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गठबंधन टिकट को लेकर उभरे सांगठनिक मतभेद को दूर करने की चुनौती
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संभल/चंदौसी। समाजवादी पार्टी से डा. शफीकुर्रहमान बर्क को टिकट दिए जाने के बाद उभरी पार्टी की अंतर्कलह को दूर करने के लिए संगठन के साथ एक बड़ी चुनौती बन गई है। टिकट होने के बाद कई विरोधियों के स्वर नरम पड़ गए हैं लेकिन इसके बावजूद अभी कई नेता खिलाफ हैं। हालांकि संगठन ने उनकी नाराजगी को दूर कर चुनाव प्रचार के लिए खुलकर सामने आने के लिए मनाने की कवायद शुरू कर दी है।
सपा-बसपा व रालोद गठबंधन से इस बार टिकट के दावेदारों की फेहरिस्त काफी लंबी थी लेकिन एक बार फिर सियासत के दिग्गज खिलाड़ी 86 वर्षीय डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने सभी दावेदारों को पछाड़ते हुए बाजी मार ली। जिससे कई दावेदारों को झटका लगा है। वह अंदरखाने नाराज भी हैं। जिनसे भीतरघात का खतरा भी हो सकता है। पार्टी इस खतरे को भली भांति समझ भी रही है और काफी सतर्क भी नजर आ रही है। हालांकि टिकट होने के बाद कई दावेदारों ने पार्टी के निर्णय को सर्वोच्च बताते हुए हथियार डाल दिए हैं। लेकिन कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गठबंधन का प्रत्याशी घोषित होने के बाद पार्टी नेतृत्व और जिलाध्यक्ष को अपनी नाराजगी से अवगत कराया है। इसके बाद जिलाध्यक्ष फिरोज खां ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सोच समझ कर ही फैसला लिया होगा।
उन्होंने स्वीकार किया कि रूठने व मनाने का दौर तो है ही लेकिन लोहिया वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष अजय यादव ने पार्टी अध्यक्ष को फैक्स करने के बाद कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात की थी। उनके साथ कार्यकर्ता भी थे। सभी को समझाया गया है। अभी जो किसी वजह से नाराज चल रहे हैं, वह भी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में लग जाएंगे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि सभी को हाईकमान के फैसले पर बने रहना चाहिए। चुनाव भी हाईकमान से चुने गए प्रत्याशी को लड़ाना चाहिए। जो नाराज नेता है, अधिकतर तो मान ही गए हैं। शेष जो नाराज हैं, उन्हें मनाया जाएगा। पार्टी प्रत्याशी को भारी बहुमत से जिताने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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सपा-बसपा व रालोद गठबंधन से इस बार टिकट के दावेदारों की फेहरिस्त काफी लंबी थी लेकिन एक बार फिर सियासत के दिग्गज खिलाड़ी 86 वर्षीय डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने सभी दावेदारों को पछाड़ते हुए बाजी मार ली। जिससे कई दावेदारों को झटका लगा है। वह अंदरखाने नाराज भी हैं। जिनसे भीतरघात का खतरा भी हो सकता है। पार्टी इस खतरे को भली भांति समझ भी रही है और काफी सतर्क भी नजर आ रही है। हालांकि टिकट होने के बाद कई दावेदारों ने पार्टी के निर्णय को सर्वोच्च बताते हुए हथियार डाल दिए हैं। लेकिन कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गठबंधन का प्रत्याशी घोषित होने के बाद पार्टी नेतृत्व और जिलाध्यक्ष को अपनी नाराजगी से अवगत कराया है। इसके बाद जिलाध्यक्ष फिरोज खां ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सोच समझ कर ही फैसला लिया होगा।
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उन्होंने स्वीकार किया कि रूठने व मनाने का दौर तो है ही लेकिन लोहिया वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष अजय यादव ने पार्टी अध्यक्ष को फैक्स करने के बाद कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात की थी। उनके साथ कार्यकर्ता भी थे। सभी को समझाया गया है। अभी जो किसी वजह से नाराज चल रहे हैं, वह भी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में लग जाएंगे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि सभी को हाईकमान के फैसले पर बने रहना चाहिए। चुनाव भी हाईकमान से चुने गए प्रत्याशी को लड़ाना चाहिए। जो नाराज नेता है, अधिकतर तो मान ही गए हैं। शेष जो नाराज हैं, उन्हें मनाया जाएगा। पार्टी प्रत्याशी को भारी बहुमत से जिताने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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