फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   The doors of the temples were closed before the Jhoojoop Chha Sutak period, Jagran was held in homes during th

Pratapgarh : सूतक काल से पहले बंद हुए मंदिरों के कपाट, चंद्र ग्रहण के समय घरों में हुआ जागरण

Sun, 07 Sep 2025 08:15 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 07 Sep 2025 08:15 PM IST
सार

भाद्रपद की पूर्णिमा पर रविवार देररात को चंद्रग्रहण लगा। रात में 11 बजे से 12.22 बजे पूर्ण चंद्रग्रहण रहा। रविवार दोपहर 12.58 बजे सूतक काल से पहले ही मां बेल्हा देवी मंदिर समेत जनपद के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।

विज्ञापन
The doors of the temples were closed before the Jhoojoop Chha Sutak period, Jagran was held in homes during th
चंद्रग्रहण का सूतक काल शुरू होते ही बंद हुए मंदिरों के गेट। - फोटो : संवाद

विस्तार

 

विज्ञापन

भाद्रपद की पूर्णिमा पर रविवार देररात को चंद्रग्रहण लगा। रात में 11 बजे से 12.22 बजे पूर्ण चंद्रग्रहण रहा। रविवार दोपहर 12.58 बजे सूतक काल से पहले ही मां बेल्हा देवी मंदिर समेत जनपद के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। मंदिर परिसर में जाप किया गया। लोगों ने सूतक काल मंत्रों का जाप पर अपने आराध्य देव की आराधना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक के समय भगवान का पूजन-अर्चन निषेध रहता है। ज्योतिषाचार्य विजय विवेकानंद ने बताया कि चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल का प्रभाव रहा। इस दौरान विशेष रूप से पूजा-पाठ, शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों को अशुभ माना जाता है। मंदिरों में भी पूजन कार्य निषेध रहता है।

विज्ञापन

बलीपुर दुर्गा मंदिर के पुजारी आलोक ऋषिवंश ने बताया कि देररात तक चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहा। सूतक काल शुरू होने के कारण मंदिरों में पूजन-अर्चन नहीं किया गया। ग्रहण व सूतक काल में भगवान की मूर्तियों को भी ढंक दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

सूतक काल शुरु होने पर नगर के मां बेल्हा देवी धाम, रानीगंज के मां बाराही देवी धाम, बाबा बेलखरनाथ धाम, लालगंज के बाबा घुइसरनाथ धाम कटरा मेदनीगंज स्थित शीतला माता धाम के कपाट बंद कर दिए गए। सूतक काल शुरु होते मंदिरों के बाहर जगह-जगह लोग भजन कीर्तन करते रहे। कई मंदिरों के बाहर पहुंचे श्रद्धालु दूर से ही सिर झुकाकर आराधन की। वहीं लोगों ने दोपहर में सूतक काल से पहले भोजन किया। ग्रहण के बाद स्नान कर दान किया। देररात तक लोगों ने घरों में जागरण किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed