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पानी की जांच कराने की योजना पर फिरा पानी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Tue, 06 Sep 2016 11:25 PM IST
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पानी का संकट
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। एक भी ग्राम पंचायत से पानी जांच की रिपोर्ट जलनिगम के लैब को नहीं मिली। अफसरों ने कई बार ग्राम पंचायतों को पत्र लिख कर पानी जांच की रिपोर्ट मांगी। ग्राम पंचायतें हैं कि उस पत्र को तवज्जो नहीं दे रहीं। इससे शासन की योजना फ्लाप हो गई। लोगों की सेहत से जुड़ी पानी की शुद्धता पर भी सवाल खड़ा हो गया है। मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में होने के बादवजूद वे भी प्रधानों की इस लापरवाही पर अंकुश नहीं लगा पा रहे।
पंचायत चुनाव के पूर्व जिले की 1105 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को शासन की ओर से पानी की शुद्धता की जांच को लेकर प्रशिक्षण के साथ ही किट उपलब्ध कराई गई थी। शासन के आदेशानुसार सभी प्रधानों को जल निगम ने किट दी। प्रति किट की कीमत करीब दो हजार रुपए बताई गई। निर्देश दिया गया था कि किट में मौजूद उपकरण व केमिकल से प्रधान खुद ग्राम पंचायत के हैण्डपम्प व कुएं के पानी की जांच करें। प्राप्त रिपोर्ट को जलनिगम की लैब में दिया जाना था। धीरे-धीरे चार साल से अधिक का समय गुजर गया। हालांकि एक भी ग्राम पंचायत से पानी जांच की रिपोर्ट लैब में अब तक नहीं पहुंची।
यह देखते हुए जलनिगम के अफसरों ने ग्राम प्रधानों को कई बार पत्र भी लिखा। जिसमें कहा गया कि वह बिना विलंब किए सभी पानी जांच की रिपोर्ट विभाग की लैब को उपलब्ध कराएं। लगातार कई पत्र भेजने के बाद भी जब ग्राम प्रधान नहीं चेते तो मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में भी डाला गया था। इसके बाद भी ग्राम पंचायतों से पानी जांच की एक भी रिपोर्ट जलनिगम की लैब तक नहीं पहुंची। विभागीय सूत्रों का मानना है कि जो किट प्रधानों को दी गई थी उसमें से ज्यादातर गायब हो गई हैं। जिन प्रधानों के पास किट है भी वह प्रयोग न होने से खराब हो चुकी है। इस लापरवाही से सरकार की योजना तो बर्बाद हुई ही, लोगों की सेहत पर भी खतरा बरकरार है।
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प्रशिक्षण पर खर्च हुआ धन भी बर्बाद
किट देने के बाद सभी ग्राम प्रधानों को पानी जांच के लिए प्रशिक्षण दिया गया था। एक हफ्ते के प्रशिक्षण में हर रोज उन्हें नाश्ता और करीब 200 रुपए भी दिए गए थे। इस प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने उन्हें किट में उपलब्ध केमिकल और उपकरणों से पानी जांच का तरीका बताया था। प्रशिक्षण प्राप्त व किट लेने के बाद भी प्रधान पानी जांच की रिपोर्ट नहीं दे रहे। ऐसे में उनके प्रशिक्षण पर खर्च हुआ सरकार का लाखों रुपया भी बर्बाद ही माना जा रहा है।
नए प्रधानों को नहीं दी गई किट
गत वर्ष पंचायत चुनाव के पहले नई ग्राम सभाओं का गठन किया गया है। जिससे गांवों की संख्या 1105 से बढ़कर 1255 हो गई। चुनाव बाद नए प्रधानों को पानी की जांच संबंधी किट मिलना तो दूर उन्हें इसकी बाबत जानकारी ही नही है। वर्षो बीतने के बाद अफसर भी अब ग्रामीणों के सेहत के लिए पानी की होने वाली जांच को लेकर फिक्रमंद नहीं हैं।
कई बार पत्र ग्राम पंचायतों को भेजा गया। पानी की शुद्धता की रिपोर्ट मांगी गई। इसके बावजूद एक भी ग्राम पंचायत से रिपोर्ट नहीं मिली। मामला अफसरों के संज्ञान में भी है।
राजेश खरे
अधिशासी अभियंता जलनिगम
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पंचायत चुनाव के पूर्व जिले की 1105 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को शासन की ओर से पानी की शुद्धता की जांच को लेकर प्रशिक्षण के साथ ही किट उपलब्ध कराई गई थी। शासन के आदेशानुसार सभी प्रधानों को जल निगम ने किट दी। प्रति किट की कीमत करीब दो हजार रुपए बताई गई। निर्देश दिया गया था कि किट में मौजूद उपकरण व केमिकल से प्रधान खुद ग्राम पंचायत के हैण्डपम्प व कुएं के पानी की जांच करें। प्राप्त रिपोर्ट को जलनिगम की लैब में दिया जाना था। धीरे-धीरे चार साल से अधिक का समय गुजर गया। हालांकि एक भी ग्राम पंचायत से पानी जांच की रिपोर्ट लैब में अब तक नहीं पहुंची।
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यह देखते हुए जलनिगम के अफसरों ने ग्राम प्रधानों को कई बार पत्र भी लिखा। जिसमें कहा गया कि वह बिना विलंब किए सभी पानी जांच की रिपोर्ट विभाग की लैब को उपलब्ध कराएं। लगातार कई पत्र भेजने के बाद भी जब ग्राम प्रधान नहीं चेते तो मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में भी डाला गया था। इसके बाद भी ग्राम पंचायतों से पानी जांच की एक भी रिपोर्ट जलनिगम की लैब तक नहीं पहुंची। विभागीय सूत्रों का मानना है कि जो किट प्रधानों को दी गई थी उसमें से ज्यादातर गायब हो गई हैं। जिन प्रधानों के पास किट है भी वह प्रयोग न होने से खराब हो चुकी है। इस लापरवाही से सरकार की योजना तो बर्बाद हुई ही, लोगों की सेहत पर भी खतरा बरकरार है।
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प्रशिक्षण पर खर्च हुआ धन भी बर्बाद
किट देने के बाद सभी ग्राम प्रधानों को पानी जांच के लिए प्रशिक्षण दिया गया था। एक हफ्ते के प्रशिक्षण में हर रोज उन्हें नाश्ता और करीब 200 रुपए भी दिए गए थे। इस प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने उन्हें किट में उपलब्ध केमिकल और उपकरणों से पानी जांच का तरीका बताया था। प्रशिक्षण प्राप्त व किट लेने के बाद भी प्रधान पानी जांच की रिपोर्ट नहीं दे रहे। ऐसे में उनके प्रशिक्षण पर खर्च हुआ सरकार का लाखों रुपया भी बर्बाद ही माना जा रहा है।
नए प्रधानों को नहीं दी गई किट
गत वर्ष पंचायत चुनाव के पहले नई ग्राम सभाओं का गठन किया गया है। जिससे गांवों की संख्या 1105 से बढ़कर 1255 हो गई। चुनाव बाद नए प्रधानों को पानी की जांच संबंधी किट मिलना तो दूर उन्हें इसकी बाबत जानकारी ही नही है। वर्षो बीतने के बाद अफसर भी अब ग्रामीणों के सेहत के लिए पानी की होने वाली जांच को लेकर फिक्रमंद नहीं हैं।
कई बार पत्र ग्राम पंचायतों को भेजा गया। पानी की शुद्धता की रिपोर्ट मांगी गई। इसके बावजूद एक भी ग्राम पंचायत से रिपोर्ट नहीं मिली। मामला अफसरों के संज्ञान में भी है।
राजेश खरे
अधिशासी अभियंता जलनिगम