मैंसलैंड पर आंधी बारिश में खुले आसमान रहने को मजबूर हैं। इनमें से अधिकतर मजदूर पीलीभीत जिले के बीसलपुर के रहने वाले हैं। कानूनी पेंच की वजह से 24 घंटे बीतने के बाद भी उन्हें भारत में प्रवेश नहीं मिल सका है।
एसडीएम सदर उमेशचंद्र निगम ने बताया कि इन मजदूरों को उनके घर पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में बीएसएफ के अधिकारियों से बातचीत हो रही है, जल्द ही सबको उनके घर पहुंचा दिया जाएगा।