चंदौसी। श्री सनातन धर्म पंजाबी सभा मंदिर में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन कथा व्यास व्योम त्रिपाठी ने तीर हरण की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब पितामह से पूछा गया कि भरी सभा में महिला को निर्वस्त्र करने का प्रयास क्या न्याय विरुद्ध नहीं है, तो भीष्म पितामह ने कहा कि मैंने दुष्ट दुर्योधन का दूषित भोजन ग्रहण किया था। उसी अन्न के प्रभाव से मेरी मति में विकृति उत्पन्न हो गई। मैं धर्म व अधर्म का भेद जान नहीं पाया। मैंने अपनी जीवन में कोई पाप नहीं किया, केवल एक पाप मुझसे हुआ। मैंने मूर्छित सांप को कांटो भरी झाड़ियों में डाल दिया, उसी दोष के कारण मुझे बाणों की शैया मिली है। जब तक दुष्ट दुर्योधन के खाए अन्य का मेरे शरीर में रक्त रहेगा, तब तक मैं अपने प्राणों का त्याग नहीं करूंगा। अंत में भीष्म पितामह ने गोविंद के चरणों में ध्यान लगाते हुए अपने प्राणों का त्याग कर दिया। अंत में आरती के उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर निर्मल अगरवाल, सरोज शील, प्रियंका आहूजा, मंजू अग्रवाल, एकता वार्ष्णेय, माला खुराना, आरती चौहान, सुमन सपड़ा, मीना अरोरा, बबली कालड़ा, सतीश अरोरा, अशोक शर्मा, चरनजीत लाल, सुरेंद्र मदान आदि मौजूद रहे।