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फूलों की खेती के नाम पर हेराफेरी की फसल
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Mon, 11 Feb 2013 01:25 PM IST
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आयातित फूलों की खेती के नाम पर उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में अफसर हेराफेरी की फसल काटने में जुटे हैं। विभागीय जांच में यह बात सामने आई की ग्लेडियोलाई फूल की खेती के लिए किसानों में आयातित बीज बांटने के बजाए अफसर देसी बीज बांटकर लाखों रुपये के वारे-न्यारे कर रहे हैं।
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उद्यान निदेशक द्वारा बीज खरीद और आपूर्ति को लेकर कराई गई जांच में अनियमितता सामने आई है। जांच अधिकारी ने विभागीय निदेशक को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में जांच अधिकारी और विभाग के वित्त नियंत्रक एस के गुप्ता ने आयातित बीज की जगह किसानों में देसी बीज बांटे जाने की गड़बड़ी पकड़ी है।
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दरअसल, राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों की नकदी आय बढ़ाने के लिए विभाग की ओर से बल्बस पुष्प क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम संचालित है। योजना के तहत किसानों में हॉलैण्ड से आयातित बीज बांटे जाने थे। लेकिन विभाग के सैंपल जांच में उन्नाव जिले में अफसरों द्वारा आयातित बीज के नाम पर गड़बड़ झाला करने का मामला सामने आया है। ऐसे में वित्त नियंत्रक ने लखनऊ, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरेया और कन्नौज के जिला उद्यान अधिकारी (डीएचओ) को पत्र लिखकर खरीद प्रक्रिया का रिकॉर्ड तलब किया है।
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तकनीकी मानक की अनदेखी
वित्त नियंत्रक ने डीएचओ से आयातित ग्लैडियोलाई बल्ब की आयात प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया है। बीज के तकनीकी मानक को लेकर भी आशंका जताई है। डीएचओ को संबंधित रिकॉर्ड, फाइटोसेनेटरी प्रमाण पत्र और शिपिंग डॉक्यूमेंट आपूर्तिकर्ता संस्था से तलब करने का निर्देश दिया है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके संस्था द्वारा आपूर्ति किये गये गई बीज आयातित है।
यही नहीं आपूर्ति आदेश निर्गत करने के उपरान्त आपूर्तिकर्ता संस्था से डिलीवरी शिड्यूल प्राप्त करने को कहा गया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि संस्था द्वारा आपूर्तित बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु जिलाधिकारी द्वारा गठित टास्क फोर्स से डिलीवरी प्वाइंट पर ही पैकिंग की मात्रा एवं गुणवत्ता का सत्यापन कराया जाए।
चालान से हेराफरी उजागर
उन्नाव जिले के सैंपल में जांच में आपूर्ति करने वाली संस्था द्वारा आयातित बीज की आपूर्ति करने के बावजूद चालान और टैक्स इनवाइस पर अलॉट नम्बर एवं बैच नम्बर नहीं मिले। यही नहीं आपूर्ति करने वाली संस्था द्वारा बीज के रख-रखाव व आपूर्ति प्रक्रिया पर भी वित्त नियंत्रक ने सवाल खड़ा किया है। उन्होंने आपत्ति जताई है कि संस्था ने बीज आयात करने के तीन महीने बाद आपूर्ति की है। ऐसे में बीज के रख-रखाव का भी रिकॉर्ड तलब किया गया है।