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फेसबुक, व्हाट्स-एप पर टिकीं खुफिया निगाहें
Siddharth Nagar
Updated Tue, 08 Mar 2016 12:34 AM IST
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- फोटो : getty images
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सिद्धार्थनगर में कुशीनगर में आईएसआईएस के स्लीपिंग मॉड्यूल मिलने के बाद नेपाल सीमा से सटे जिलों में फेसबुक और व्हाट्स-एप यूजर्स पर खुफिया निगाह रखी जा रही है। इस बाबत गृह मंत्रालय ने इन जिलों में अलर्ट जारी किया है।
गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों को अमल में लाते हुए एक मार्च को पुलिस मुख्यालय ने नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर जिलों के पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है। इसमें कहा है कि खुफिया विभाग से रिपोर्ट प्राप्त हुई है कि आतंकी संगठन आईएसआईएस ने द्वारा नेपाल की खुली सीमा का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी युवाओं को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
ऐसा ही एक स्लीपिंग माड्यूल कुशीनगर में मामला पकड़ में आ चुका है। इसे देखते हुए एनआईबी, आईबी, एटीएस आदि एजेंसियों को सक्रिय किया गया है। जांच में एजेंसियों को संबंधित जिलों की साइबर सेल के साथ क्राइम ब्रांच व सर्विलांस टीम सहयोग करेंगी।
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इस दौरान फेसबुक व व्हाट्स-एप पर भ्रामक सूचना भेजने वाले उपभोक्ताओं पर विशेष निगाह रखने को कहा गया है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान के बाद उनकी फ्रेंडलिस्ट खंगाली जाएगा। संपर्क व उसका पूरा डिटेल भी स्थानीय पुलिस के सहयोग से जुटाया जाएगा। इस संबंध में जिलों के साइबर सेल को विशेष रूप से निर्देशित किया जाएगा।
एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया है। संदिग्ध और फेक आईडी पर भ्रामक सूचना प्रसारित करने वालों की पहचान के लिए सबूतों को मेरठ के साइबर लैब में भेजा जाएगा।
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गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों को अमल में लाते हुए एक मार्च को पुलिस मुख्यालय ने नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर जिलों के पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है। इसमें कहा है कि खुफिया विभाग से रिपोर्ट प्राप्त हुई है कि आतंकी संगठन आईएसआईएस ने द्वारा नेपाल की खुली सीमा का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी युवाओं को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
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ऐसा ही एक स्लीपिंग माड्यूल कुशीनगर में मामला पकड़ में आ चुका है। इसे देखते हुए एनआईबी, आईबी, एटीएस आदि एजेंसियों को सक्रिय किया गया है। जांच में एजेंसियों को संबंधित जिलों की साइबर सेल के साथ क्राइम ब्रांच व सर्विलांस टीम सहयोग करेंगी।
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इस दौरान फेसबुक व व्हाट्स-एप पर भ्रामक सूचना भेजने वाले उपभोक्ताओं पर विशेष निगाह रखने को कहा गया है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान के बाद उनकी फ्रेंडलिस्ट खंगाली जाएगा। संपर्क व उसका पूरा डिटेल भी स्थानीय पुलिस के सहयोग से जुटाया जाएगा। इस संबंध में जिलों के साइबर सेल को विशेष रूप से निर्देशित किया जाएगा।
एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया है। संदिग्ध और फेक आईडी पर भ्रामक सूचना प्रसारित करने वालों की पहचान के लिए सबूतों को मेरठ के साइबर लैब में भेजा जाएगा।