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Sambhal News: 120 किलो वजन ने साबित की थी फरहाना की बेगुनाही
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संभल। शहर में 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल में छत से पथराव के आरोप में गिरफ्तार की गईं चार महिलाओं में से फरहाना का ज्यादा वजन उनके लिए वरदान साबित हुआ था। पुलिस ने पथराव के आरोप में फरहाना को गिरफ्तार किया तो महिला के पति ने 120 किलो वजन के कारण छत पर न चढ़ पाने का हवाला दिया। इस बात को कोर्ट में तवज्जो मिली तो 87 दिन बाद फरहाना को जमानत मिल गई। वहीं, एसआईटी ने दोबारा जांच की तो टीम को महिला के खिलाफ सबूत नहीं मिले।
एसपी केके बिश्नोई ने बताया कि 24 नवंबर 2024 को बवाल में पुलिस ने चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इसमें हिंदूपुरा खेड़ा निवासी फरहाना को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस ने शुरुआत में माना था कि फरहाना ने छत से पथराव किया है। फरहाना के पति सुबहान ने अधिकारियों से बार-बार आग्रह किया कि पत्नी इस बवाल में पथराव के आरोपियों में शामिल नहीं हैं लेकिन तब सुनवाई नहीं हो सकी थी।
बाद में फरवरी 2025 के अंत में सीजेएम कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में 87 दिन बाद फरहाना की जमानत पर रिहाई का आदेश दे दिया था। उस समय ज्यादा वजन के कारण महिला के छत पर न चढ़ पाने के तर्क को सही माना गया। इस पर एसआईटी ने दोबारा से जांच की तो भी फरहाना के खिलाफ सबूत नहीं मिले और ज्यादा वजन उनकी बेगुनाही का प्रमाण बन गया था। इस पर एसआईटी को उनके मुकदमे में एफआर लगानी पड़ गई थी।
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आयोग के समक्ष तीन महिलाओं ने स्वीकारा था पथराव करना
पुलिस ने छत से पथराव करने के आरोप में हिंदूखेड़ा इलाके की रुकैया, जिकरा और नजराना को भी गिरफ्तार किया था। जेल भेजी गई रुकैया ने न्यायिक जांच आयोग को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराए थे। इस दौरान बताया था कि उसने पड़ोसी की छत से पत्थरबाजी होती देखी थी। इसके बाद उसने भी पत्थर फेंके थे। दूसरी महिला जिकरा ने अपने बयान में कहा था कि मेरा बच्चा इस बवाल में घायल हुआ था। इसलिए छत से पत्थर फेंके थे। नजराना ने अपने बयान में बताया था कि मोहल्ले की कई महिलाएं छत से पुलिस पर पत्थर फेंक रही थीं। इन महिलाओं के साथ मिलकर उसने भी पत्थर फेंके थे।
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एसपी केके बिश्नोई ने बताया कि 24 नवंबर 2024 को बवाल में पुलिस ने चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। इसमें हिंदूपुरा खेड़ा निवासी फरहाना को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस ने शुरुआत में माना था कि फरहाना ने छत से पथराव किया है। फरहाना के पति सुबहान ने अधिकारियों से बार-बार आग्रह किया कि पत्नी इस बवाल में पथराव के आरोपियों में शामिल नहीं हैं लेकिन तब सुनवाई नहीं हो सकी थी।
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बाद में फरवरी 2025 के अंत में सीजेएम कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में 87 दिन बाद फरहाना की जमानत पर रिहाई का आदेश दे दिया था। उस समय ज्यादा वजन के कारण महिला के छत पर न चढ़ पाने के तर्क को सही माना गया। इस पर एसआईटी ने दोबारा से जांच की तो भी फरहाना के खिलाफ सबूत नहीं मिले और ज्यादा वजन उनकी बेगुनाही का प्रमाण बन गया था। इस पर एसआईटी को उनके मुकदमे में एफआर लगानी पड़ गई थी।
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आयोग के समक्ष तीन महिलाओं ने स्वीकारा था पथराव करना
पुलिस ने छत से पथराव करने के आरोप में हिंदूखेड़ा इलाके की रुकैया, जिकरा और नजराना को भी गिरफ्तार किया था। जेल भेजी गई रुकैया ने न्यायिक जांच आयोग को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराए थे। इस दौरान बताया था कि उसने पड़ोसी की छत से पत्थरबाजी होती देखी थी। इसके बाद उसने भी पत्थर फेंके थे। दूसरी महिला जिकरा ने अपने बयान में कहा था कि मेरा बच्चा इस बवाल में घायल हुआ था। इसलिए छत से पत्थर फेंके थे। नजराना ने अपने बयान में बताया था कि मोहल्ले की कई महिलाएं छत से पुलिस पर पत्थर फेंक रही थीं। इन महिलाओं के साथ मिलकर उसने भी पत्थर फेंके थे।