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प्रतापगढ़: 26 हजार लोगों के करोड़ों लेकर चिटफंड कंपनी फरार
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साढ़े पांच साल में धन दोगुना करने का झांसा देकर एक चिटफंड कंपनी बेल्हा के लोगों को लॉकडाउन में कंगाल करके चली गई। जिले के लगभग 26 हजार ग्राहकों के करोड़ों रुपये लेकर फरार होने वाली कंपनी के भवन में ताला लटक रहा है।
हालांकि, कंपनी के जिम्मेदार ग्राहकों को रुपये लौटाने का दिलासा दे रहे हैं। यही वजह है कि अभी तक प्राथमिकी नहीं दर्ज कराई गई है।
शहर के बलीपुर में वर्ष 2012 में एक चिटफंड कंपनी ने अपना वीआईपी आफिस खोला।
शहर और गांव के शिक्षित बेरोजगारों को कमीशन पर एजेंट बनाया। कंपनी ने साढ़े पांच साल में धन दोगुना करने का लालच देकर ग्राहकों से करोड़ों रुपये जमा कराए। एजेंटों को निश्चित समय पर कमीशन और भुगतान देकर उनका विश्वास हासिल कर लिया।
कंपनी ने एजेंटों और ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए आरबीआई और कृषि विभाग से मिले लाइसेंस को कार्यालय में लगाया था। इस कंपनी ने सिर्फ प्रतापगढ़ में ही नहीं, बल्कि, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी अपना जाल फैला रखा था। शहर के विवेक नगर निवासी सुरेंद्र प्रताप सिंह, शिवजीपुरम निवासी अशोक कुमार श्रीवास्तव, रूपापुर निवासी एसके मिश्र सहित दर्जनों पीड़ितों ने बताया कि कंपनी का 25 मार्च को लॉकडाउन में बंद होने वाला ऑफिस आज तक नहीं खुला।
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किराये के भवन में चलने वाले कार्यालय में आज भी कंप्यूटर और फर्नीचर पड़े हैं। न तो मकान मालिक को किराया मिला और न कंपनी में तैनात कर्मचारियों को वेतन मिला है। रुपये मिलने की उम्मीद पाले बैठे अभिकर्ताओं और ग्राहकों ने अभी तक तहरीर नहीं दी है। सीओ सिटी अभय कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस के संज्ञान में अभी मामला नहीं आया है। तहरीर मिलने पर जांचकर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
प्रयागराज, कौशांबी में भी बंद हो गया कंपनी का कार्यालय
बेल्हा में ही नहीं, बल्कि प्रयागराज, कौशांबी, सुल्तानपुर में भी कंपनी का कार्यालय बंद हो गया है। कंपनी के जिम्मेदार अब भी ग्राहकों के रुपये लौटाने का आश्वासन दे रहे हैं, मगर अब ग्राहकों की उम्मीद टूट गई है। वह एफआईआर लिखवाने की तैयारी कर रहे हैं।
फंसे अभिकर्ता, जवाब देना पड़ रहा भारी
करोड़ों रुपये लेकर फरार होने वाली कंपनी ने अभिकर्ताओं की मुसीबत बढ़ा दी है। दरअसल, कंपनी ग्राहकों के रुपये सीधे नहीं जमा करती थी, बल्कि एजेंटों के माध्यम से ही काम होता था। अब आलम यह है कि अभिकर्ताओं को जवाब देना भारी पड़ रहा है।
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हालांकि, कंपनी के जिम्मेदार ग्राहकों को रुपये लौटाने का दिलासा दे रहे हैं। यही वजह है कि अभी तक प्राथमिकी नहीं दर्ज कराई गई है।
शहर के बलीपुर में वर्ष 2012 में एक चिटफंड कंपनी ने अपना वीआईपी आफिस खोला।
शहर और गांव के शिक्षित बेरोजगारों को कमीशन पर एजेंट बनाया। कंपनी ने साढ़े पांच साल में धन दोगुना करने का लालच देकर ग्राहकों से करोड़ों रुपये जमा कराए। एजेंटों को निश्चित समय पर कमीशन और भुगतान देकर उनका विश्वास हासिल कर लिया।
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कंपनी ने एजेंटों और ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए आरबीआई और कृषि विभाग से मिले लाइसेंस को कार्यालय में लगाया था। इस कंपनी ने सिर्फ प्रतापगढ़ में ही नहीं, बल्कि, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी अपना जाल फैला रखा था। शहर के विवेक नगर निवासी सुरेंद्र प्रताप सिंह, शिवजीपुरम निवासी अशोक कुमार श्रीवास्तव, रूपापुर निवासी एसके मिश्र सहित दर्जनों पीड़ितों ने बताया कि कंपनी का 25 मार्च को लॉकडाउन में बंद होने वाला ऑफिस आज तक नहीं खुला।
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किराये के भवन में चलने वाले कार्यालय में आज भी कंप्यूटर और फर्नीचर पड़े हैं। न तो मकान मालिक को किराया मिला और न कंपनी में तैनात कर्मचारियों को वेतन मिला है। रुपये मिलने की उम्मीद पाले बैठे अभिकर्ताओं और ग्राहकों ने अभी तक तहरीर नहीं दी है। सीओ सिटी अभय कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस के संज्ञान में अभी मामला नहीं आया है। तहरीर मिलने पर जांचकर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
प्रयागराज, कौशांबी में भी बंद हो गया कंपनी का कार्यालय
बेल्हा में ही नहीं, बल्कि प्रयागराज, कौशांबी, सुल्तानपुर में भी कंपनी का कार्यालय बंद हो गया है। कंपनी के जिम्मेदार अब भी ग्राहकों के रुपये लौटाने का आश्वासन दे रहे हैं, मगर अब ग्राहकों की उम्मीद टूट गई है। वह एफआईआर लिखवाने की तैयारी कर रहे हैं।
फंसे अभिकर्ता, जवाब देना पड़ रहा भारी
करोड़ों रुपये लेकर फरार होने वाली कंपनी ने अभिकर्ताओं की मुसीबत बढ़ा दी है। दरअसल, कंपनी ग्राहकों के रुपये सीधे नहीं जमा करती थी, बल्कि एजेंटों के माध्यम से ही काम होता था। अब आलम यह है कि अभिकर्ताओं को जवाब देना भारी पड़ रहा है।