सरायतरीन(संभल)। बहजोई ब्लॉक क्षेत्र के गांव दिलगौरा में स्थित मां मोहन देवी आश्रम के परिसर में रविवार को भगवान श्री कृष्ण लीला के चौथे दिन भगवान श्री कृष्णा और रुक्मणि विवाह का प्रसंग सुनाया गया। ग्रामीणों ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह में कन्यादान लिया। व्यास हरिद्वारी महाराज ने कहा कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणि बचपन से ही श्रीकृष्ण की वीरता और गुणों की कथाएं सुनकर उन पर मोहित हो गई थीं और उन्हें अपना पति मान लिया था। रुक्मणि के भाई रुक्म के मित्र शिशुपाल से रुक्मणि का विवाह तय हुआ। इससे रुक्मणि बहुत दुखी हुईं। रुक्मणि ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजा और अपनी व्यथा सुनाई। रुक्मणि के संकट को देखकर श्रीकृष्ण ने रुक्मणि का हरण कर लिया। शिशुपाल तथा अन्य राजाओं को युद्ध में हराकर द्वारका ले आए। द्वारका पहुंचकर श्रीकृष्ण और रुक्मणि का भव्य विवाह हुआ।
श्रीकृष्ण और रुक्मणि का विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इस दौरान जयपाल यादव, मनवीर यादव, राजीव कुमार, जीतपाल यादव, सुनील कुमार, सचिन यादव, नरेश पाल, हंसराज सिंह, गुड्डू यादव, रोहन सिंह, राम बृजेश आदि मौजूद रहे।