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यहां प्यार की गवाही देती है तोता-मैना की कब्र
Tue, 14 Feb 2023 01:00 PM IST
ranjeett ranjeett
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
Published by: ranjeett ranjeett
Updated Tue, 14 Feb 2023 01:00 PM IST
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संभल
- फोटो : अमर उजाला
संभल। प्यार का जिक्र हो और तोता-मैना की चर्चा न आए, आमतौर पर ऐसा मुमकिन नहीं होता। पुराने दौर की किताबें हों या फिल्मी गीतों के बोल, तोता-मैना की कहानी का जिक्र आ ही जाता है। किताबों और तरानों में सुनाई देने वाली यह कहानी संभल पहुंचकर महसूस की जा सकती है। संभल से तीन किलोमीटर दूर कमलपुर सराय गांव के जंगल में एक पुरानी कब्र है, जो तोता-मैना की कब्र के रूप में मशहूर है।
लाल पत्थर और अलग तरह की आकृति की यह कब्र प्राचीन दौर के शासक पृथ्वीराज चौहान के कालखंड की कही जाती है। मान्यता है कि पृथ्वीराज चौहान शिकार के लिए इस इलाके में आते थे तो एक पेड़ पर अक्सर उन्हें तोता-मैना का जोड़ा नजर आता था।
उनके लगाव से प्रभावित होकर वह सिर्फ उन्हें देखने के इरादे से भी जंगल के उस हिस्से में जाने लगे। कुछ वर्ष बाद उन्हें तोता-मैना के मर जाने की खबर मिली, जिसके बाद उन्होंने परिंदों के प्रेम को अमर बनाने के लिए कब्र बनवाई। यही तोता-मैना की कब्र के रूप में पहचानी जाती है।
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एएमयू में पश्चिमी एशियाई और उत्तरी अफ्रीकी अध्ययन विभाग के शोधार्थी संभल निवासी मोहम्मद वसीम का कहना है कि कहीं-कहीं जिक्र मिलता है कि यह कब्र तोता-मैना की है और इसको राजा पृथ्वीराज चौहान ने बनवाया था। हालांकि इसका कोई ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं है।
संभल में रहने वाले साहित्यकार डाॅ. डीएन शर्मा बताते हैं कि प्राचीन दौर से पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह बात आगे बढ़ी है कि यह कब्र तोता-मैना की है।
ऐसा लिखित इतिहास नहीं है लेकिन इस स्थान का किसी और रूप में कोई दावा भी कभी सामने नहीं आया। संवाद
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लाल पत्थर और अलग तरह की आकृति की यह कब्र प्राचीन दौर के शासक पृथ्वीराज चौहान के कालखंड की कही जाती है। मान्यता है कि पृथ्वीराज चौहान शिकार के लिए इस इलाके में आते थे तो एक पेड़ पर अक्सर उन्हें तोता-मैना का जोड़ा नजर आता था।
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उनके लगाव से प्रभावित होकर वह सिर्फ उन्हें देखने के इरादे से भी जंगल के उस हिस्से में जाने लगे। कुछ वर्ष बाद उन्हें तोता-मैना के मर जाने की खबर मिली, जिसके बाद उन्होंने परिंदों के प्रेम को अमर बनाने के लिए कब्र बनवाई। यही तोता-मैना की कब्र के रूप में पहचानी जाती है।
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एएमयू में पश्चिमी एशियाई और उत्तरी अफ्रीकी अध्ययन विभाग के शोधार्थी संभल निवासी मोहम्मद वसीम का कहना है कि कहीं-कहीं जिक्र मिलता है कि यह कब्र तोता-मैना की है और इसको राजा पृथ्वीराज चौहान ने बनवाया था। हालांकि इसका कोई ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं है।
संभल में रहने वाले साहित्यकार डाॅ. डीएन शर्मा बताते हैं कि प्राचीन दौर से पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह बात आगे बढ़ी है कि यह कब्र तोता-मैना की है।
ऐसा लिखित इतिहास नहीं है लेकिन इस स्थान का किसी और रूप में कोई दावा भी कभी सामने नहीं आया। संवाद