{"_id":"69bdb16b23b8190e810eca02","slug":"summer-also-changed-into-winter-along-with-the-weather-sambhal-news-c-204-1-chn1011-127812-2026-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: मौसम के साथ गर्मी भी बदल गई सर्दी में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: मौसम के साथ गर्मी भी बदल गई सर्दी में
विज्ञापन
चंदौसी। होली के बाद तेज गर्मी पड़ने पर लोग जहां एसी व कूलर का सहारा लेने लगे थे, वहीं अचानक मौसम बदलने से ठंडक बढ़ गई। बृहस्पतिवार को भोर से ही बरसात शुरू हो जाने और तेज हवा चलने के कारण लोगों को न सिर्फ गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा बल्कि कुछ स्थानों पर लोगों को अलाव जलाकर हाथ सेंकते हुए देखा गया। परिषदीय परीक्षा देने के लिए छात्र-छात्राओं को बरसात में छाता लगाकर घर से निकलना पड़ा।
बुधवार को ही मौसम बिगड़ने लगा था। दिन भर बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी भी हुई। बृहस्पतिवार की सुबह लगभग चार बजे से ही बरसात शुरू हो गई। इसके बाद कई घंटे तक रुक-रुक कर बरसात होती रही। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक बूंदाबांदी होती रही। तेज हवा चलने से गर्मी के मौसम में अचानक से ठिठुरन बढ़ गई। जो गर्म कपड़े उठा कर रख दिए गए थे वह दोबारा निकल आए और लोगों को अलाव का भी सहारा लेना पड़ा। इसके साथ ही शनिवार को ईद होने के कारण बाजार में जहां भीड़ रहनी चाहिए थी, वहां भीड़ नजर नहीं आई। लगभग चार बजे मौसम कुछ साफ हुआ तो लोग बाजार में खरीदारी के लिए निकले। जिन लोगों को जरूरी काम से या दफ्तर जाना था वह छाता लेकर घरों से निकले पढ़ने वाले बच्चे भी बरसात से बचने के लिए छाता लेकर ही परीक्षा देने के लिए स्कूलों में पहुंचे।
विज्ञापन
बुधवार को ही मौसम बिगड़ने लगा था। दिन भर बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी भी हुई। बृहस्पतिवार की सुबह लगभग चार बजे से ही बरसात शुरू हो गई। इसके बाद कई घंटे तक रुक-रुक कर बरसात होती रही। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक बूंदाबांदी होती रही। तेज हवा चलने से गर्मी के मौसम में अचानक से ठिठुरन बढ़ गई। जो गर्म कपड़े उठा कर रख दिए गए थे वह दोबारा निकल आए और लोगों को अलाव का भी सहारा लेना पड़ा। इसके साथ ही शनिवार को ईद होने के कारण बाजार में जहां भीड़ रहनी चाहिए थी, वहां भीड़ नजर नहीं आई। लगभग चार बजे मौसम कुछ साफ हुआ तो लोग बाजार में खरीदारी के लिए निकले। जिन लोगों को जरूरी काम से या दफ्तर जाना था वह छाता लेकर घरों से निकले पढ़ने वाले बच्चे भी बरसात से बचने के लिए छाता लेकर ही परीक्षा देने के लिए स्कूलों में पहुंचे।
विज्ञापन