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एक फेसबुक कमेंट ने छीन ली होनहार की जिंदगी

Tue, 05 Mar 2013 10:51 AM IST
साहिबाबाद/ब्यूरो
साहिबाबाद/ब्यूरो Updated Tue, 05 Mar 2013 10:51 AM IST
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promising life taken away by a facebook comment
बीसीए प्रथम वर्ष के होनहार स्टूडेंट विक्रांत त्यागी की मौत भले ही ब्रेन हैम्रेज से हुई हो, लेकिन छात्रों का आरोप था कि दो शिक्षकों ने छात्र को मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया। हुआ यूं था कि छात्र विक्रांत त्यागी ने कुछ दिन पूर्व अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर एक लड़की का फोटो अपलोड करते हुए लिखा था पहचानो कौन? फोटो में लड़की का चेहरा नहीं दिख रहा था। इस पर साथी छात्रों ने विक्रांत से उसका नाम बताने को कहा था।
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विक्रांत ने फोटो पर कमेंट करते हुए साथी छात्रा का नाम लिखा था। बताया जा रहा है कि उस छात्रा ने टीचर्स से इसकी शिकायत की थी। इसी पर शनिवार को मेंटरशिप प्रोग्राम (काउंसलिंग) में शिक्षकों ने उसे डांटा था। आरोप है कि शिक्षकों ने उसके परिजनों और पुलिस से शिकायत की धमकी भी दी थी।
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इस पर वह बेहोश हो गया था। छात्रों ने शिक्षकों को बताया तो उन्होंने बेहोशी को ड्रामा बताया। लेकिन जब उसके मुंह से झाग निकला तो प्रबंधन ने उसे नरेन्द्र मोहन में भर्ती करा दिया था।
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विक्रांत की फैमिली को मदद का आश्वासन
आईटीएस के डायरेक्टर जनरल एके पुरी ने बताया कि विक्रांत की मौत प्रकरण में शिक्षकों पर लगे आरोपों की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। जांच रिपोर्ट के बाद आरोपी शिक्षकों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि विक्रांत की पूरी फीस वापस की जाएगी। भविष्य में उसकी बहन अगर कॉलेज में मैरिट के आधार पर एडमीशन लेगी तो उसकी पढ़ाई फ्री होगी। दोपहर बाद कॉलेज प्रबंधन के लोग विक्रांत के परिजनों से मिलने उसके मंडोली स्थित मकान संख्या-601 पर पहुंचे। प्रबंधन ने उन्हें आर्थिक सहायता देने का भी आश्वासन दिया है।

दरोगा बनना चाहता था होनहार विक्रांत
विक्रांत त्यागी पढ़ाई में अव्वल था और बचपन से ही उसे क्रिकेट खेलने का शौक  था। वह दिल्ली पुलिस में दरोगा बनना चाहता था। दोस्त विशाल ने बताया कि विक्रांत के पिता कैंसर से पीड़ित हैं। फिलहाल मां सुनीता ही पूरे परिवार को संभालती हैं। उसकी छोटी बहन वर्षा 10वीं की छात्रा है। सहपाठियों ने बताया कि विक्रांत काफी खुश मिजाज था। हमेशा दूसरों को हंसाता रहा था। प्यार से लोग उसे वीरू के नाम से पुकारते थे।


परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इकलौते बेटे विक्रांत की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां सुनीता तो बेटे की मौत की खबर पर बेहोश हो गई थी। परिजन और रिश्तेदार मां को ढांढस बंधाने की कोशिश में जुटे थे। इसके अलावा उसके साथियों का भी रो रोकर बुरा हाल है।
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