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Sambhal News: छात्र-छात्राओं को ई-कचरे के प्रति किया जागरूक
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चंदौसी। जिले के परिषदीय और माध्यमिक स्कूलों में बुधवार को ई-कचरे के सही निस्तारण को लेकर एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को ई-कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के प्रति जागरूक करना था।
उन्हें खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कूड़े से अलग रखने और सही तरीके से नष्ट कराने की जानकारी दी गई। अभियान के तहत विद्यार्थियों को ई-कचरे को खुले में फेंकने या जलाने से होने वाले खतरों के बारे में समझाया गया। शिक्षकों ने बताया कि इससे हवा, मिट्टी और पानी प्रदूषित होते हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को खराब मोबाइल, चार्जर और बैटरी जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कूड़े में न डालने की सलाह दी गई। उन्हें इन वस्तुओं को अलग रखने और सही तरीके से नष्ट कराने के महत्व पर जोर दिया गया। अभियान में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं और अन्य शैक्षिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। यह अभियान 31 अक्तूबर तक जारी रहेगा।
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डीआईओएस सीपी सिंह ने बताया कि छात्र-छात्राओं को ई-कचरे से होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई है। शिक्षकों ने उन्हें घरों में बेकार पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान को अलग रखने के तरीके सिखाए।
ई-कचरे से पर्यावरण को खतरा
ई-कचरा, जिसमें पुराने मोबाइल, चार्जर और बैटरियां शामिल हैं, पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। इसे खुले में फेंकने या जलाने से जहरीले रसायन हवा, मिट्टी और पानी में मिल जाते हैं। यह प्रदूषण न केवल प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इसलिए, ऐसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
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उन्हें खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कूड़े से अलग रखने और सही तरीके से नष्ट कराने की जानकारी दी गई। अभियान के तहत विद्यार्थियों को ई-कचरे को खुले में फेंकने या जलाने से होने वाले खतरों के बारे में समझाया गया। शिक्षकों ने बताया कि इससे हवा, मिट्टी और पानी प्रदूषित होते हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
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स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को खराब मोबाइल, चार्जर और बैटरी जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कूड़े में न डालने की सलाह दी गई। उन्हें इन वस्तुओं को अलग रखने और सही तरीके से नष्ट कराने के महत्व पर जोर दिया गया। अभियान में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं और अन्य शैक्षिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। यह अभियान 31 अक्तूबर तक जारी रहेगा।
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डीआईओएस सीपी सिंह ने बताया कि छात्र-छात्राओं को ई-कचरे से होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई है। शिक्षकों ने उन्हें घरों में बेकार पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान को अलग रखने के तरीके सिखाए।
ई-कचरे से पर्यावरण को खतरा
ई-कचरा, जिसमें पुराने मोबाइल, चार्जर और बैटरियां शामिल हैं, पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। इसे खुले में फेंकने या जलाने से जहरीले रसायन हवा, मिट्टी और पानी में मिल जाते हैं। यह प्रदूषण न केवल प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इसलिए, ऐसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।