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मुलायम की बिना बोले बेनी को चुप कराने की कोशिश

Fri, 19 Jul 2013 01:36 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Fri, 19 Jul 2013 01:36 PM IST
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rammurti will take on beni

उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर के राममूर्ति वर्मा की राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री के पद पर तरक्की को सपा के कुर्मी फैक्टर से जोड़कर देखा जा रहा है। जिस तरह बेनी प्रसाद वर्मा लंबे समय से सपा और उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव पर हमलावर थे।

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उसके मद्देनजर राममूर्ति वर्मा को कैबिनेट का दर्जा देकर बेनी के मुकाबले की तैयारी की गई है। सपा को यह आशंका भी थी कि लोकसभा चुनाव के दौरान बेनी की तरफ से कुर्मियों को अपेक्षित सम्मान न देने का आरोप लगाया जा सकता है।
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यही नहीं, जिस तरह बेनी वर्मा के सीट बदलने की चर्चाएं तेज थी। राममूर्ति वर्मा की तरक्की के पीछे इन चर्चाओं का हाथ भी माना जा रहा है। राममूर्ति वर्मा अंबेडकरनगर सीट से लोकसभा के उम्मीदवार भी हैं।
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इसलिए सपा ने उन्हें तरक्की देकर न सिर्फ कुर्मी समीकरणों को संतुलित करने की कोशिश की है बल्कि अंबेडकरनगर को दो कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री देकर यहां लोगों को सपा के पाले में आकर्षित करने की कोशिश की है।

जिससे बसपा के कब्जे से इस सीट को निकालकर सपा का झंडा फहराया जा सके। अभी इस सीट पर बसपा के राकेश पाण्डेय का कब्जा है। राममूर्ति पहली बार विधायक चुने गए हैं।

पूर्वी पट्टी में कुर्मी समीकरण साधने की कोशिश : राममूर्ति की तरक्की को सपा खेमे में बेनी की काट का इंतजाम माना जा रहा है।  प्रदेश में कुर्मियों की आबादी लगभग 8 प्रतिशत है। जिन्हें अलग-अलग इलाकों में कुर्मी, चनऊ, पटेल, कटियार,  कुर्मी-मल्ल, कुर्मी-सैंथवार नाम से जानते हैं।

मुलायम सिंह यादव व बेनी वर्मा जब-जब साथ-साथ रहते थे तो दोनों के चेहरे यादव कुर्मी मतों को एकजुट करके मुस्लिमों के साथ तालमेल बैठाते थे। जिससे सपा को भी फायदा होता था।

पर, बेनी के अलग हो जाने के बाद सपा के पास अभी तक कोई ऐसा चेहरा नहीं था। जिसका बतौर कुर्मी नेता उपयोग किया जा सके।

यह भी रही वजह :
वैसे तो मंत्रिमंडल में भगवत शरण गंगवार और नरेन्द्र वर्मा के रूप में दो और कुर्मी नेता राज्यमंत्री के रूप में शामिल हैं। पर, राममूर्ति वर्मा को तरक्की के पीछे बेनी की पट्टी से जुड़ा होना भी रहा है।


बेनी का विशेष प्रभाव बाराबंकी से पूर्वांचल तक की सीटों पर है। इसीलिए सपा ने भी कुर्मी फैक्टर से प्रभावित मानी जाने वाली अंबेडकरनगर से विधानसभा चुनाव जीते राममूर्ति वर्मा को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

यह सीट लंबे समय से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित चली आ रही थी। लोकसभा के पिछले चुनाव में यह सीट सामान्य घोषित हुई है।

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