फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   Modern farming startup becomes inspiration for youth

Sambhal News: आधुनिक खेती का स्टार्टअप बना युवाओं के लिए प्रेरणा

Tue, 16 Jan 2024 03:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Tue, 16 Jan 2024 03:29 AM IST
विज्ञापन
Modern farming startup becomes inspiration for youth
संभल। विदेशी नौकरी छोड़कर विदेशी खेती को देश में शुरू कर नए स्टार्टअप की शुरूआत की। अब यह तकनीकी खेती अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है। बहजोई के प्रखर वार्ष्णेय और चंदन वार्ष्णेय इस समय करीब छह एकड़ खेती हाइड्रोपोनिक तकनीक से कर रहे हैं। इस खेती में जहां 90 प्रतिशत पानी की बचत की जाती है, वहीं मिट्टी में होने वाली खेती से दस गुना ज्यादा उत्पाद मिल रहा है। इसका लाभ देखते हुए 50 एकड़ भूमि में और खेती करने की तैयारी है। इसके अलावा देश के अलग अलग राज्यों और प्रदेश के जिलों में 80 एकड़ खेती हो रही है। इन युवाओं के स्टार्टअप से काफी युवा प्रेरित हैं। इसमें चंदन वार्ष्णेय अमेरिका से नौकरी छोड़कर लौटे हैं। जबकि प्रखर वार्ष्णेय व्यवसायिक परिवार से हैं। इन दोनों युवाओं ने वर्ष 2021 में शुरूआत की थी। प्रखर वार्ष्णेय ने बताया कि शुरूआत एक बीघा खेती से की थी। उस समय लैट्स की फसल की थी। लैट्स पत्तेदार होती है जो नामचीन कंपनियां बर्गर आदि में इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा सलाद में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मुनाफा दिखा तो खेती को बहजोई में बढ़ाया। अब दूसरे जिले और राज्यों में खेती हो रही है।
विज्ञापन

क्या है हाइड्रोपोनिक तकनीकी
खेती की इस आधुनिक तकनीकी में मिट्टी के बिना जलवायु को नियंत्रित करके खेती की जाती है। हाइड्रोपोनिक खेती में केवल पानी में या पानी के साथ बालू एवं कंकड़ में पौधे उगाए जाते हैं। हाइड्रोपोनिक तकनीक में फास्फोरस, नाइट्रोजन, मैग्निशियम, कैल्शियम, पोटाश, जिंक, सल्फर, आयरन आदि कई पोषक तत्व एवं खनिज पदार्थों को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को निर्धारित किए गए समय के अंतराल पर पानी में मिलाया जाता है। जिससे पौधों को पोषक तत्व मिलते हैं। हाइड्रोपोनिक खेती में पाइप का प्रयोग करके पौधों को उगाया जाता है। पाइप में कई छेद बने रहते हैं, जिसमें पौधे लगाए जाते हैं। पौधों की जड़ें पाइप के अंदर पोषक तत्वों से भरे जल में डूबी रहती हैं।
विज्ञापन




हाइड्रोपोनिक तकनीक से इन फसलाें को उगाया जा सकता है
बहजोई में लैट्स, टमाटर, बिना बीज का खीरा, काला गेंहू, पालक, धनिया समेत कई फसलें की जा रही हैं। इसके अलावा इस तकनीकी के माध्यम से गाजर, शलजम, ककड़ी, मूली, आलू, शिमला मिर्च, मटर, मिर्च, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, तरबूज, खरबूजा, अनानास, अजवाइन, तुलसी, पालक, धनिया, शिमला मिर्च, ब्रोकोली, पुदीना आदि की भी फसलें की जा सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



हाइड्रोपोनिक खेती के फायदे

हाइड्रोपोनिक तकनीक से की जाने वाली खेती में 90 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा सकती है। जबकि मिट्टी से होने वाली खेती में पानी काफी खर्च होता है। इस विधि से खेती करने पर कम जगह में अधिक पौधे उगाए जा सकते हैं। पोषक तत्व बर्बाद नहीं होते। इस्तेमाल किए जाने वाले पोषक तत्व पौधों को आसानी से मिल जाते हैं। इस तकनीक में मौसम, जानवरों या किसी अन्य प्रकार के बाहरी, जैविक एवं अजैविक कारणों से पौधे प्रभावित नहीं होते।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed