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Pratapgarh News: गोमती और सई में मछली पकड़ेंगी समितियां, होगी नीलामी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:12 PM IST
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Committees to fish in Gomti and Sai rivers; auctions to be held.
बेल्हा देवी धाम ​स्थित सई नदी। संवाद
जिले से होकर बहने वाली सई और गोमती नदी में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ने) की तैयारी है। इसके लिए नदी के प्रत्येक पांच किमी के दायरे की नीलामी की जाएगी। पट्टी तहसील में गोमती नदी के सात किमी और लालगंज तहसील में सई नदी के 57 किमी दायरे को नदी जलधारा योजना के तहत नीलाम किया जाएगा। इसके लिए मछुआ समितियों को आवेदन करना होगा।
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डीएम की अध्यक्षता वाली समिति मछुआ समितियों का चयन करेंगी। चयनित समितियां ही नदी में मछली पकड़ सकेंगी। इसके लिए 16 से 23 अक्तूबर तक नीलामी होगी।

जिला मत्स्य अधिकारी कमलेश कुमार बौद्ध ने बताया कि जिले में 27 मछुआ समितियां हैं। नदी जलधारा योजना के तहत दोनों नदियों के दायरे को नीलाम किया जाएगा। इसके बाद चयनित समितियां ही मछली पकड़ेंगी। इससे मछली उत्पादन में इजाफा होगा।
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साथ ही समितियों को आर्थिक लाभ होगा। पट्टी तहसील के लिए गोमती नदी की नीलामी 16 से 18 अक्तूबर के बीच होगी। लालगंज तहसील में सई नदी की नीलामी 18 से 23 अक्तूबर के बीच होगी। नीलामी के लिए अभी तक एक समिति ने आवेदन किया है।
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चयनित समितियों को मिलेगा अधिकार
जिन समितियों का चयन नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से होगा। उन्हें इन नदियों में मत्स्य आखेट करने का अधिकार प्राप्त होगा। यह कदम नदियों के संसाधनों के प्रबंधन और स्थानीय समितियों को आर्थिक अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मध्य प्रदेश और बिहार भेजी जाती है मछली
जिला मत्स्य अधिकारी कमलेश कुमार बौद्ध ने बताया कि जिले में नदियों, तालाबों, जलाशयों से प्रति वर्ष 116 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। जिले से मध्य प्रदेश और बिहार में मछली भेजी जाती है। साथ ही आसपास के जिलों रायबरेली, अमेठी, लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर की मंडियों में मछलियां भेजी जाती हैं।

गांवों को चिह्नित कर होती है नीलामी
दोनों नदियों की नीलामी प्रक्रिया 2020 से शुरू हुई लेकिन गोमती नदी की नीलामी 2023-2024 में ही हो सकी। जबकि सई नदी की नीलामी हर वर्ष होती है। मत्स्य निरीक्षक जंग बहादुर ने बताया कि नदियों की नीलामी गांव से गांव के बीच की जगह को चिह्नित कर किया जाता है। इसमें प्राचीन स्थलों को भी चिह्नित कर नदियों की नीलामी की जाती है।
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एक नजर में आंकड़े
जिले में मछुआ समुदाय की आबादी - 8012
मछुआ समितियों की संख्या - 27
मछुआरों को दिए गए तालाब के पट्टे - 1700
प्रति वर्ष मछली उत्पादन-116 मीट्रिक टन
(नोट- जिला मत्स्य विभाग से प्राप्त आंकड़े)
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