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लॉकडाउन में स्वच्छ हुई गंगा
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संभल के सिसौना डांडा घाट से गंगा का नजारा।
- फोटो : SAMBHAL
संभल। गुन्नौर तहसील से होकर गुुजर रही गंगा स्वच्छ हो गई है। जहां पहले काफी कचरा दिखाई देता था वह अब खत्म हो गया है। साफ नीर की धारा बह रही है। अब से पहले कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने गंगा को स्वच्छ करने के लिए अभियान चलाया, लेकिन गंगा साफ नहीं हुई। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने लॉकडाउन लागू करा दिया। इससे जहां एक ओर आर्थिक नुकसान सरकार और जनता को हुआ है।
वहीं पर्यावरण में काफी सुधार आया है। एअर क्वालिटी इंडेक्स में काफी सुधार है। अब गंगा में भी स्वच्छ नजारा दिखाई दे रहा है। बुधवार को सिसौना डांडा स्थित गंगा के तट का नजारा शानदार दिखाई दिया। न कचरा और न जलधारा मटमेली दिखाई दी। हरेभरे पेड़ों के साथ नजार अद्धभूत नजर आया। जल में किसी तरह के अपशिष्ट पदार्थ भी नजर नहीं आ रहे। गंगा नदी पतित पावनी मोक्षदायिनी है।
बीते समय में गंगा नदी को आम लोगों और औद्योगिक इकाईयों ने काफी दूषित किया है। लॉकडाउन के बाद से प्रदूषण का स्तर काफी कम हुआ है। यह एक प्रेरणा लेने का समय है जब आगे भी मां गंगा को स्वच्छ रखना का रास्ता मिला है। गंगा के किनारे दूर दूर तक देखने पर पेड़ पौधे भी बता रहे हैं कि प्रदूषण का स्तर गिरा है। जो लोग इस तट से होकर गुजर रहे हैं। वह स्वच्छ गंगा का नजारा देखकर आश्चर्य चकित हैं।
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वहीं पर्यावरण में काफी सुधार आया है। एअर क्वालिटी इंडेक्स में काफी सुधार है। अब गंगा में भी स्वच्छ नजारा दिखाई दे रहा है। बुधवार को सिसौना डांडा स्थित गंगा के तट का नजारा शानदार दिखाई दिया। न कचरा और न जलधारा मटमेली दिखाई दी। हरेभरे पेड़ों के साथ नजार अद्धभूत नजर आया। जल में किसी तरह के अपशिष्ट पदार्थ भी नजर नहीं आ रहे। गंगा नदी पतित पावनी मोक्षदायिनी है।
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बीते समय में गंगा नदी को आम लोगों और औद्योगिक इकाईयों ने काफी दूषित किया है। लॉकडाउन के बाद से प्रदूषण का स्तर काफी कम हुआ है। यह एक प्रेरणा लेने का समय है जब आगे भी मां गंगा को स्वच्छ रखना का रास्ता मिला है। गंगा के किनारे दूर दूर तक देखने पर पेड़ पौधे भी बता रहे हैं कि प्रदूषण का स्तर गिरा है। जो लोग इस तट से होकर गुजर रहे हैं। वह स्वच्छ गंगा का नजारा देखकर आश्चर्य चकित हैं।
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