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देवबंद: दारुल उलूम में कुरआन के साथ गीता, रामायण और अन्य पुस्तकें पढ़ते हैं छात्र, 20 करोड़ से बन रही नई लाइब्रेरी

Mon, 29 Jun 2020 02:06 PM IST
Prag Gupta न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Prag Gupta Updated Mon, 29 Jun 2020 02:06 PM IST
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Saharanpur News: View the building of Darul Uloom's new library
देवबंद दारुल उलूम में बन रही लाइब्रेरी की नई इमारत। - फोटो : अमर उजाला

एशिया का सबसे बड़ा इस्लामिक शिक्षण केंद्र दारुल उलूम कुरआन, हदीस की शिक्षा और अपने फतवों के लिए पहचाना जाता है। खास बात यह है कि यहां की पुरानी लाइब्रेरी में ऋगवेद, सामवेद, यर्जुवेद, अथर्ववेद के साथ ही गीता, महाभारत, रामायण, बाइबल, हस्तलिखित कुरआन, तोरेत, सोने से लिखा कुरआन पाक, एक पेज पर आधारित कुरआन, मुगल शासक हजरत औरंगजेब का हस्तलिखित कुरआन पाक, हजरत मोहम्मद साहब द्वारा मिस्र के बादशाह को लिखा गया पत्र, सबसे छोटा कुरआन और अकाबिरों द्वारा लिखित पुस्तकें मौजूद हैं। इनके अलावा यहां लाखों पुस्तकें रखी गई हैं। जिनका छात्र अध्ययन करते हैं।

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दारुल उलूम की पुरानी लाइब्रेरी में रखी नायाब पुस्तकों के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही नई लाइब्रेरी का निर्माण कार्य लगभग आखिरी चरण में है। लाइब्रेरी की खूबसूरत इमारत लोगों को अपनी और आकर्षित कर रही है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इस लाइब्रेरी को जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। 
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दारुल उलूम में स्थित लाइब्रेरी में पुस्तकों की संख्या लाखों में होने जाने के चलते लाइब्रेरी का पुराना भवन छोटा पड़ने लगा था। जिसको देखते हुए संस्था की सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा ने नई लाइब्रेरी के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया था और इसके निर्माण के लिए करीब आठ करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। वर्ष 2006 में लाइब्रेरी का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो धीरे धीरे इसका बजट भी बढ़ता चला गया।
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वर्तमान में लाइब्रेरी का बजट लगभग 20 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया है। शानदार गोलाकार लाइब्रेरी की इमारत की खूबसूरती लोगों को अपनी और आकर्षित कर रही है। दारुल उलूम के साथ साथ यह लाइब्रेरी भी देश विदेश में अपनी अलग पहचान बना चुकी है। लाइब्रेरी के चारों और लिफ्ट लगाई जाएंगी ताकि सात मंजिला इमारत में ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर जाने के लिए किसी तरह की परेशानी न हो।

इतना ही नहीं लाइब्रेरी की छत पर हेलीपैड भी बनाया जाना था, लेकिन किन्हीं वजह से इसे स्थगित कर दिया गया। संस्था के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी बताते हैं कि दो लाख 62 हजार वर्ग फीट में बने सात मंजिला गोल भवन की ऊपरी चार मंजिलों में लाइब्रेरी होगी। जिसमें 10 लाख से अधिक पुस्तकें रखने की व्यवस्था की गई है, जबकि पहली व दूसरी मंजिल में कन्वेंशन हाल और तीसरे मंजिल में हदीस की कक्षा चलेगी। मद्रासी ने बताया कि इस भव्य भवन के तहखाने को परीक्षा हाल बनाया गया है। 

डिजाइन ऐसा की चारों तरफ से आती है हवा
लाइब्रेरी के भवन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें किसी भी रुख से चलने वाली हवा भीतर जरूर पहुंचेगी। छात्रों को पढ़ाई में किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए लाइब्रेरी के अंदर तेज रोशनी वाली हजारों लाइटें लगाई गई हैं। जिनके जलने पर लाइब्रेरी पूरी तरह जगमगा उठती है।

मोहतमिम कार्यालय से जारी अपील
मोहतमिम कार्यालय से जारी हुई अपील में कहा गया है कि नई लाइब्रेरी में उर्दू, हिंदी, अरबी, फारसी, अरबी, अंग्रेजी व अन्य भाषाओं की किताबों के अलावा धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध होंगी। लाइब्रेरी के प्रत्येक हाल में दीनी, समाजी, सियासी समेत सभी विषयों की पुस्तकें रखी जाएंगी। दारुल उलूम ने प्रकाशकों और लेखन क्षेत्र से जुड़े से लोगों से किसी भी विषय पर लिखी गई किताबें, धार्मिक पुस्तकें, ऐतिहासिक पत्र या अन्य लेखन सामग्री से लाइब्रेरी का सहयोग करने की अपील की है। 

पुरानी लाइब्रेरी में रखा है ऐतिहासिक पुस्तकों का जखीरा 
पुरानी लाइब्रेरी में बेशकीमती पुस्तकों का जखीरा मौजूद है। लाइब्रेरी में जहां सभी धर्मों के ग्रंथ मिलते हैं। वहीं, राजा महाराजाओं की हस्तलिखित किताबें व लेख भी बेहद संभाल कर रखे गए हैं। लाइब्रेरी में ऋगवेद, सामवेद, यर्जुवेद, अथर्ववेद के साथ ही गीता, महाभारत, रामायण, बाइबल, हस्तलिखित कुरआन, तोरेत, सोने से लिखा कुरआन पाक, एक पेज पर आधारित कुरआन, मुगल शासक हजरत औरंगजेब का हस्तलिखित कुरआन पाक, हजरत मोहम्मद साहब द्वारा मिस्र के बादशाह को लिखा गया पत्र, सबसे छोटा कुरआन और अकाबिरों द्वारा लिखित पुस्तकें मौजूद हैं। इनके अलावा यहां लाखों पुस्तकें रखी गई हैं। जिनका छात्र अध्ययन करते हैं। 

17 भाषाओं में रखी हैं पुस्तकें 
पुस्तकालय में 17 भाषाओं में विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकें उपलब्ध है। इनमें अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, पंजाबी, तेलगू, तमिल, फ्रांसीसी, बंगला, तुर्की, मलयालम, मराठी, सिंधी और बरमी भाषाएं शामिल है। 

शोध करने पहुंचते हैं 
इस पुस्तकालय के महत्व का अंदाजा यूं भी लगाया जा सकता है कि अरब देशों, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित विश्वभर के शोधकर्ता इस्लाम धर्म के विषयों पर शोध करने के लिए समय-समय पर पुस्तकालय से अवश्य संपर्क करते हैं। देश के कोने-कोने से भी शोध करने वालों का तांता यहां लगा रहता है। 

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