Pratapgarh : सूतक काल से पहले बंद हुए मंदिरों के कपाट, चंद्र ग्रहण के समय घरों में हुआ जागरण
भाद्रपद की पूर्णिमा पर रविवार देररात को चंद्रग्रहण लगा। रात में 11 बजे से 12.22 बजे पूर्ण चंद्रग्रहण रहा। रविवार दोपहर 12.58 बजे सूतक काल से पहले ही मां बेल्हा देवी मंदिर समेत जनपद के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।
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भाद्रपद की पूर्णिमा पर रविवार देररात को चंद्रग्रहण लगा। रात में 11 बजे से 12.22 बजे पूर्ण चंद्रग्रहण रहा। रविवार दोपहर 12.58 बजे सूतक काल से पहले ही मां बेल्हा देवी मंदिर समेत जनपद के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। मंदिर परिसर में जाप किया गया। लोगों ने सूतक काल मंत्रों का जाप पर अपने आराध्य देव की आराधना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक के समय भगवान का पूजन-अर्चन निषेध रहता है। ज्योतिषाचार्य विजय विवेकानंद ने बताया कि चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल का प्रभाव रहा। इस दौरान विशेष रूप से पूजा-पाठ, शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों को अशुभ माना जाता है। मंदिरों में भी पूजन कार्य निषेध रहता है।
बलीपुर दुर्गा मंदिर के पुजारी आलोक ऋषिवंश ने बताया कि देररात तक चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहा। सूतक काल शुरू होने के कारण मंदिरों में पूजन-अर्चन नहीं किया गया। ग्रहण व सूतक काल में भगवान की मूर्तियों को भी ढंक दिया गया।
सूतक काल शुरु होने पर नगर के मां बेल्हा देवी धाम, रानीगंज के मां बाराही देवी धाम, बाबा बेलखरनाथ धाम, लालगंज के बाबा घुइसरनाथ धाम कटरा मेदनीगंज स्थित शीतला माता धाम के कपाट बंद कर दिए गए। सूतक काल शुरु होते मंदिरों के बाहर जगह-जगह लोग भजन कीर्तन करते रहे। कई मंदिरों के बाहर पहुंचे श्रद्धालु दूर से ही सिर झुकाकर आराधन की। वहीं लोगों ने दोपहर में सूतक काल से पहले भोजन किया। ग्रहण के बाद स्नान कर दान किया। देररात तक लोगों ने घरों में जागरण किया।