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Sambhal News: 420 किलोमीटर तक बस दौड़ी, न किसी ने देखा न रोका
Thu, 29 Oct 2026 01:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:59 AM IST
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संभल। 60 सीट वाली बस में 100 यात्रियों को ठूंसकर पंजाब से संभल तक दौड़ाया गया। बस चालकों ने प्रत्येक यात्री से 1500 से 2000 रुपये तक का किराया वसूला। पंजाब के पटियाला से लेकर संभल तक करीब 420 किलोमीटर दूरी है। इस दूरी के दौरान पुलिस के नाके और थाने पार कर दौड़ती आ रही इस बस को किसी ने नहीं देखा।
जब हादसा हो गया तो पुलिस-प्रशासन ने दो बसों के माध्यम से इन यात्रियों को रवाना किया। एआरटीओ ने बताया कि 75 यात्री बस में सवार थे, जबकि यात्रियों ने बताया कि 100 से ज्यादा लोगों को सवार किया गया था। हालात ये थे कि सामान रखने की जगह तो दूर की बात रही, बैठने की जगह भी बस में नहीं बची थी। काफी यात्री बस के फ्लोर पर बैठकर सफर कर रहे थे।
घायल हुए युवक नीरज ने बताया कि रुपयों के लालच में बस में क्षमता से अधिक सवारियां भरी गईं। सीट भर जाने के बाद भी बस नहीं रुकी। जहां भी थोड़ी जगह मिली, वहीं यात्रियों को बैठाया गया। बस के अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे और बच्चे लगातार रो रहे थे।
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रात में करीब 11 बजे रवाना हुई, सुबह संभल में हो गया हादसा
पंजाब के पटियाला से मंगलवार की रात करीब 11 बजे बस रवाना हुई थी। संभल में सुबह पांच बजे हादसा हो गया। इस लंबी दूरी में कई चेक पोस्ट, पुलिसकर्मी और टोल प्लाजा पड़ते हैं। इसके बावजूद इस ओवरलोड बस को किसी ने नहीं रोका। यदि यही बस गंगा एक्सप्रेसवे पर किसी बड़े हादसे का शिकार हो जाती, तो कई परिवार मातम में डूब जाते। गनीमत की बात है कि कुछ ही लोगों को खुली चोट लगी है।
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जिम्मेदारों की अनदेखी और हादसे बन रहे खामियाजा
आए दिन गंगा एक्सप्रेसवे पर हो रहे हादसों के बावजूद परिवहन विभाग आंखें मूंदे बैठा है। ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। सड़कों पर मौत की सवारियां बेखौफ होकर दौड़ रही हैं। यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। विभाग की इस अनदेखी से अवैध संचालन को बढ़ावा मिलता है और हादसे खामियाजा बन रहे हैं। एक वर्ष के अंदर 20 से ज्यादा बड़े हादसे गंगा एक्सप्रेस-वे पर हो चुके हैं। इसमें ज्यादातर हादसे ओवरलोड के चलते हुए हैं।
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त्योहारी सीजन आते ही डग्गामार वाहनों का बोलबाला, जिम्मेदार करते हैं अनदेखा
दिवाली नजदीक है। दूसरे प्रदेशों में रहकर काम करने वाले लोग अपने गांव और शहरों को पहले से लौटने लगे हैं। इसका फायदा डग्गामार वाहन मालिकों ने उठाना शुरू कर दिया है। एक तरफ यह लोग किराया ज्यादा वसूल करते हैं और दूसरी ओर यात्रियों को क्षमता से ज्यादा लेकर चलते हैं। पूरे त्योहारी सीजन में यह डग्गामार वाहन परिवहन निगम की रोडवेज पर भारी रहते हैं। सरकार को राजस्व की हानि होती है और प्रशासनिक मशीनरी ही इन डग्गामार वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगाती और नियमों का पालन नहीं हो पाता।
यात्रियों की पीड़ा
हम दो बच्चों के साथ बिहार जाने के लिए बस में बैठे थे। पहले तो किराया ज्यादा लिया गया। मजबूरी में देना पड़ा। अब हादसा हो गया। हमारा मोबाइल और रुपयों का पर्स गायब है। हमें मिल नहीं रहा। हमें पुलिस ने जिला अस्पताल भेज दिया।
शिवदेवी, यात्री
चालक नशे में लग रहा था। उसे झपकी आई तो बस अनियंत्रित होकर पलट गई। मेरे पैर में चोट लगी है। सभी यात्री घायल हुए हैं। किसी को ज्यादा चोट लगी है तो किसी का कम लगी है लेकिन चोट लगी है।
मिथलेश, यात्री
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चालक जिस केबिन में रहता है वह बंद था। सभी लोग अंदर बंद थे। यात्रियों की संख्या 100 से ज्यादा थी। निकलना भी मुश्किल हो रहा था। चालक नशे में था या नींद आई। इसका किसी को अंदाजा नहीं है। बस पहले तेज से हिली और फिर पलट गई।
नीरज, यात्री
पटियाला में यात्रियों की संख्या सही थी लेकिन रास्ते से यात्री बैठाए गए। जहां दो यात्री बैठाने चाहिए वहां चार से पांच यात्री बैठाए गए। 100 से ज्यादा संख्या हो गई थी यात्रियों की। विरोध किया तो सुना नहीं। उतारने की धमकी दी गई। इसलिए ज्यादा विरोध नहीं कर सके। गंगा एक्सप्रेसवे पर दो बार बस ने जंप किया और फिर पलट गई
मुकेश, यात्री
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जब हादसा हो गया तो पुलिस-प्रशासन ने दो बसों के माध्यम से इन यात्रियों को रवाना किया। एआरटीओ ने बताया कि 75 यात्री बस में सवार थे, जबकि यात्रियों ने बताया कि 100 से ज्यादा लोगों को सवार किया गया था। हालात ये थे कि सामान रखने की जगह तो दूर की बात रही, बैठने की जगह भी बस में नहीं बची थी। काफी यात्री बस के फ्लोर पर बैठकर सफर कर रहे थे।
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घायल हुए युवक नीरज ने बताया कि रुपयों के लालच में बस में क्षमता से अधिक सवारियां भरी गईं। सीट भर जाने के बाद भी बस नहीं रुकी। जहां भी थोड़ी जगह मिली, वहीं यात्रियों को बैठाया गया। बस के अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे और बच्चे लगातार रो रहे थे।
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रात में करीब 11 बजे रवाना हुई, सुबह संभल में हो गया हादसा
पंजाब के पटियाला से मंगलवार की रात करीब 11 बजे बस रवाना हुई थी। संभल में सुबह पांच बजे हादसा हो गया। इस लंबी दूरी में कई चेक पोस्ट, पुलिसकर्मी और टोल प्लाजा पड़ते हैं। इसके बावजूद इस ओवरलोड बस को किसी ने नहीं रोका। यदि यही बस गंगा एक्सप्रेसवे पर किसी बड़े हादसे का शिकार हो जाती, तो कई परिवार मातम में डूब जाते। गनीमत की बात है कि कुछ ही लोगों को खुली चोट लगी है।
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जिम्मेदारों की अनदेखी और हादसे बन रहे खामियाजा
आए दिन गंगा एक्सप्रेसवे पर हो रहे हादसों के बावजूद परिवहन विभाग आंखें मूंदे बैठा है। ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। सड़कों पर मौत की सवारियां बेखौफ होकर दौड़ रही हैं। यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। विभाग की इस अनदेखी से अवैध संचालन को बढ़ावा मिलता है और हादसे खामियाजा बन रहे हैं। एक वर्ष के अंदर 20 से ज्यादा बड़े हादसे गंगा एक्सप्रेस-वे पर हो चुके हैं। इसमें ज्यादातर हादसे ओवरलोड के चलते हुए हैं।
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त्योहारी सीजन आते ही डग्गामार वाहनों का बोलबाला, जिम्मेदार करते हैं अनदेखा
दिवाली नजदीक है। दूसरे प्रदेशों में रहकर काम करने वाले लोग अपने गांव और शहरों को पहले से लौटने लगे हैं। इसका फायदा डग्गामार वाहन मालिकों ने उठाना शुरू कर दिया है। एक तरफ यह लोग किराया ज्यादा वसूल करते हैं और दूसरी ओर यात्रियों को क्षमता से ज्यादा लेकर चलते हैं। पूरे त्योहारी सीजन में यह डग्गामार वाहन परिवहन निगम की रोडवेज पर भारी रहते हैं। सरकार को राजस्व की हानि होती है और प्रशासनिक मशीनरी ही इन डग्गामार वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगाती और नियमों का पालन नहीं हो पाता।
यात्रियों की पीड़ा
हम दो बच्चों के साथ बिहार जाने के लिए बस में बैठे थे। पहले तो किराया ज्यादा लिया गया। मजबूरी में देना पड़ा। अब हादसा हो गया। हमारा मोबाइल और रुपयों का पर्स गायब है। हमें मिल नहीं रहा। हमें पुलिस ने जिला अस्पताल भेज दिया।
शिवदेवी, यात्री
चालक नशे में लग रहा था। उसे झपकी आई तो बस अनियंत्रित होकर पलट गई। मेरे पैर में चोट लगी है। सभी यात्री घायल हुए हैं। किसी को ज्यादा चोट लगी है तो किसी का कम लगी है लेकिन चोट लगी है।
मिथलेश, यात्री
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चालक जिस केबिन में रहता है वह बंद था। सभी लोग अंदर बंद थे। यात्रियों की संख्या 100 से ज्यादा थी। निकलना भी मुश्किल हो रहा था। चालक नशे में था या नींद आई। इसका किसी को अंदाजा नहीं है। बस पहले तेज से हिली और फिर पलट गई।
नीरज, यात्री
पटियाला में यात्रियों की संख्या सही थी लेकिन रास्ते से यात्री बैठाए गए। जहां दो यात्री बैठाने चाहिए वहां चार से पांच यात्री बैठाए गए। 100 से ज्यादा संख्या हो गई थी यात्रियों की। विरोध किया तो सुना नहीं। उतारने की धमकी दी गई। इसलिए ज्यादा विरोध नहीं कर सके। गंगा एक्सप्रेसवे पर दो बार बस ने जंप किया और फिर पलट गई
मुकेश, यात्री