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दीवारों व पेड़ों पर रह गए दहशत के निशान
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:16 AM IST
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थाने पर हुए हमले में दीवारों और पेड़ों पर दहशत के निशान अभी भी हैं। जो भी इन निशानों को देखता है वह एक बार सहम जा रहा है। पेड़ों पर से छालें उड़ गईं हैं तो खिड़की का शीशा बम धमाके से टूट गया। इसके अलावा दीवारों पर भी गोलियों के कई निशान मौजूद हैं। मानिकपुर थाने पर हमला करने वाले हमलावरों की मंशा दहशत फैलाने की रही और वह सफल भी हुए। थाने पर मौजूद उनके दहशत के निशान लोगों को इसका अहसास करा रहे हैं। अंधाधुंध फायरिंग और बमबाजी से पेड़ों और दीवारों पर निशान बन गए हैं।
थाने के सामने ही कंपाउंड में तीन पेड़ आम के हैं। इसकी डालों और तनों की छाल छिल गई है। इसके अलावा थाने की बिल्डिंग की दीवार वा भी पर कई जगह गोलियों के निशान हैं। कंपाउंड की दीवार में भी कई जगह गोली मारी गई है। इसके अलावा जमीन पर भी प्लास्टिक बम के छर्रे व गोलियों के कारतूस मिले हैं। पुलिस ने थाना परिसर में 28 ऐसी जगहों को चिह्नित किया है जहां दहशतगर्दी के निशान मिले हैं। इसके अलावा पुलिस को 32 बोर की पिस्टल और 315 के तमंच के 16 खोखे भी मिले हैं। पिस्टल का एक कारतूस भी बरामद हुआ है। हर तरफ से थाने में आतंक पैदा करने का पूरा प्रयास किया गया था।
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थाने के सामने ही कंपाउंड में तीन पेड़ आम के हैं। इसकी डालों और तनों की छाल छिल गई है। इसके अलावा थाने की बिल्डिंग की दीवार वा भी पर कई जगह गोलियों के निशान हैं। कंपाउंड की दीवार में भी कई जगह गोली मारी गई है। इसके अलावा जमीन पर भी प्लास्टिक बम के छर्रे व गोलियों के कारतूस मिले हैं। पुलिस ने थाना परिसर में 28 ऐसी जगहों को चिह्नित किया है जहां दहशतगर्दी के निशान मिले हैं। इसके अलावा पुलिस को 32 बोर की पिस्टल और 315 के तमंच के 16 खोखे भी मिले हैं। पिस्टल का एक कारतूस भी बरामद हुआ है। हर तरफ से थाने में आतंक पैदा करने का पूरा प्रयास किया गया था।
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