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उत्तर प्रदेश चुनाव: जाट नेता राजा महेंद्र के नाम से विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगे प्रधानमंत्री, नाराज जाटों को रिझाने की कोशिश

Tue, 07 Sep 2021 03:33 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 07 Sep 2021 03:33 PM IST
सार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट पारंपरिक रूप से कांग्रेस के वोटर हुआ करते थे। लेकिन 1996 में जाट नेता चौधरी अजित सिंह ने लोकदल की एतिहासिक विरासत और पिता चौधरी चरण सिंह के नाम को लेकर राष्ट्रीय लोकदल का गठन किया और उसके बाद जाट उनके साथ जुड़ गए। वर्ष 2013 में एक विवाद के बाद जाट सांप्रदायिक आधार पर बंट गए और माना जाता है कि उन्होंने 2014, 2017 और 2019 के चुनाव में भाजपा को वोट दिया...

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Prime Minister Narendra Modi will inaugurate a university on the name of great Jat leader Raja Mahendra Pratap Singh on September 14
राजा महेंद्र प्रताप सिंह - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाटों के महान नेता राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से 14 सितंबर को एक विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगे। मूलरूप से हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्वतंत्रता संग्राम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका और शिक्षा के क्षेत्र में अपने बड़े योगदान के लिए जाने जाते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए 1.2 एकड़ भूमि दान देकर उन्होंने ही उसके निर्माण का रास्ता प्रशस्त किया था। जाट समाज के बीच उन्हें बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। माना जा रहा है कि उनके नाम से विश्वविद्यालय बनाने से जाटों की भाजपा से नाराजगी कम करने में मदद मिलेगी।

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राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर पिछले कई वर्षों से विवाद होता रहा है। भाजपा नेता कैप्टन अभिमन्यु ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उस व्यक्ति (मोहम्मद अली जिन्ना) की तस्वीर लगी हुई है, जिसने भारत को तोड़ने का काम किया था, लेकिन उस महान जाट नेता राजा महेंद्र सिंह की तस्वीर नहीं लगी हुई है, जिसने भूमि दान देकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के गठन का रास्ता साफ किया था। भाजपा ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जन्मदिन पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भव्य कार्यक्रम करने की भी कोशिश की थी जिस पर काफी विवाद हुआ था।
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े योगदान को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो वर्ष पहले एक विश्वविद्यालय के निर्माण की घोषणा की थी। इस विश्वविद्यालय को उनका ड्रीम प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। वहीं, राष्ट्रीय लोकदल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष रजनीश मलिक ने अमर उजाला से कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह जाट समुदाय के महान नेताओं में से एक हैं। देश की आजादी और शिक्षा के लिए किए गए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन अगर भाजपा को लगता है कि उनके नाम से विश्वविद्यालय बना देने से जाट उन्हें वोट दे देंगे तो यह उनकी गलतफहमी है। उन्होंने कहा कि जाटों की पहचान केवल कृषि से होती है। जब तक केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, जाटों की उससे नाराजगी कभी दूर नहीं होगी।

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दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट पारंपरिक रूप से कांग्रेस के वोटर हुआ करते थे। लेकिन 1996 में जाट नेता चौधरी अजित सिंह ने लोकदल की एतिहासिक विरासत और पिता चौधरी चरण सिंह के नाम को लेकर राष्ट्रीय लोकदल का गठन किया और उसके बाद जाट उनके साथ जुड़ गए। वर्ष 2013 में एक विवाद के बाद जाट सांप्रदायिक आधार पर बंट गए और माना जाता है कि उन्होंने 2014, 2017 और 2019 के चुनाव में भाजपा को वोट दिया।

लेकिन जाट पूरी तरह कृषि से जुड़े समाज के रूप में देखे जाते हैं। कृषि ही उनका मुख्य पेशा माना जाता है। कृषि कानूनों पर उपजे आक्रोश के बाद माना जा रहा है कि जाट भाजपा से नाराज हैं और एक बार फिर वे आरएलडी (समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन) की तरफ वापस जा सकते हैं। राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से विश्वविद्यालय का गठन जाटों की राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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