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जिले में लैब होने के बाद भी मेरठ भेजे जा रहे है सैंपल
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संभल। जिला अस्पताल में जो आरटीपीसीआर की लैब संचालित है। उसमें अभी दो सौ नमूनों की जांच हो पा रही है। जबकि जिलेभर से करीब 2000 नमूने हर दिन लिए जा रहे हैं। लैब पूरी क्षमता से काम करे तो जांच रिपोर्ट जल्दी मिल सकती है और संक्रमितों की जल्दी जानकारी सामने आ सके। इससे संक्रमण फैलने से रुकेगा। अभी तो लोग नमूना देने के बाद लोगों से मिलते रहते हैं। संक्रमित होने की जानकारी पर होम आइसोलेट हो रहे हैं या कोविड अस्पताल जा रहे हैं। इससे उन लोगों के लिए खतरा बढ़ रहा है जो संक्रमित के संपर्क में हैं।
आरटीपीसीआर लैब तो जिले में स्थापित हुई लेकिन कार्य क्षमता मामूली है। नमूने 2000 लिए जा रहे हैं और लैब में मुश्किल से 200 नमूनों की जांच हो रही है। बाकी नमूने मेरठ की लैब भेजने पड़ते हैं। जिसकी रिपोर्ट दो से तीन दिन में मिल रही है। जब रिपोर्ट का परिणाम आने में देरी होती है तो संक्रमित व्यक्ति बाहर सभी के संपर्क में रहता है। जब संक्रमित होने की पुष्टि होती है तो उन लोगों में हड़कंप मच जाता है जो संक्रमित के संपर्क में रहे। यदि नमूने की जांच एक ही दिन में होगी तो संक्रमित व्यक्ति ज्यादा लोगों से नहीं मिल पाएगा और संक्रमण का प्रसार होने से थमेगा।
शुक्रवार को जो 65 संक्रमित मरीज सामने आए हैं। इनमें से ज्यादातर की जांच के लिए नमूने पांच जनवरी को लिए गए थे। सात जनवरी को संक्रमित होने की पुष्टि हुई। तीन दिन तक यह संक्रमित लोग जहां भी गए होंगे कोरोना संक्रमण का खतरा बन गया होगा। यदि नमूना लिए जाने की रात तक ही इनकी रिपोर्ट आ जाती तो यह लोग अन्य ज्यादा लोगों के संपर्क में नहीं जा पाते।
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हमने लैब पर जांच की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। 15 दिन मेें एक हजार प्रतिदिन जांच कराने का प्रयास है। एलटी का प्रशिक्षण कराया जा रहा है।
डा. मनोज चौधरी, जिला सर्विलांस अधिकारी, संभल
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आरटीपीसीआर लैब तो जिले में स्थापित हुई लेकिन कार्य क्षमता मामूली है। नमूने 2000 लिए जा रहे हैं और लैब में मुश्किल से 200 नमूनों की जांच हो रही है। बाकी नमूने मेरठ की लैब भेजने पड़ते हैं। जिसकी रिपोर्ट दो से तीन दिन में मिल रही है। जब रिपोर्ट का परिणाम आने में देरी होती है तो संक्रमित व्यक्ति बाहर सभी के संपर्क में रहता है। जब संक्रमित होने की पुष्टि होती है तो उन लोगों में हड़कंप मच जाता है जो संक्रमित के संपर्क में रहे। यदि नमूने की जांच एक ही दिन में होगी तो संक्रमित व्यक्ति ज्यादा लोगों से नहीं मिल पाएगा और संक्रमण का प्रसार होने से थमेगा।
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शुक्रवार को जो 65 संक्रमित मरीज सामने आए हैं। इनमें से ज्यादातर की जांच के लिए नमूने पांच जनवरी को लिए गए थे। सात जनवरी को संक्रमित होने की पुष्टि हुई। तीन दिन तक यह संक्रमित लोग जहां भी गए होंगे कोरोना संक्रमण का खतरा बन गया होगा। यदि नमूना लिए जाने की रात तक ही इनकी रिपोर्ट आ जाती तो यह लोग अन्य ज्यादा लोगों के संपर्क में नहीं जा पाते।
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हमने लैब पर जांच की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। 15 दिन मेें एक हजार प्रतिदिन जांच कराने का प्रयास है। एलटी का प्रशिक्षण कराया जा रहा है।
डा. मनोज चौधरी, जिला सर्विलांस अधिकारी, संभल