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अपनी ही सीट बरकरार रखने को पसीना बहा रही सपा
ब्यूराे/अमर उजाला, संभल
Updated Thu, 12 May 2016 12:41 AM IST
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बिलारी विधानसभा का उपचुनाव सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी की साख से जुड़ा है। चुनावी साल से ऐन पहले हो रहा उपचुनाव एक तरह से सपा के लिए एसिड टेस्ट की तरह है। यहां का चुनावी नतीजा सूबे की सियासत के भविष्य का संकेत करेगी। यही वजह है कि सत्ताधारी दल ने बिलारी का चुनावी समर जीतने के लिए यहां मंत्रियों और विधायकों की फौज लगा रखी है। लेकिन जैसे संकेत हैं सपा को अपनी सीट कायम रखने के लिए काफी पसीना बहना पड़ रहा है।
नाखुश मतदाताओं को मनाने और सीट को दोबारा सपा के खाते में लाने के लिए पार्टी के थिंक टैंक ने मंत्री और नेताओं को उन्हीं की जाति बाहुल्य वाले क्षेत्रों में लगाया गया है। खुद पार्टी के अलंबरदार मानते हैं कि उपचुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए आसान लड़ाई नहीं है। बिलारी विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 3.41 लाख है। इसमें बिलारी तहसील क्षेत्र के 289 और चंदौसी तहसील क्षेत्र के 58 बूथ मिलाकर कुल 347 बूथों पर 16 मई को वोट डाले जाने हैं। बिलारी के सपा विधायक हाजी इरफान की सड़क हादसे में मौत के बाद यहां उपचुनाव हो रहा है।
दिवंगत विधायक के बेटे फईम को सपा ने टिकट दिया है। अपनी सीट को वापस पाने के लिए सपा को पसीना बहाना पड़ रहा है। मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, जनप्रतिनिधियों की फौज उतारनी पड़ी है। सपा के फईम इकलौते मुस्लिम प्रमुख प्रत्याशी माने जाने रहे हैं। सूबे के सबसे कद्दावर मंत्री आजम खां ने खुद नामांकन के समय मौजूद रहकर इस बात का स्पष्ट संकेत दे दिया कि पार्टी के लिए इस चुनावी जंग की सियासी अहमियत कितनी है। बसपा का प्रत्याशी नहीं उतारना भाजपा के इतराने की बजह है, शायद सोंच कर कांग्रेस ने शिशुपाल सिंह जाटव को प्रत्याशी बनाया हैं।
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ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा, लेकिन सपा की तैयारियों से इतना अनुमान तो लगाया ही जा सकता है कि सीट वापसी की राह बहुत आसान नहीं लग रही है।
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नाखुश मतदाताओं को मनाने और सीट को दोबारा सपा के खाते में लाने के लिए पार्टी के थिंक टैंक ने मंत्री और नेताओं को उन्हीं की जाति बाहुल्य वाले क्षेत्रों में लगाया गया है। खुद पार्टी के अलंबरदार मानते हैं कि उपचुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए आसान लड़ाई नहीं है। बिलारी विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 3.41 लाख है। इसमें बिलारी तहसील क्षेत्र के 289 और चंदौसी तहसील क्षेत्र के 58 बूथ मिलाकर कुल 347 बूथों पर 16 मई को वोट डाले जाने हैं। बिलारी के सपा विधायक हाजी इरफान की सड़क हादसे में मौत के बाद यहां उपचुनाव हो रहा है।
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दिवंगत विधायक के बेटे फईम को सपा ने टिकट दिया है। अपनी सीट को वापस पाने के लिए सपा को पसीना बहाना पड़ रहा है। मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, जनप्रतिनिधियों की फौज उतारनी पड़ी है। सपा के फईम इकलौते मुस्लिम प्रमुख प्रत्याशी माने जाने रहे हैं। सूबे के सबसे कद्दावर मंत्री आजम खां ने खुद नामांकन के समय मौजूद रहकर इस बात का स्पष्ट संकेत दे दिया कि पार्टी के लिए इस चुनावी जंग की सियासी अहमियत कितनी है। बसपा का प्रत्याशी नहीं उतारना भाजपा के इतराने की बजह है, शायद सोंच कर कांग्रेस ने शिशुपाल सिंह जाटव को प्रत्याशी बनाया हैं।
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ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा, लेकिन सपा की तैयारियों से इतना अनुमान तो लगाया ही जा सकता है कि सीट वापसी की राह बहुत आसान नहीं लग रही है।