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प्रबंध समिति के अनुमोदन के बिना पास नहीं होगा गन्ना समिति का बजट
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Fri, 30 Dec 2016 01:41 AM IST
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गन्ने की फसल फुंकी
- फोटो : अमर उजाला
यदि कोई उप गन्नायुक्त ऐसा करता है तो उस बजट को वैधानिक नहीं माना जाएगा। साथ ही गन्ना किसानों को गुणवत्तापरक कृषि निवेशों को भी सहकारी गन्ना समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराने को कहा गया है। यह आदेश प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त विपिन कुमार द्विवेदी ने सभी गन्ना उपायुक्तों व जिला गन्नाधिकारियों को जारी किए हैं।
अक्सर ऐसा होता था कि सहकारी गन्ना विकास समितियों का वार्षिक बजट उप गन्नायुक्त द्वारा बिना गन्ना समितियों की प्रबंध कमेटी के अनुमोदन के ही सीधे पास कर दिया जाता था, जिससे इसमें अफसरशाही हावी हो जाती थी, समिति पदाधिकारियों की अहमियत व गरिमा को भी ठेस पहुंचती थी।
इसकी शिकायत गन्ना समितियों के अध्यक्षों द्वारा गन्नायुक्त से की गई थी। समिति अधिनियम के अंतर्गत जनप्रतिनिधियों की सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए अब बिना प्रबंध कमेटी के अनुमोदन के बजट को स्वीकृत करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो प्राधिकृत प्राधिकारी गन्ना समिति के बजट की स्वीकृति बिना प्रबंध कमेटी के अनुमोदन के प्रदान करेगा तो उसकी वैधानिकता नहीं होगी। प्रबंध कमेटियों से भी कहा गया है कि वह निर्धारित समयावधि में समिति के वार्षिक बजट का अनुमोदन कराएं।
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इसके साथ साथ गन्ना किसानों को गुणवत्तापरक कृषि निवेश, गन्ना समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश भी सभी उप गन्ना आयुक्तों एवं जिला गन्ना अधिकारियों को दिए गए हैं। इसके तहत गन्ना समितियों के गोदामों पर कीटनाशक, कृषि रक्षा यंत्रों, बायोफर्टिलाईजर, माइक्रोन्यूट्रियेंट की खरीद भी बिना प्रबंध कमेटी के प्रस्ताव के नहीं होंगी, यदि कोई अधिकारी समिति प्रस्ताव के बिना उपरोक्त कृषि निवेेशों की आपूर्ति कराता है तो संबंधित अधिकारी दंडित किया जाएगा।
गन्ना समितियों के कर्मचारियों की क्षेत्रीय स्तर पर समस्याओं को हल करने के लिए गठित क्षेत्रीय गन्ना सेवा प्राधिकरण एवं जिला गन्ना सेवा प्राधिकरण में लाटरी पद्धति से गन्ना समिति की प्रबंध कमेटी के जनप्रतिनिधियों को शासन की जनसहभागिता एवं पारदर्शिता नीति के तहत नामित कर शामिल किया जाएगा।
वार्षिक बजट में गन्ना समिति के लिए प्रबंध कमेटी के अनुमोदन को अनिवार्य बनाए जाने का निर्णय गन्नायुक्त का सराहनीय कदम है, इससे जनप्रतिनिधियों को सम्मान तो मिलेगा, अफसरों की लालफीताशाही भी रुकेगी। - -सुबोध कुमार शर्मा, अध्यक्ष सहकारी गन्ना विकास समिति चंदौसी।
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अक्सर ऐसा होता था कि सहकारी गन्ना विकास समितियों का वार्षिक बजट उप गन्नायुक्त द्वारा बिना गन्ना समितियों की प्रबंध कमेटी के अनुमोदन के ही सीधे पास कर दिया जाता था, जिससे इसमें अफसरशाही हावी हो जाती थी, समिति पदाधिकारियों की अहमियत व गरिमा को भी ठेस पहुंचती थी।
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इसकी शिकायत गन्ना समितियों के अध्यक्षों द्वारा गन्नायुक्त से की गई थी। समिति अधिनियम के अंतर्गत जनप्रतिनिधियों की सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए अब बिना प्रबंध कमेटी के अनुमोदन के बजट को स्वीकृत करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो प्राधिकृत प्राधिकारी गन्ना समिति के बजट की स्वीकृति बिना प्रबंध कमेटी के अनुमोदन के प्रदान करेगा तो उसकी वैधानिकता नहीं होगी। प्रबंध कमेटियों से भी कहा गया है कि वह निर्धारित समयावधि में समिति के वार्षिक बजट का अनुमोदन कराएं।
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इसके साथ साथ गन्ना किसानों को गुणवत्तापरक कृषि निवेश, गन्ना समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश भी सभी उप गन्ना आयुक्तों एवं जिला गन्ना अधिकारियों को दिए गए हैं। इसके तहत गन्ना समितियों के गोदामों पर कीटनाशक, कृषि रक्षा यंत्रों, बायोफर्टिलाईजर, माइक्रोन्यूट्रियेंट की खरीद भी बिना प्रबंध कमेटी के प्रस्ताव के नहीं होंगी, यदि कोई अधिकारी समिति प्रस्ताव के बिना उपरोक्त कृषि निवेेशों की आपूर्ति कराता है तो संबंधित अधिकारी दंडित किया जाएगा।
गन्ना समितियों के कर्मचारियों की क्षेत्रीय स्तर पर समस्याओं को हल करने के लिए गठित क्षेत्रीय गन्ना सेवा प्राधिकरण एवं जिला गन्ना सेवा प्राधिकरण में लाटरी पद्धति से गन्ना समिति की प्रबंध कमेटी के जनप्रतिनिधियों को शासन की जनसहभागिता एवं पारदर्शिता नीति के तहत नामित कर शामिल किया जाएगा।
वार्षिक बजट में गन्ना समिति के लिए प्रबंध कमेटी के अनुमोदन को अनिवार्य बनाए जाने का निर्णय गन्नायुक्त का सराहनीय कदम है, इससे जनप्रतिनिधियों को सम्मान तो मिलेगा, अफसरों की लालफीताशाही भी रुकेगी। - -सुबोध कुमार शर्मा, अध्यक्ष सहकारी गन्ना विकास समिति चंदौसी।