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Sambhal News: एमडीए में शामिल हुए तो स्टांप शुल्क बढ़ा पर सुविधाएं नहीं
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असमोली क्षेत्र के गांव पैंतिया माफी में टूटी सड़क और पसरी गंदगी। संवाद
- फोटो : Samvad
संभल। जिले के तीन गांव भले ही मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) का हिस्सा बन गए हैं लेकिन इन्हें अभी मूलभूत सुविधाओं की ही दरकार है। गांव पैंतिया माफी, इटायला माफी और मालपुर उर्फ मलूपुरा में न तो जमीनों के दाम बढ़े हैं। दो प्रतिशत स्टांप शुल्क भी बढ़ गया है। पहले पांच प्रतिशत स्टांप शुल्क लगता था लेकिन अब सात प्रतिशत स्टांप शुल्क हो गया है। यानी राजस्व सरकार के खाते में तो बढ़कर जा रहा है पर ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।ग्रामीणों का कहना है कि एमडीए में शामिल होने से महंगाई बढ़ी है। अब बैनामा कराने से लेकर जमीन खरीदना भी महंगा हो गया है। आगे कहा कि गांवों की स्थित बेहद खराब है। इन गांवों में साफ-सफाई नहीं होने के कारण गंदगी का माहौल बना है। गांवों के रास्ते उखड़े पड़े हैं तो आवागमन में परेशानी हो रही है।
असमोली ब्लॉक के इन तीनों गांवों की जाहिरी तौर पर तस्वीर बदलनी है लेकिन अभी विकास कार्य शुरू नहीं हुए हैं और स्टांप शुल्क बढ़ने से ग्रामीणों में खलबली है। राजस्व के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि एमडीए में जो गांव शामिल हुए हैं वहां के बैनामे स्टांप शुल्क लगने से पहले ज्यादा आ रहे थे लेकिन अब कम हो गए हैं। अब 5-6 बैनामे ही आते हैं।
वहीं, दूसरी ओर एमडीए में शामिल गांवों की हालत बेहद खराब है। गांव पैतिया माफी में रास्ते टूटा हुआ है तो नाली नहीं बनी है। गंदगी का माहौल है। गांव इटायला माफी में कच्चे रास्ते पर जलभराव और कीचड़ पसरी है। गांव मालपुर उर्फ मलूपुरा में जगह-जगह घूर पड़े हैं तो ककईया ईंटों के बनी सड़क के दोनों तरफ नाली नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के एमडीए में शामिल होने पर फिलहाल महंगाई बढ़ी है। तस्वीर नहीं बदलती दिख रही है।
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यह हैं गांवों में जमीनों की प्रचलित दरें
संभल। गांव इटायला माफी में सामान्य कृषि भूमि की दरें 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, आबादी के निकट भूमि की दरें 65 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, लिंक मार्ग की भूमि की दरें 60 लाख रुपये प्रति हेक्टयेर हैं। छह मीटर से नौ मीटर चौड़े रास्ते पर अकृषक भूमि की दरें 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, नौ मीटर से अधिक चौड़े रास्ते पर भूमि की दरें 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसी तरह गांव पैंतिया माफी में सामान्य कृषि भूमि की दर 49 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, आबादी के पास की भूमि की दरें 80 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, लिंक मार्ग की भूमि की दरें 73 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर हैं। छह मीटर से नौ मीटर चौड़े रास्ते पर अकृषक भूमि की दरें 4200 रुपये प्रति वर्ग मीटर, नौ मीटर से अधिक चौड़े रास्ते पर भूमि की दरें 7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। वहीं गांव मालपुर उर्फ मलूपुरा में सामान्य कृषि भूमि की दर 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, आबादी के पास भूमि की दर 65 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, लिंक मार्ग की भूमि की दर 60 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। छह मीटर से नौ मीटर चौड़े रास्ते पर अकृषक भूमि की दर 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, नौ मीटर से अधिक चौड़े रास्ते पर भूमि की दर 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है।
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-गांव में एमडीए का बोर्ड भी नहीं लगा है। जमीनों की दरों में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है। गांव में टंकी का निर्माण नहीं हुआ है। रास्ते उखड़े पड़े हैं, गंदगी का माहौल है। एमडीए में आने के बाद भी साफ सफाई नहीं है। -लटूर सिंह, पैंतिया माफी
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-जमीनों की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। गांव में तीसरे, चौथे दिन सफाई कर्मचारी आता है और सफाई करता है। 2500 की आबादी है। गंदगी के कारण लोगों को निकलने में परेशानी होती है। रास्ते उखड़े पड़े हैं। -रूपकिशोर सिंह, पैंतिया माफी
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-गांव के एमडीए में शामिल होने पर जमीनों के दाम में गिरावट आई है। विकास नहीं हो रहा है। अस्पताल का भवन 15 साल पहले बन गया था लेकिन उसमें आज तक कोई डॉक्टर नहीं बैठा। सफाई नहीं हो रही है। -खालिद, इटायला माफी
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-गांव के एमडीए में शामिल होने को लेकर कोई बोर्ड नहीं लगा है। जमीनों के रेट कम हो गए हैं। गंदगी पसरी हुई है। करीब दो महीने से साफ सफाई नहीं हो रही है। एमडीए के हिसाब से कोई काम नहीं हुआ है। -रमेश कुमार, मालपुर उर्फ मलूपुरा
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एमडीए में जो गांव शामिल हुए हैं वहां दो प्रतिशत स्टाम्प शुल्क की बढ़ोतरी हुई है। वहां अब कितने बैनामे हो रहे हैं, इसकी सही जानकारी सब रजिस्ट्रार कार्यालय से ही मिल पाएगी।
अशोक कुमार, सहायक महानिरीक्षक निबंधन, संभल
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असमोली ब्लॉक के इन तीनों गांवों की जाहिरी तौर पर तस्वीर बदलनी है लेकिन अभी विकास कार्य शुरू नहीं हुए हैं और स्टांप शुल्क बढ़ने से ग्रामीणों में खलबली है। राजस्व के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि एमडीए में जो गांव शामिल हुए हैं वहां के बैनामे स्टांप शुल्क लगने से पहले ज्यादा आ रहे थे लेकिन अब कम हो गए हैं। अब 5-6 बैनामे ही आते हैं।
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वहीं, दूसरी ओर एमडीए में शामिल गांवों की हालत बेहद खराब है। गांव पैतिया माफी में रास्ते टूटा हुआ है तो नाली नहीं बनी है। गंदगी का माहौल है। गांव इटायला माफी में कच्चे रास्ते पर जलभराव और कीचड़ पसरी है। गांव मालपुर उर्फ मलूपुरा में जगह-जगह घूर पड़े हैं तो ककईया ईंटों के बनी सड़क के दोनों तरफ नाली नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के एमडीए में शामिल होने पर फिलहाल महंगाई बढ़ी है। तस्वीर नहीं बदलती दिख रही है।
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यह हैं गांवों में जमीनों की प्रचलित दरें
संभल। गांव इटायला माफी में सामान्य कृषि भूमि की दरें 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, आबादी के निकट भूमि की दरें 65 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, लिंक मार्ग की भूमि की दरें 60 लाख रुपये प्रति हेक्टयेर हैं। छह मीटर से नौ मीटर चौड़े रास्ते पर अकृषक भूमि की दरें 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, नौ मीटर से अधिक चौड़े रास्ते पर भूमि की दरें 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसी तरह गांव पैंतिया माफी में सामान्य कृषि भूमि की दर 49 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, आबादी के पास की भूमि की दरें 80 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, लिंक मार्ग की भूमि की दरें 73 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर हैं। छह मीटर से नौ मीटर चौड़े रास्ते पर अकृषक भूमि की दरें 4200 रुपये प्रति वर्ग मीटर, नौ मीटर से अधिक चौड़े रास्ते पर भूमि की दरें 7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। वहीं गांव मालपुर उर्फ मलूपुरा में सामान्य कृषि भूमि की दर 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, आबादी के पास भूमि की दर 65 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, लिंक मार्ग की भूमि की दर 60 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। छह मीटर से नौ मीटर चौड़े रास्ते पर अकृषक भूमि की दर 4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, नौ मीटर से अधिक चौड़े रास्ते पर भूमि की दर 6500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है।
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-गांव में एमडीए का बोर्ड भी नहीं लगा है। जमीनों की दरों में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है। गांव में टंकी का निर्माण नहीं हुआ है। रास्ते उखड़े पड़े हैं, गंदगी का माहौल है। एमडीए में आने के बाद भी साफ सफाई नहीं है। -लटूर सिंह, पैंतिया माफी
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-जमीनों की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। गांव में तीसरे, चौथे दिन सफाई कर्मचारी आता है और सफाई करता है। 2500 की आबादी है। गंदगी के कारण लोगों को निकलने में परेशानी होती है। रास्ते उखड़े पड़े हैं। -रूपकिशोर सिंह, पैंतिया माफी
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-गांव के एमडीए में शामिल होने पर जमीनों के दाम में गिरावट आई है। विकास नहीं हो रहा है। अस्पताल का भवन 15 साल पहले बन गया था लेकिन उसमें आज तक कोई डॉक्टर नहीं बैठा। सफाई नहीं हो रही है। -खालिद, इटायला माफी
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-गांव के एमडीए में शामिल होने को लेकर कोई बोर्ड नहीं लगा है। जमीनों के रेट कम हो गए हैं। गंदगी पसरी हुई है। करीब दो महीने से साफ सफाई नहीं हो रही है। एमडीए के हिसाब से कोई काम नहीं हुआ है। -रमेश कुमार, मालपुर उर्फ मलूपुरा
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एमडीए में जो गांव शामिल हुए हैं वहां दो प्रतिशत स्टाम्प शुल्क की बढ़ोतरी हुई है। वहां अब कितने बैनामे हो रहे हैं, इसकी सही जानकारी सब रजिस्ट्रार कार्यालय से ही मिल पाएगी।
अशोक कुमार, सहायक महानिरीक्षक निबंधन, संभल